बस्तर के मलेरिया पीड़ितों में 93% लोग प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम से पीड़ित

Bastar Jagdalpur News - मलेरिया मुक्त बस्तर के लिए प्रशासनिक तैयारियों के बीच सबसे बड़ी चुनौती मलेरिया पीएफ परजीवी से निपटने की है। इस समय...

Jan 24, 2020, 07:01 AM IST
Jagdalpur News - chhattisgarh news 93 of bastar malaria victims suffer from plasmodium falciparum
मलेरिया मुक्त बस्तर के लिए प्रशासनिक तैयारियों के बीच सबसे बड़ी चुनौती मलेरिया पीएफ परजीवी से निपटने की है। इस समय बस्तर में 93.5 मामले पीएफ के ही सामने आ रहे हैं। प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम ही मनुष्य में मलेरिया को सिर तक पहुंचाने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। इससे पीड़ित व्यक्ति अक्सर कोमा में चला जाता है। समय पर इलाज न मिले तो उसकी मौत हो जाती है। इसके अलावा प्लाज्मोडियम वाइवेक्स के 3.8 फीसदी और 2.7 प्रतिशत मिश्रित मामले सामने आ रहे हैं। पीड़ितों में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। जबकि सप्ताह भर की जांच में ही गर्भवती माताओं में भी मलेरिया के चौकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। 3255 गर्भवती माताओं के रक्त के नमूनों की जांच में 216 महिलाएं मलेरिया पीड़ित पाई गईं हैं। बस्तर में मलेरिया से मुक्ति के लिए 2024 तक का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन 15 जनवरी से स्वास्थ्य कर्मी डोर टू डोर जाकर परिवार के सभी सदस्यों के रक्त के नमूने ले रहे हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि मलेरिया पीड़ितों में 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें ग्रामीण इलाकों के बच्चों की संख्या ज्यादा है। सामान्यतया बच्चों में मलेरिया होने पर भी इसे साधारण बुखार समझ लिया जाता है। जब तक इलाज के लिए हास्पिटल पहुंचते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है, और मलेरिया के लिए जिम्मेदार पीएफ खून के जरिये सीधे दिमाग तक पहुंच चुका होता है।

सबसे ज्यादा मलेरिया पीड़ित बस्तर में, राज्य और देश का आंकड़ा बिगाड़ रहे: राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक 1.97 है, जबकि भारत का परजीवी सूचकांक 0.21 है। बस्तर संभाग के 16 ब्लाकों में मलेरिया की स्थिति बेहद खराब है। यहां वार्षिक परजीवी सूचकांक 10 से ज्यादा है। राज्य में मलेरिया के कुल मामलों में 64 प्रतिशत हिस्सेदारी बस्तर की है। कुल मिलाकर मलेरिया के मामले में राज्य की बेहतर स्थिति को बस्तर के आंकड़े खराब कर रहे हैं।

नोडल अफसर डॉ. सुभाष मिश्र मलेरिया पीड़ितों के आंकड़े जारी करते हुए।

सबसे ज्यादा प्रकोप नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर में

मलेरिया मुक्त बस्तर के लिए राज्य से आए नोडल अफसर डॉ. सुभाष मिश्र ने गुरुवार को मलेरिया पीड़ितों के आंकड़े जारी करते हुए मलेरिया मुक्त अभियान के तहत कार्यों की जानकारी दी। आंकड़ों को देखा जाए तो बस्तर संभाग में सबसे कम मलेरिया पीड़ित कांकेर में पाए गए हैं। इसके बाद जैसे जैसे दक्षित की ओर बढ़ा जाए मलेरिया पीड़ितों की संख्या बढ़ती जाती है।

7 दिनों में कुछ इस तरह मिले मलेरिया के मरीज

जिला जांच हुई पीड़ित मिले गर्भवती माता बच्चे

कांकेर 7667 23 00 11

कोंडागांव 9802 109 00 51

नारायणपुर 26150 1837 23 1189

बीजापुर 58104 2282 39 1051

दंतेवाड़ा 34785 2180 35 992

सुकमा 87544 2180 100 2684

बस्तर 51977 919 19 466

जनवरी, जुलाई और नवंबर में मिल रहे सर्वाधिक मरीज

सीएमओ आरके चतुर्वेदी के मुताबिक बस्तर में एनीमिया और कुपोषण का सबसे बड़ा कारण मलेरिया है। पिछले तीन साल के आंकड़ों के आधार पर यह सामने आया है कि हर साल जनवरी, जुलाई और नवंबर माह में मलेरिया के सबसे जयादा मामले सामने आते हैं। इन्हीं महीनों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए चिह्नांकित 1720 सर्वे दल द्वारा 14 लाख लोगों के रक्त की जांच आरडी किट के माध्यम से किए जा रहे हैं।

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