बासीन में 110 एकड़ में लगी तिवड़ा, चना, मसूर फसल खराब, किसान बोले- झांकने तक नहीं आते अफसर

Balod News - जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम बासीन, यहां 110 एकड़ में लगी तिवड़ा यानी लाखड़ी व चना की फसल 7 व 8 फरवरी को...

Feb 15, 2020, 07:05 AM IST
Gunderdehi News - chhattisgarh news tiwada gram lentil crops in 110 acres in basin farmers say officials do not even come to peek

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम बासीन, यहां 110 एकड़ में लगी तिवड़ा यानी लाखड़ी व चना की फसल 7 व 8 फरवरी को बेमौसम बारिश के कारण खराब हाे गई है। बेमाैसम बारिश ताे थम गई पर खेतों मंे पानी भरा हुअा है। बर्बादी का मंजर अब तक दिख रहा है।

फसल नुकसान की जानकारी किसानों ने जिम्मेदार अफसरों को दे दी है, बावजूद कोई झांकने तक नहीं आया है। यहां के हर किसान के जुबान में बस यही है कि जब फसल बेहतर होती है तब श्रेय लेने प्रोत्साहित हमने किया करके अफसर खेतों तक पहुंच जाते हैं लेकिन नुकसान के बाद सहायता देने कोई नहीं पहुंचा। किसानों का कहना है कि मोटरपंप के साधन होने के बाद भी कृषि विभाग के अफसरों की ओर से दलहन, तिलहन को लगाने प्रोत्साहित करने पर धान फसल नहीं लगाए। अब नुकसान की भरपाई कौन करेगा, इस सवाल पर अफसर मौन है।

गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानाें के साथ है। अगर नुकसान हुअा हाेगा ताे नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने अधिकारियाें काे कहेंगे।

90% फसल हुई खराब अब मवेशियों के लिए भूसा ही काम आएगा

किसानाें का कहना है कि 90 प्रतिशत फसल खराब हाे चुकी है। जाे बचा है, वह भूसा ही है। जाे मवेशियाें काे खिलाने काम आएगा। इस बार किसानाें ने बाेअता सिस्टम यानी जाेताई कर खेताें में तिवड़ा लगाया था ताकि उत्पादन बेहतर हाे सकें लेकिन बेमाैसम बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया।

क्षेत्र के इन किसानों की रबी फसल हो गई चाैपट

राेहित 4 एकड़, नूतन, अंजाेर 2 एकड़, धनेश्वर 3 एकड़, लेखराम डेढ़ एकड़,प्रीतम, जागेश्वर, गणेशराम, लाेकनाथ, हाेमलाल, गंभीर, नरेश, तिलकराम, संताेष, रामलाल, गजाधर, शेषकुमार के 1-1 एकड़ सहित 50 किसानाें के तिवड़ा, चना, मसूर की फसल खराब हुई है। कृषि विभाग के अफसर कह रहे हंै कि आप तहसील में आवेदन करें।

अफसरों व जनप्रतिनिधियाें की भी सुनें

कृषि विभाग: सहायक संचालक एसएन ताम्रकार ने कहा कि तिवड़ा फसल बीमा के दायरे में अब नहीं अाता। राजस्व विभाग के माध्यम से किसानाें काे सहायता राशि नियमानुसार मिल सकती है।


विधायक ने कहा: किसानों को सहायता राशि दिलाएंगे

राजस्व विभाग: तहसीलदार एके पुशाम ने कहा कि किसानाें की अाेर से अगर अावेदन अाया है ताे मैं दिखवा लेता हूं। नुकसान आकलन के आधार पर अागे सहायता राशि उपलब्ध कराने प्रयास करेंगे।


मौसम की ऐसी मार कि लागत तक नहीं निकलेगी

केजूराम ने बताया कि एक एकड़ में तिवड़ा लगाने लागत 6 हजार रुपए तक अाया। सब कुछ अच्छा रहता माैसम नहीं बिगड़ता ताे एक एकड़ में 6 से 7 क्विंटल उत्पादन होता। सीजन में प्रति क्विंटल 3000-3500 तक बेचते अा रहे है। इस हिसाब से अगर 100 एकड़ में भी तिवड़ा फसल हाेता है ताे प्रति क्विंटल 3000 की दर से 18 लाख रुपए का नुकसान किसानाें काे हाे रहा है।

तिवड़ा में फल-फूल नहीं लगा, कीट प्रकोप भी

डाेमन ने बताया कि तिवड़ा में फल, फूल लगा था, वह बेमाैसम बारिश के कारण झड़ गया है। जाे बचा है, कीट प्रकाेप ज्यादा है। फरवरी में फल लगता है, मार्च तक उत्पादन हो जाता लेकिन यह हालात इस बार नहीं बनेंगे। कलेक्टर, कृषि उपसंचालक,्र कृषि विस्तार अधिकारी, गुंडरदेही तहसीलदार को किसानाें ने आवेदन सौंपकर सहायता राशि दिलाने की मांग की है।

तिवड़ा के साथ चना की फसल भी खराब

जोहन पटेल ने बताया कि एक एकड़ में लगी चना फसल खराब हाे चुकी है। फल, फूल नहीं अाया है, बारिश के कारण कीट प्रकोप ज्यादा है। सियाराम ने बताया कि बारिश से नुकसान तय है, 5 एकड़ में चना व 10 एकड़ में तिवड़ा लगाया था। तरुण रामनाथ ने बताया कि 12 एकड़ में तिवड़ा व 5 एकड़ में चना लगाया था। नूतन लाल साहू ने बताया कि चार एकड़ में लगे तिवड़ा की फसल खराब हो गई है।

किसानों की जुबानी- लागत घलो हासिल नहीं हो सके साहब, जेमे फल फूल रहिस वो ह झड़ गए हाबे


किसान केजूराम साहू ने ठेठ छत्तीसगढ़ी में अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि डेढ़ एकड़ में लाखड़ी लगाए रहे हाे, बारिश हाेइस त सुबह अाके देखे हाे त खेत में पानी भराए रहिस, एे संबंध में साहब मन ल बताय हाे त राजस्व विभाग में अावेदन करे बर कहत है, गुंडरदेही तहसीलदार ल अावेदन दे हाबन, जे हिसाब से अनुमान लगात हन लागत घलो हासिल नही हो सके साहब, काबर की पानी पड गए हाबे, जेमे फल फूल रहिस वो ह झड़ गए हाबे।

किसान डोमन साहू ने बताया कि दो एकड में तिवड़ा लगाए रहे हाे, जे अब खराब हाे गए हाबे, कुछु हासिल नहीं हाेय, हमर गांव में ज्यादा बारिश हाेय है, अाेकरे नतीजा हरे, अधिकारी मन ह झांके नहीं हे। कथे कि हमर अधिकार से बाहर हे, हाथ में फसल ल छुअत हन ताे टूटके बिखरत हाबे, कुछ दिन बाद कालापन आही, ताहन सब कुछ तबाह हाे जाही, खेत में पानी भरे हाबे। अभी भले खेत में हरियाली दिखत हाबे, फेर नुकसान ताे हाे गए हाबे।

बालोद. डाेमन साहू के डेढ़ एकड़ में लगी फसल खराब।

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