बुद्धि के साथ विनय जरूरी है, नहीं तो अहंकार बढ़ जाता है: हेमंत मुनि मसा

Balod News - समता भवन में चल रहे चातुर्मास प्रवचन में हेमंत मुनि मसा ने कहा कि प्रभु परमात्मा ने साधु कैसा होता है के बारे में...

Bhaskar News Network

Aug 14, 2019, 08:35 AM IST
Balod News - chhattisgarh news vinay is necessary with intellect otherwise arrogance increases hemant muni masa
समता भवन में चल रहे चातुर्मास प्रवचन में हेमंत मुनि मसा ने कहा कि प्रभु परमात्मा ने साधु कैसा होता है के बारे में बताया कि साधु दिखता नहीं साधुत्व जिसके भीतर रम जाए, तब साधु दिखता है। साधु को देखने के लिए तीसरी आंख चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम फोटो देख कर बाकी औपचारिकता पूरी कर सकते हैं। साधु चंद्रमा के समान निर्मल होता है। जिसके पास बैठने से शांति की अनुभूति होती है। दिशा बदलना ही दीक्षा है, अपनी अभिव्यक्ति शांति के साथ दीजिए। आज देखते हैं कि व्यक्ति प्रशंसा से फूला नहीं समाता है। मुनिश्री ने कहा कि साधु के जीवन का एक लक्ष्य होता है। अकेला व्यक्ति से संघ नहीं चलता, कई लोगों से संघ बनता है। संघ का प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे के सहयोग देने वाला होता है। बुद्धि के साथ विनय जरूरी है, यदि विनय नहीं है तो अहंकार बढ़ जाता है। विचारों के टकराव से संघर्ष ही उत्पन्न होगा।

जुनून है तो असंभव काम भी संभव हो जाता है

हर्षित मुनि मसा ने कहा कि साधु जीवनपर्यंत छहि काय जीवों की रक्षा करने का संकल्प लेता है। इसे निर्मल तरीके से पालन करना। हमारे में कार्य करने का अगर जुनून हो तो हर मुश्किल से मुश्किल कार्य भी संभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामान्य कार्य से ऊपर उठकर सोचे। कार्य के प्रति जुनून रहे सिर्फ चारदीवारी तक सीमित ना रहे।

उलझो मत बल्कि हमेशा सुलझाने का प्रयास करो

प्रवचन देते हुए मुनिश्री ने कहा कि वीतरागता की साधना करने वाले साधक को क्रोध, मान, माया, लोभ पर विजय प्राप्त करना है। राग, द्वेष से ऊपर उठेंगे, तभी हम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह संसार की सबसे बड़ी साधना हैं। जिसने अपने आप को जान लिया उसने सब को जान लिया। उन्होंने कहा कि प्रभु कहते हैं कि उलझो मत सुलझने का प्रयास करो।

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