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मनुष्य के पास वाणी का वैभव जो अनमोल है: चंदनबाला
महावीर भवन में प्रवचन श्रृंखला में साध्वी चंदनबाला ने कहा कि इस जगत में सभी प्राणियों से अलग मनुष्य को वाणी का वैभव मिला है, जो कि अनमोल है। हमें इसकी सुरक्षा करनी चाहिए। वाणी से विवाद या संवाद, यश या अपयश, तिरस्कार या सत्कार प्राप्त करना अपने हाथ में है। जिस तरह पानी का उपयोग छान कर किया जाता है, उसी तरह वाणी का उपयोग पर विचार कर करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति मीठी वाणी सुनना चाहता है, कटु वचन किसी को भी अच्छा नहीं लगता। हमें मित्रों की संख्या बढ़ानी है तो मधुर वचनों का प्रयोग करना होगा।
हथियार के वार के घाव साध्वी चंदनबाला तो भर जाते हैं, लेकिन शब्दों के घाव नहीं भरते। महाभारत जैसी घटना के पीछे भी शब्दों के बाण ही थे। बिना ब्रेक की गाड़ी जिस तरह दुर्घटना का कारण बन सकती है उसी तरह जिव्हा पर नियंत्रण नहीं होने से हमें हानि उठानी पड़ सकती है।
साध्वीश्री ने कहा कि क्रोध आने से विवेक का दरवाजा बंद हो जाता है। क्रोध मूर्खता से शुरू होकर पश्चाताप में जाकर समाप्त होता है। जिस तरह ज्यादा कहना रोग का कारण बनता है उसी तरह ज्यादा बोलना झगड़ा का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि जीभ में हड्डी नहीं होती, लेकिन हड्डी तुड़वाने का काम बखूबी कर लेती है। वृद्धावस्था में जब शरीर की अन्य इंद्रियां कमजोर हो जाती है तब भी जीभ कमजोर नहीं होती। ज्ञानी भगवंत कहते है वाणी वीणा की तरह होनी चाहिए, बाण की तरह नहीं क्योंकि यह उत्थान और पतन दोनों का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि दिमाग मे आइस जबान में शुगर और हृदय में प्रेम की फैक्ट्री होनी चाहिए।