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एटक के अधिवेशन में उठेगा मामला- जब एनएमडीसी खनन के लिए सक्षम तो अडानी को क्यों दिया नंदराज

एक वर्ष पहले
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िकरंदुल में राज्यस्तरीय सम्मेलन 17 से 19 तक

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) का 42वां अधिवेशन 2 से 5 अप्रैल को केरल के एलेप्पी में होगा। इससे पहले किरंदुल में 17 से 19 मार्च तक संगठन का राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें एटक की राष्ट्रीय महामंत्री अमरजीत कौर विशेष रूप से मौजूद रहेंगी। इसके अलावा कई राष्ट्रीय पदाधिकारी और नेता भी इसमें शामिल होंगे।

सीपीआई दफ्तर में आयोजित पत्रवार्ता के दौरान एटक के प्रदेश अध्यक्ष आरडीसीपी राव ने बताया कि राज्यस्तरीय सम्मेलन में स्थानीय के साथ ही राज्य स्तरीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ जहां प्रस्ताव पारित करते हुए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी, वहीं नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेशीकरण, महंगाई, बेरोजगारी, आदिवासी क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची और पेसा कानून, नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण का विरोध, बैलाडीला की 13 नंबर की पहाड़ी को अडानी को देने का विरोध किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि जब एनएमडीसी अपने आप में खनन करने सक्षम है तो 13 नंबर की डिपॉजिट यानि नंदराज पहाड़ को अडानी को क्यों दिया गया, इस पर सरकार की नीति पर उन्होंने संदेह जताया है। इन सभी मुद्दों को राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय अधिवेशन में रखा जाएगा। इस मौके पर महासचिव हरिनाथ
सिंह भी मौजूद थे

फर्जी ग्रामसभा के लिए जिम्मेदार लोगों और अडानी पर हो एफआईआर: कुंजाम

जगदलपुर | सीपीआई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनीष कुंजाम ने शनिवार को राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बैलाडीला की पहाड़ियों में से 13 नंबर डिपॉजिट को अडानी को देने हुई फर्जी ग्रामसभा के लिए राज्य सरकार पर और अडानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी, लेकिन आनन-फानन में गलत एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही डिपॉजिट की लीज भी तत्काल रद्द करनी चाहिए थी। सीपीआई दफ्तर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कुंजाम ने कहा कि मामले में एनएमडीसी और सरकारी अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए और गिरफ्तार भी उन्हें किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य की भूपेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हो सकता है कि वे भी अडानी की सेवा ले रहे हैं, इसलिए वे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जबकि अडानी को बचाने की कोशिश में गलत तरीके से एफआईआर दर्ज कर दी गई है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार बनने से पहले लगातार विरोध कर रही कांग्रेस अब सरकार बनते ही प्रदेश की 14 कोल माइंस को अडानी के हाथों दे चुकी है। एक सवाल के जवाब में कुंजाम ने कहा कि बस्तर के कांग्रेसी विधायक खुद सरकार से नाखुश हैं। इसका कारण ये है कि उन्हें मंत्री या दूसरे कैबिनेट के पदों में शामिल ही नहीं किया गया है।

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