गबन: 132 पूर्व सरपंचों से 31 साल बाद भी वसूल नहीं सके 54 लाख

Balod News - दुर्ग संभाग कमिश्नर दिलीप वासनिकर ने जिले के सभी एसडीएम से पंचायत पदाधिकारियों की बकाया राशि वसूल करने के...

Oct 13, 2019, 06:30 AM IST
दुर्ग संभाग कमिश्नर दिलीप वासनिकर ने जिले के सभी एसडीएम से पंचायत पदाधिकारियों की बकाया राशि वसूल करने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत के अफसर कह रहे हैं कि लगभग 50 लाख रुपए की वसूली की जानी है। रिकाॅर्ड पर गौर करें तो वर्ष 1988 से 2015 तक ही जिले के 132 पंचायत प्रतिनिधियों से 54 लाख रुपए की वसूली नहीं हो पाई है। इस दौरान अफसरों ने नोटिस भेजकर संबंधितों से कितनी राशि वसूल पाए है, यह भी कोई बता नहीं पा रहा है।

पिछले दो वित्तीय वर्ष में कई पंचायतों में राशि का हिसाब नहीं मिल पाया है। जिन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा जा रहा है। अफसर दबी जुबान कह रहे केस काफी पुराना है और हम नए, पुराने रिकार्ड को खंगालकर ही एक्शन ले पाएंगे। दरअसल जिले के इन प्रतिनिधियों से शासन को 64 लाख 86 हजार 682 रुपए की राशि वसूली की जानी है। जिसे ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत किया गया था। लेकिन राशि का दुरुपयोग किया गया यानि काम हुआ नहीं और आहरण कर लिया। जिसका हिसाब किसी के पास नहीं है।

ढिलाई: कमिश्नर ने बैठक में अफसरों से कहा- अब तत्काल करें कार्रवाई

इन कार्यों में सोशल ऑडिट में मिली गड़बड़ी

छग राज्य मनरेगा सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य वर्ष 2011-12 से 2015-16 तक के मनरेगा व इंदिरा आवास योजना के क्रियान्वयन की जानकारी लिए थे। तब इंदिरा आवास, मनरेगा के खेत मरम्मत, तालाब गहरीकरण, बकरी और मुर्गी शेड, नया तालाब निर्माण, राजीव गांधी सेवा केन्द्र के अलावा मनरेगा के सभी कार्यों के मूल्यांकन का आडिट बारीकी के साथ किए थे। जिसमें गड़बड़ी सामने आई थी।

शासकीय राशि वसूलने की जिम्मेदारी इनकी

राजस्व विभाग

क्या जिम्मेदारी: खुलासे के बाद एसडीएम को राशि वसूलने को लेकर आदेशित करता है।

और अब तक हुआ क्या: समय नहीं होने की बात कहकर अफसर जनसुनवाई में समय नहीं दे सके। जनसुनवाई में जिन पंचायतों को पैसा वापस करने या हिसाब देने कहा गया था, उनका रिकार्ड लेकर अब वसूली करेंगे।

दावा: सोशल आॅडिट, जनपद पंचायत के जरिए जिन पंचायतों में गड़बड़ी की शिकायत मिली। वहां नोटिस भेजा गया है। शासकीय राशि का वसूली कर रहे है।

हकीकत: कई बार नोटिस भेजने के बाद भी बकाया राशि लाखों में ही है। रिकार्ड खंगाल रहे हैं।

जिला प्रशासन, जिला व जनपद पंचायत

क्या जिम्मेदारी: शासकीय योजनाओं के तहत काम हो रहा है या नहीं, इसकी मानिटरिंग करनी चाहिए।

और अब तक हुआ क्या: सोशल आॅडिट करने वाली एजेंसी अपने स्तर पर कार्रवाई तो कर रही है लेकिन मामले की जानकारी होेने के बाद भी तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि 50 लाख से ज्यादा वसूली बाकी है।

दावा: जनसुनवाई कर हिसाब मांगते है। जिन कार्यो का हिसाब नहीं मिलता, उनके एवज में राशि भुगतान के निर्देश देते हैं।

हकीकत: बालोद व डौंडी में जनसुनवाई कर बकाया राशि वसूलने की बातें कहीं गई।

फिलहाल मामले में अभी यह चल रहा

गबन करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों से राशि वसलूने जिला पंचायत व राजस्व विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। नोटिस भेजकर वसूली का सिलसिला अब तक चल रहा है, फिर भी उम्मीद के अनुरूप खास सफलता नहीं मिल पाई है।

वर्ष 1988-89 से 2015 तक 132 पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों से नहीं वसूल पाए 54 लाख रुपए

जनपद पंचायत वर्ष बकायादार गबन राशि

बालोद 2004 से 2015 09 269861

गुरूर 2005 से 2015 09 774004

गुंडरदेही 1988 से 2015 26 659849

डौंडीलोहारा 1990 से 2015 72 3037743

डौंडी 1990 से 2015 16 692297

योग --- 132 5433754

जिले के चार सरपंचों की हो चुकी मौत

विभागीय जानकारी अनुार 12 पूर्व सरपंचों का प्रकरण न्यायालय में दर्ज है। वहीं 4 सरपंचों की मौत हो चुकी है। ऐसे केस में शासकीय राशि को समायोजन करने की प्रकिया होगी। यानी वसूली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अधिकतम एक महीने की सजा का प्रावधान

जिपं सीईओ लाेकेश चंद्राकर ने कहा कि कई पंचायतों से 50 लाख रुपए वसूलना है। कलेक्टर के माध्यम से एसडीएम को पत्र भेजा गया है। गबन करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकतम एक माह तक सजा का प्रावधान है।

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