बोनस अधिनियम का उल्लंघन करने पर ठेका श्रमिकों ने किया प्रदर्शन

Balod News - लौह अयस्क खान समूह राजहरा में ठेकेदारों द्वारा बोनस अधिनियम का उल्लंघन किए जाने के विरोध में हिंदुस्तान स्टील...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:50 AM IST
Dallirajhara News - chhattisgarh news contract workers demonstrated in violation of bonus act
लौह अयस्क खान समूह राजहरा में ठेकेदारों द्वारा बोनस अधिनियम का उल्लंघन किए जाने के विरोध में हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू ) के तत्वावधान में सैकड़ों ठेका श्रमिकों ने माइंस कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रबंधन व ठेकेदारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए बोनस एक्ट संशोधन 2015 के पालन की मांग की गई। इस संबंध में सीजीएम तपन सूत्रधार को ज्ञापन सौंपते कर श्रमिकों को ठेकेदारों द्वारा कम बोनस राशि का भुगतान किया गया है उन्हें अविलंब बोनस के अंतर की राशि का भुगतान करने की मांग की।

यूनियन के अध्यक्ष प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि सरकार के बनाए कानूनों व संबंधित एजेंसियों द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देश का पालन करवाना बीएसपी प्रबंधन की जिम्मेदारी है। खदानों में कार्यरत सभी ठेका श्रमिकों का भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन मासिक 7000 रुपए से काफी ज्यादा है, इसलिए उन्हें 7000 रुपए से अधिक राशि बोनस के रूप में भुगतान की जानी चाहिए। फिर भी ठेकेदारों ने अधिकतम 7000 रुपए ही बोनस का भुगतान किया है। सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय में प्रकरण दर्ज कराने के बाद जारी की गई एडवाइजरी नोटिस के बावजूद ठेकेदारों द्वारा द्वारा बोनस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए ठेका श्रमिकों को कम बोनस राशि का भुगतान किया गया। इस तरह बोनस भुगतान अधिनियम का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत और सांठगांठ है । क्योंकि प्रबंधन कम बोनस राशि भुगतान किए जाने के बावजूद ठेकेदारों पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा है। धरना प्रदर्शन में ठेका श्रमिकों के साथ यूनियन के पदाधिकारी अध्यक्ष प्रकाश क्षत्रिय, सचिव पुरुषोत्तम सिमैया, उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा, आर के कुर्रे ,एमआर पाटिल उपस्थित थे।

दल्लीराजहरा. प्रदर्शन के बाद सीजीएम को ज्ञापन सौंपते हुए।

संशोधन के विपरीत बोनस का भुगतान किया गया

गौरतलब है कि बोनस अधिनियम की धारा 12 में वर्ष 2015 में संशोधन कर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बोनस भुगतान के लिए मूल वेतन की सीमा 7000 रु. या फिर सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन के आधार पर किया जाएगा। इस संबंध में सीटू यूनियन द्वारा सहायक श्रम आयुक्त केंद्रीय रायपुर के सामने प्रकरण दर्ज कराया गया था, जिस पर सहायक श्रम आयुक्त ने 21 अक्टूबर 2019 को बीएसपी प्रबंधन को एक एडवाइजरी नोटिस जारी किया। जिसमें स्पष्ट किया है कि बोनस की गणना के लिए अधिकतम 7000 रु. या फिर सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन दोनों में से जो अधिक हो उस राशि पर बोनस की गणना कर उसका भुगतान किया जाएगा। सहायक श्रम आयुक्त द्वारा एडवाइजरी नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अधिकांश ठेकेदारों ने बोनस अधिनियम के संशोधन के विपरीत 7000 रु. की अधिकतम सीमा के आधार पर ही बोनस भुगतान किया है। जो कि बोनस अधिनियम संशोधन प्रावधान एवं सहायक श्रम आयुक्त द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का खुला उल्लंघन है।

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