इन महिलाओं के लिए “क” से कढ़ाई ही था लेकिन अब ये “क” से कम्प्यूटर भी जानती हैं

Balod News - आज हम ऐसे गरीब मध्यम खेतिहर मजदूर और घरेलू महिलाओं की बात करेंगे जो अपनी पहचान सिर्फ घर की चार दीवारों में कैद ना...

Nov 11, 2019, 06:36 AM IST
आज हम ऐसे गरीब मध्यम खेतिहर मजदूर और घरेलू महिलाओं की बात करेंगे जो अपनी पहचान सिर्फ घर की चार दीवारों में कैद ना रखते हुए हाईटेक जमाने से साथ चलने को तैयार हो गई है यह किस्सा है शहर के ई साक्षरता केंद्र से ट्रेनिंग ले चुकी उन महिलाओं की।

कम्प्यूटर का प्रशिक्षण लेने के बाद ये महिलाएं अब बिल पेमेंट व पैसा ट्रांसफर ऑनलाइन कर लेती हैं। कम्प्यूटर संबंधी छोटे-छोटे काम भी करने लगी है। हाईटेक बनने का तरीका यह महिलाएं सीख गई हैं। जानकर आश्चर्य होता है कि जो मजदूर महिलाएं हाथों में झाड़ू पोंछा तो कोई सामान लेकर ही काम करती नजर आती थी। अब उनके हाथ में कंप्यूटर का माउस नजर आता है। बचपन में मुश्किल से पांचवी छठवीं तक ही पढ़ पाई यह महिलाएं आज खुद को युवा पीढ़ी से कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार कर रही है।

शहर के ई साक्षरता केंद्र में इन महिलाओं को निशुल्क ट्रेनिंग दी जाती है जो महिलाएं यहां से ट्रेनिंग पा चुकी है। उनमें अधिकतर उन गरीब परिवेश की महिलाएं शामिल हैं जो नगरपालिका के माध्यम से कचरा प्रबंधन का काम भी बेहतर तरीके से करती हैं।

घर की रसोई में खाना बनाने तक ही ये सीमित नहीं हैं, 55 से 60 की उम्र में भी कम्प्यूटर की ट्रेनिंग ले रहीं महिलाएं, अब बिल का भुगतान और पैसा ऑनलाइन करती हैं ट्रांसफर

कम्प्यूटर के साथ यह सब भी सीखती हैं

ई साक्षरता केंद्र की एजुकेटर पूर्णिमा विश्वकर्मा ने कहा कि केंद्र में सिर्फ कम्प्यूटर ही नहीं सिखाया जाता बल्कि इसके अलावा व्यक्तित्व विकास, श्रेष्ठ पालकत्व, आत्मरक्षा सहित अन्य कई ज्ञान की बातें भी सिखाई जाती है। जो आमतौर पर पुस्तकों में नहीं मिलती। एक महीने का कोर्स होता है । कोर्स के बाद एक परीक्षा भी होती है। जिसमें पास हुए लोगों को ई साक्षरता केंद्र का प्रमाण पत्र भी मिलता है।

पहल: ई साक्षरता केंद्र ने दिखाया उम्र दराज महिलाओं को हाईटेक बनने का रास्ता

बालोद. 60 साल की उम्र में कंप्यूटर ऑपरेट करती हुई पुनिया बाई साहू।

महिलाओं ने कहा- शिक्षा लेने, सीखने की कोई उम्र नहीं

माउस पकड़ने से भी हाथ कांपते थे : 60 वर्षीय पुनिया बाई ने कहा की बच्चों को घर में स्मार्ट मोबाइल चलाते देखती थी। सोचती थी मैं कभी यह सब कर पाऊंगी या नहीं? खुद को बच्चों और आज की युवा पीढ़ी से पिछड़ी हुई मानकर चलती थी। लेकिन जब इस साक्षरता केंद्र में खुद करने की बारी आई तो कंप्यूटर का माउस छूने से भी घबराने लगी लेकिन सीखने की लगन ने सारे डर दूर कर दिए।

कभी सोचा नहीं था यह कर पाएंगे: निर्मला पटेल ने कहा आज हमारे बच्चे कम्प्यूटर क्लास जाते हैं। कभी सोचा नहीं था कि मैं भी कभी कम्प्यूटर क्लास जाऊंगी और कम्प्यूटर भी सीख जाऊंगी। पर शिक्षा और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। मुझे भी कम्प्यूटर व अन्य हाईटेक शिक्षा सीखने की उत्सुकता जगी। अब ऐसा है कि ऑनलाइन बिल पेमेंट सहित कई काम चुटकी में कर लेती हैं।

चौथा बैच शुरू, 14 से 60 साल के लोग ले रहे लाभ

ई साक्षरता केंद्र शहरी क्षेत्र के कम पढ़े लिखे लोगों को आज डिजिटल साक्षर बनाने का एक जरिया है। लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने निशुल्क प्रशिक्षम दिया जा रहा है। 14 से 60 साल उम्र के कोई भी व्यक्ति यहां ट्रेनिंग ले सकते हैं । ट्रेनिंग पूरा करने के बाद एक परीक्षा पास होने पर उन्हें 600 रुपए छात्रवृत्ति प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। तीन महीने में 100 से ज्यादा महिलाओं और युवाओं को लाभ मिल चुका है। केंद्र का चौथा बैच भी शुरू हो चुका है।

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