- Hindi News
- National
- Jagdalpur News Chhattisgarh News 70 Patients Arrived For Kidney Test 12 Of Them Were Found Suffering From Blood Pressure And 9 Sugar
किडनी की जांच कराने 70 मरीज पहुंचे, इनमें 12 ब्लडप्रेशर और 9 शुगर से पीड़ित पाए गए
किडनी की देखभाल के प्रति लोगों को जागरूक करने महारानी अस्पताल में गुरूवार को विश्व किडनी दिवस पर विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान यहां पहुंचने वाले लोगों की आरएफटी यानि रीनल फंक्शनिंग टेस्ट करवाया गया। हालांकि इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को मिलेगी, जिसके बाद किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों का इलाज शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही किडनी की देखभाल करने जरूरी जानकारी भी डॉक्टरों ने दी।
बताया जाता है कि शिविर का आयोजन कैंसर डे-केयर यूनिट ने करवाया। इस दौरान यहां कुल 70 से ज्यादा मरीजों की जांच की गई। इनमें 9 मरीज मधुमेह यानि शुगर और 12 मरीज ब्लडप्रेशर से पीड़ित रहे। इन मरीजों में किडनी की देखभाल के लिए ज्यादा गंभीर होने की सलाह देते हुए जरूरी टिप्स भी डॉक्टरों ने दिए। कैंसर डे-केयर यूनिट प्रभारी डॉ. ऋषभ साव ने बताया कि इस भागदौड़ वाली दिनचर्या में किडनी पर खासा असर पड़ रहा है। यही कारण है कि इन दिनों किडनी के मरीजों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। किडनी के प्रति लोगों को जागरूक करने दिवस पर शिविर आयोजित किया गया है।
किडनी हैल्थ फॉर एवरीवन-एवरीवेयर थीम पर मनाया गया किडनी दिवस: विश्व किडनी दिवस हर साल 12 मार्च को मनाया जाता है। इस साल दिवस की थीम किडनी हैल्थ फॉर एवरीवन-एवरीवेयर रखी गई है। हर जगह, हर किसी के लिए किडनी के स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना ही इसका उद्देश्य है। डॉ. साव ने बताया कि भारत में हर साल दो लाख लोगों को किडनी रोग होता है। शुरुआती दौर में इस बीमारी को पकड़ पाना मुश्किल होता है, लेकिन दोनों किडनियों के 60 प्रतिशत तक खराब होने के बाद ही मरीज को इसका पता चल पाता है। यही कारण है कि शुरू से ही किडनी के स्वास्थ्य के प्रति लोग सजग हों, इसके लिए जागरूकता भी जरूरी है।
किडनी रोग को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक: डॉ. साव ने बताया कि गुर्दा या किडनी रोग को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। किडनी रोगों से बचाव के लिए नियमित जांच और जीवनशैली जरूरी है। इसके साथ ही जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। किडनी की बीमारी के शुरूआती लक्षणों में लगातार उल्टी आना, भूख नहीं लगना, थकान और कमजोरी, पेशाब की कम मात्रा, खुजली, अनिद्रा, मांसपेशियों में खिंचाव मुख्य है।
अपनी मर्जी से दवाएं खाना भी हो सकता है भारी, किडनी पर पड़ता है सीधा असर
डॉ. साव बताते हैं कि इन दिनों लोग अपनी मर्जी से दवाएं लेकर खा लेते हैं। वे ये नहीं देखते कि इसका किडनी पर क्या असर पड़ेगा। यही कारण है कि हर बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूरी है। उन्होंने बताया कि बुखार आने पर जहां लोग पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक लेकर खा लेते हैं, लेकिन ये दवाएं किडनी पर सीधे असर डालती हैं। ऐसे में डॉक्टर सारी परिस्थितियों को देखकर डोज तय करता है।
इस तरह से बीमारी से बचा जा सकता है
{खाने में नमक, सोडियम और प्रोटीन की मात्रा का ध्यान रखना
{35 साल के बाद साल में कम-से-कम एक बार ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर कराएं
{ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के लक्षण मिलने पर हर छह महीने में पेशाब और खून की जांच कराएं
{रोज 8 से 10 गिलास पानी पिएं
{फल और हरी सब्जियां ज्यादा सेवन करना
{मैग्नीशियम किडनी को सुचारू रूप से काम करने में मदद कर सकता है, ऐसे खाने में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में हो
{पोषण से भरपूर खाना, व्यायाम, वजन नियंत्रित रखने से किडनी की बीमारी से बचा जा सकता है
जानिए...क्या हैं किडनी की बीमारी के कारण
{अधिक शराब पीना {मांस का अधिक सेवन करना {कम मात्रा में पानी पीना {अधिक मात्रा में नमक खाना {दर्दनाशक दवाओं का अधिक सेवन करना {धूम्रपान करना और अधिक सॉफ्ट-ड्रिक्स पीना {पेशाब रोकना।
ये हैं बीमारी के शुरुआती लक्षण
{पैरों और आंखों के नीचे सूजन {चलने पर जल्दी थकान और सांस फूलना {रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना {भूख न लगना और हाजमा ठीक न रहना {खून की कमी से शरीर पीला पड़ना।
जगदलपुर. शिविर में पहुंचे मरीजों की जांच करता स्वास्थ्य अमला।