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सराहनीय पहल: किसान ने घर को ही बना डाला जैविक कीट उत्पादन का कारखाना

एक वर्ष पहले
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किसान अधिक उत्पादन के लालच में खेतों में अत्यधिक रसायनों, पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भूमि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक रसायन से जमीन की उत्पादक क्षमता कम होती जा रही है।

खासकर जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए रसायनमुक्त उत्पादन करना बड़ी चुनौती है। बस्तर जिले के किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने की जिम्मेदारी बस्तर जिले के बड़ेचकवा गांव में रहने वाले किसान कमल किशोर कश्यप ने ली है । कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों की मदद से इस किसान ने अपने घर के एक हिस्से को कृषक बायो कंट्रोल लैब बनाया है । जहां पर आने वाले दिनों में खुद और अन्य किसानों के सहयोग से जैविक कीट जिसे साधारण भाषा में मित्र कीट कहते हैं का उत्पादन करेगा । पहली बार जैविक कीट तैयार करने में किसान को कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए उसे कृषि महाविद्यालय की तरफ से कुछ जैविक कीट दिया गया । किसान ने बताया कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वह सालों से कोशिश कर रहा था।

अचानक उसे वैज्ञानिकों के माध्यम से जैविक किट तैयार करने की जानकारी मिली । इसके बाद इस काम में जुट गया और आने वाले दिनों में इसे बड़े पैमाने पर तैयार करेगा । कश्यप ने कहा कि लैब में तैयार होने वाले इन कीट को किसानों को मुफ्त में देगा । कृषि महाविद्यालय के कीट वैज्ञानिक डॉ यशपाल सिंह निराला और सहायक प्राध्यापक हेमंत पात्रा ने कहा कि बस्तर जिले का यह पहला किसान जो जैविक कीट उत्पादन कर रहा है। निराला ने कहा कि इस किसान ने बस्तर में कृषि को नए आयाम तक पहुंचाने की कोशिश की है । उनकी मेहनत का परिणाम है कि कृषक बायो कंट्रोल लैब उसके घर में ही
बनाया गया है।

सात दिनों तक मित्र कीट उत्पादन का प्रशिक्षण लिया

कमल किशोर को जैविक कीट उत्पादन में कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए जैव कीट वैज्ञानिक डॉ यशपाल सिंह निराला ने 2018-19 और 2019-20 में करीब सात दिनों तक कीट उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया । उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण लेने के बाद अपने घर में जैविक लैब स्थापित करने की बात कही । किसान की रूचि को देखते हुए शनिवार को कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ एच सी नंदा और रायपुर के कीट विज्ञान विभाग की डॉ जय लक्ष्मी गांगुली भी मौजूद थी ।

इन जैविक कीटों का उत्पादन किया जाएगा

{मैक्सिकन बिटल - यह जैविक मित्र कीट गाजरघास के शिशु, वयस्क दोनों पौधों को खाकर नष्ट करता है ।

{अंड परजीवी- इसे वैज्ञानिक भाषा में ट्राइकोग्रामा कहा जाता है । इस परजीवी अंड परजीवी का यह जैविक कीट पौधों के हानिकारक कीटों के अंडावस्था को नष्ट करता है। इससे धान में लगने वाले हानिकारक कीटों को नियंत्रित किया जा रहा है।

{ब्रेकान- यह इल्ली परजीवी है, यह इल्ली पर अपना अंडा छोड़ जाता है। इससे हानिकारक कीट मर जाते हैं। यह धान, सब्जी की खेती के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

{रेड्यूबिड बग- यह हानिकारक इल्लियों को खाता है। यह धान, सब्जी आदि के कीटों का नियंत्रण करता है।

{बस्तर का चापड़ा - बस्तर में पाए जाने वाले लाल चींटी को चापड़ा कहा जाता है ।यह सामान्यतः बस्तर में आम, अमरूद, गुड़हल में पाया जाता है ।

{लेडी बर्ड बिटल- इस जैविक कीट के माध्यम से दलहनी, मक्का व धान की फसलों में उपयोग किया जा सकता है ।

इन जैविक कीटों का करेगा उत्पादन किसान

मैक्सिकन बीटन- यह जैविक कीट मित्र गाजर घास को नष्ट करता है।

जगदलपुर. अपनी प्रयोगशाला में किसान कमल किशोर कश्यप।
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