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680 पेड़ों का हिसाब हुुआ, फिर गिनती बंद हो गई

एक वर्ष पहले
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बैलाडीला डिपॉजिट-13 के मामले में सख्ती बरतने के साथ जांच में भी तेजी आई है। पहले प्रशासन ने फर्जी ग्राम सभा की रिपोर्ट सरकार को सौंपी, इसके बाद अब फॉरेस्ट विभाग ने भी पेड़ों की कटाई मामले में सख्ती बरती है। 9 महीने की जांच के बाद गुरुवार को एनसीएल के तात्कालिक सीईओ वीएस प्रभाकर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश कर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। डिपॉजिट-13 मामले में लगातार बरती जा रही सख्ती के बाद अब जिले में हड़कंप मचा है।

इधर फर्जी ग्राम सभा के खुलासे के बाद भी अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। नंदराज पहाड़ में वन विभाग ने शुरुआती गणना में 680 पेड़ों को काटे जाने की बात कही थी, इसके आगे के काटे गए पेड़ों की गणना विभाग अभी तक नहीं करा पाया है। संयुक्त संघर्ष समिति इस जांच से संतुष्ट नहीं है। समिति का मानना है कि यहां 2000 से ज्यादा पेड़ों की अवैध कटाई हुई है। बैलाडीला डिपॉजिट 13 नंबर में काटे गए पेड़ों की गणना का काम दोबारा कब शुरू होगा, इसकी जानकारी वन विभाग नहीं दे पा रहा है। मामले के संबंध में बचेली रेंजर अशोक सोनवानी से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने
कॉल रिसीव नहीं किया।

ग्राम सभा का नोडल अफसर कौन, ये भी खुलासा नहीं

हिरोली में कथित ग्राम सभा जिला प्रशासन के द्वारा आयोजित करवाई गई थी। जिसमे मुख्य रूप से पंचायत सचिव को ही ग्रामीणों ने दोषी ठहराया था। जबकि हिरोली में हुई विशेष ग्राम सभा का नोडल अफसर कौन था इसका भी आज तक खुलासा नहीं हो पाया है। इधर कलेक्टर दंतेवाड़ा टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है, जो भी निर्देश मिलेंगे कार्रवाई होगी।

जानिए... यह था मामला

नंदराज पहाड़ पर 25400 पेड़ों को काटने की अनुमति एनसीएल ने वन विभाग से ली थी। इन पेड़ों को वन विभाग से कटवाया जाना था, लेकिन एनसीएल ने पेड़ काटने का कार्यादेश एक स्थानीय ठेकेदार को दे दिया, इसके बाद विभाग की नाक के नीचे पेड़ों की कटाई हुई और अफसरों को भनक भी नहीं लगी। जून में जब आदिवासियों का आंदोलन हुआ तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। वन विभाग ने पूर्व में 680 और बाद में 880 पेड़ों को काटने की बात कही थी, लेकिन जांच में 680 पेड़ों के काटने की ही पुष्टि हुई।
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