असली सीता को तो रावण छू भी नहीं पाया: राम दयाल

Balod News - गंजपारा में हुए राम कथा के अंतिम बुधवार को अयोध्या के पं रामदयाल बाबू ने कहा कि रावण को मारने के बाद राम ने सीता की...

Nov 21, 2019, 06:35 AM IST
Balod News - chhattisgarh news ravana could not even touch the real sita ram dayal
गंजपारा में हुए राम कथा के अंतिम बुधवार को अयोध्या के पं रामदयाल बाबू ने कहा कि रावण को मारने के बाद राम ने सीता की अग्नि परीक्षा ली। इस पर लोग कई तरह का तर्क लगाते हैं। जबकि राम ने असली सीता को पाने के लिए ऐसा किया। असली सीता तो कभी रावण के साथ गई ही नहीं थी। रावण जिसे ले गया था वह माया सीता थी।

सीता अग्नि देव की उपासक थी। उन्हें लक्ष्मी का अवतार भी कहा जाता है। राम विष्णु के अवतार माने गए हैं। रावण के हरने से पहले ही असली सीता ने खुद को अग्नि को सौंप दिया था। कहा जाता है अपने उपासक को अग्निदेव नुकसान नहीं पहुंचाते इसलिए असली सीता को स्वीकार कर माया रूपी सीता को अग्नि ने बाहर किया था। उसे ही रावण अपने साथ ले गया था। अग्नि परीक्षा के बहाने अग्नि में पहले से समाई सीता को वापस पाने के लिए राम ने ऐसा किया। इस परीक्षा में माया रूपी सीता चली गई और असली सीता राम को प्राप्त हुई। असली सीता को तो रावण कभी छू भी नहीं पाया था।

बालोद. गंजपारा में राम कथा सुनने के लिए पहुंचे क्षेत्र के श्रद्धालु।

स्वार्थी संसार में अच्छे दोस्त मिलना भी उपलब्धि

रामदयाल ने कहा कि आज के इस स्वार्थी संसार में अच्छे दोस्त मिलना बड़ी उपलब्धि है। जो सामने तो कोमल वचन कहता है और पीठ-पीछे बुराई करता है, ऐसे लोगों से हमेशा दूरी बनाकर रखना चाहिए। क्योंकि ये स्वार्थी होते हैं। जिसका मन सांप की चाल के समान टेढ़ा है, ऐसे कु मित्र को तो त्यागने में ही आपकी भलाई है।

गरीबी से बड़ा कोई दुख नहीं, संत मिलन सा सुख नहीं: उन्होंने कहा कि जगत में दरिद्रता यानी गरीबी के समान कोई दुख नहीं है और संतों के मिलने के समान कोई सुख नहीं है। क्योंकि मन, वचन और शरीर से परोपकार करना ही संतों का सहज स्वभाव है। महान संत आपको अच्छे विचार देते हैं, जिससे आप समाज की भलाई के लिए काम करते हैं।

अपने जीवन में उतारना होगा राम के व्यवहार को

रामचरितमानस में भगवान श्रीराम के चरित्र का चित्रण जितने प्रभावशाली तरीके से किया गया है, उतने ही प्रभावशाली तरीके से भगवान राम के माध्यम से जीवन को जीने का तरीका भी बताया गया है। जीवन को सफल बनाना है तो राम को भजने के साथ ही सांसारिक व्यवहार का भी ध्यान रखना होता है।

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