शरद पूर्णिमा आज, पूर्णिमा तिथि रात 12.36 से कल रात 2.38 बजे तक

Balod News - शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण महापूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:30 AM IST
Balod News - chhattisgarh news sharad purnima today full moon date from 1236 pm to 238 pm tomorrow
शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण महापूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है।

चंद्रमा साल भर में शरद पूर्णिमा की तिथि में ही अपनी षोडश कलाओं को धारण करता है। आश्विन शरद पूर्णिमा पर इस बार 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की किरणों का हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी दिन माता लक्ष्मी, चंद्रमा और देवराज इंद्र का पूजन रात्रि के समय होता है। शरद पूर्णिमा पर शहर सहित गांवों में विभिन्न जगहों पर कार्यक्रम होंगे।

पंडित नारायण प्रसाद व ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि 13 अक्टूबर की रात 12.36 बजे से 14 अक्टूबर की रात 2.38 बजे तक रहेगी। वहीं 13 अक्टूबर की शाम 5.26 बजे चंद्रोदय का समय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त रहता है। इस दिन चंद्रमा धरती के निकट होकर गुजरता है।

शरद ऋतु की होगी शुरुआत: इसी दिन से शरद ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की साधना करने से आर्थिक और व्यापारिक लाभ मिलता है। शरद पूर्णिमा की रात में अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण चंद्रमा से अमृतमयी धारा बहती है, इस दिन खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखी जाती है। इस खीर को अगले दिन ग्रहण करने से घर में सुख-शांति और बीमारियों से छुटकारा मिलता है। शरद पूर्णिमा की रात में चांदनी में रखे गए खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने का विधान है। दमा के रोग में विशेष लाभ मिलता है। इस रात्रि में चंद्रमा सबसे तेज एवं ऊर्जावान होता है। चंद्रमा की रात में लोगों के द्वारा विभिन्न कार्यक्रम भी किए जाते हैं। प्राचीन मान्यताओं के आधार पर शरद पूर्णिमा की रात में सुई में धागा पिरोने से आंखों की रोशनी में वृद्धि होती है।

मंदिरों में होगी पूजा अर्चना, भजन-कीर्तन

इसी दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, सुपारी से की जाती है। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पूजन करने के बाद चंद्रमा को खीर का भोग लगाना चाहिए। रात 10 से 12 बजे तक चंद्रमा की किरणों का तेज अधिक रहता है। इस बीच खीर के बर्तन को खुले आसमान में रखना फलदायी होता है, उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं और वह मन, मस्तिष्क व शरीर के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। शहर के मंदिरों में पूजा-अर्चना।

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