पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Sukma News Chhattisgarh News 27 Days Later The Superintendent Admitted Negligence Said The Student Died In The Pota Cabin Not At Home

27 दिन बाद अधीक्षक ने मानी लापरवाही , कहा घर पर नहीं पोटा केबिन में हुई थी छात्र की मौत

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
चिंतागुफा पोटाकेबिन गए मनीष कुंजाम ने छात्रों से भी की बातचीत

चिंतागुफा पोटाकेबिन में पिछले महीने तीसरी के छात्र माड़वी पिंटू की इलाज के अभाव में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता देख कलेक्टर चंदन कुमार ने अधीक्षक भूपतराज ठाकुर को निलंबित कर नए अधीक्षक की नियुक्ति तक यहां पदस्थ सहायक अधीक्षक भगवान सिंह चुरेंद्र को अधीक्षक पद की जिम्मेदारी सौंपी है।

छात्र की मौत की जांच करने गुरुवार को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम कुछ लोगों के साथ आश्रम पहुंचे और निलंबित अधीक्षक से इस मामले की हकीकत बताने कहा। शुरू में तो अधीक्षक अपने पुराने बयान को ही दोहराता रहा लेकिन जब कुंजाम ने इस मामले की जांच उच्चस्तरीय कमेटी से कराने की बात कही तो अधीक्षक ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि छात्र पिंटू की मौत इलाज के अभाव में उसके घर पर नहीं बल्कि आश्रम में ही हुई थी। अधीक्षक द्वारा अपनी गलती मानने के बाद कुंजाम ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अधीक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

कुंजाम ने सौंपे गए ज्ञापन में जिले में संचालित सभी तरह के आवासीय शैक्षणिक संस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी कलेक्टर से की है। कुंजाम ने कहा कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां पर जब भी इस प्रकार की शिकायत सामने आएगी इसका विरोध करते हुए जिला प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

भेजी के चार छात्र 27 दिन बाद भी नहीं लौटे: मृतक छात्र पिंटू का भाई माड़वी संजू व चचेरा भाई माड़वी अखिल के अलावा भेजी निवासी दो अन्य छात्र सोयम दीपक व कवासी चरण भी पोटाकेबिन में रहकर पढ़ रहे हैं। 15 फरवरी को पिंटू का शव छोड़ने गए अधीक्षक के साथ चारों छात्र भी पिकअप में सवार होकर भेजी गए थे। छात्र के मौत के 27 दिन बाद भी चारों छात्र नहीं लौटे हैं। बताया गया कि परिजनों को पैसे देकर अधीक्षक ने छात्रों को मामला शांत होने तक पोटाकेबिन नहीं भेजने की हिदायत दी है।

जांच करने गए बीईओ के सामने भी झूठे बयान दिए और दिलवाए: मामले में डीएमसी श्याम सिंह चौहान ने 27 फरवरी को कोंटा बीईओ एसके दीप को जांच के निर्देश दिए थे। कोंटा बीईओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में छात्र की मौत भेजी स्थित घर पर होने की बात कही है। अधीक्षक भूपतराज ठाकुर ने परिजनों के अलावा पोटाकेबिन के अनुदेशक, छात्रों पर भी दबाव डालकर झूठा बयान दिलवाया था। अधीक्षक ने बताया कि उसने परिजनों को 20 हजार रुपए दिए थे। इधर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन एवं सर्व आदिवासी समाज की मांग के बाद जिला प्रशासन ने दोबारा जांच की जिम्मेदारी कोंटा एसडीएम हिमांचल साहू को सौंपी है।

छात्र की घर में मौत की झूठी कहानी गढ़ दी


कुंजाम के अनुसार चिंतागुफा पोटाकेबिन छात्र सोढ़ी हिड़मा, पोड़ियाम हिड़मा और मिड़ियम भीमा ने बताया कि 14 फरवरी की शाम पिंटू को तेज बुखार था। पूरी रात वह रो-रोकर उल्टी करता रहा। उसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं था। उचित इलाज के अभाव में छात्र ने दम तोड़ दिया। बच्चों ने 15 फरवरी की सुबह इसकी जानकारी यहां पदस्थ शिक्षकों को दी। अनुदेशक संदेश ने अधीक्षक को छात्र की मौत की सूचना दी।

खबरें और भी हैं...