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सीटी स्कैन, पैथोलॉजी की जरूरत...वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग से इलाज पर खर्च रहे 25 लाख

एक वर्ष पहले
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महारानी हॉस्पिटल के आईसीयू को पीपीपी मॉडल के तहत अपोलो ग्रुप की टेलीमेडिसिन सेवा से जोड़ा जा रहा है। यानी अब यहां के आईसीयू में भर्ती मरीजों का ट्रीटमेंट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, इंटरनेट से रिपोर्ट शेयर करने के साथ किया जाएगा। अपोलो ग्रुप के डॉक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहकर फिलहाल 6 बेड के मरीजों के इलाज की गाइडलाइन देंगे। इसके लिए अपोलो ग्रुप को बाकायदा 25 लाख भुगतान किया जाएगा।

बड़ा सवाल यह है कि अभी महारानी हॉस्पिटल में सीटी स्कैन सेवा, बेहतर पैथोलॉजी लैब, एक्सपर्ट डॉक्टर्स, सर्जन की नियुक्त जैसे ढेरों काम अटके हैं। ऐसे में 25 लाख खर्च करके टेलीमेडिसिन सेवा शुरू करना सवाल खड़े करता है। करोड़ों रुपये खर्च कर हॉस्पिटल के रेनोवेशन के बाद छह बेड का निजीकरण किया जा रहा है। महारानी हॉस्पिटल प्रबंधन ने कुछ दिनों पहले चुपके से आईसीयू की व्यवस्था हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल को सौंप दी थी। अफसरों ने 25 लाख में छह बेड की व्यवस्था देखने की बात भी पक्की कर ली थी।

इस बीच भास्कर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बिना टेंडर या कोटेशन के ही यह काम दे दिया गया है। इसके बाद अब आनन-फानन में अभिव्यक्ति की रुचि का टेंडर निकाला है। सिविल सर्जन डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि आईसीयू को टेलीमेडिसिन से जोड़ने के लिए टेंडर निकाला गया है। अपाेलो ग्रुप के विशेषज्ञ डॉक्टरों से यह
सेवा ली जाएगी।

अभी छह बेड के लिए टेलीमेडिसिन की सुविधा: महारानी हॉस्पिटल के आईसीयू में छह बेड पर कैमरे समेत अन्य उपकरण लगेंगे। इसे एक कंट्रोल पैनल से जोड़ा जायेगा। इसके बाद निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर कैमरे के जरिये मरीज और वॉर्ड में मौजूद स्टाफ से संवाद कर सकेंगे। इसके अलावा रिपोर्ट आदि भेजने की व्यवस्था भी रहेगी।

अंतिम विकल्प... रेफर क्योंकि सर्जरी तो होगी नहीं


लाखों रुपये खर्च कर यह सेवा शुरू हो जायेगी तब भी निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर मरीज को सिर्फ दवा दे पायेंगे। क्योंकि इमरजेंसी, सर्जरी की दशा में मरीज को रेफर ही करना पड़ेगा। क्योंकि महारानी हॉस्पिटल में एंजियोप्लास्टी, सिर की चोट, जैसे ऑपरेशन हो नहीं सकते हैं। ऐसे में नये सिस्टम से भी मरीज को सिर्फ दवा दी जायेगी और उसे रेफर कर दिया जायेगा।


खर्च करने से पहले इन बातों पर भी सोचना चाहिए...


{महारानी हॉस्पिटल में सीटी स्कैन और खून की जांच की बेहतर व्यवस्था हो सकती है। इससे मरीजों काे बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

{मेकाॅज और महारानी हॉस्पिटल में एक भी न्यूरो, कार्डियो या बड़े सर्जन नहीं हैं, कुछ अतिरिक्त फंड जोड़कर इनकी तैनाती हो सकती है।

{अभी 2 लाख सैलरी में यहां एमडी मेडिसिन की नियुक्ति हुई है, वह आईसीयू के एक्सपर्ट हैं, उनके रहते नए सिस्टम की जरूरत क्यों है।

{महारानी में सोनोग्राफी, एक्सरे के लिए दस-दस दिन की वेटिंग मिल रही है। अगर रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो जाए तो जांच रिपोर्ट तत्काल मिलेगी, इलाज भी जल्दी और बेहतर होगा।

{महारानी अस्पताल में अभी विशेषज्ञ डाॅक्टर और सर्जन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी


{ भास्कर की खबर के बाद रुचि की अभिव्यक्ति के तहत निकाला जा रहा टेंडर

{पहले बिना टेंडर और कोटेशन के ही अपोलो हैदराबाद को 25 लाख में दे दिया था जिम्मा

पैसों की बर्बादी कैसे...इन उदाहरणों से समझिए


महारानी अस्पताल प्रबंधन को यह सेवा शुरू करने का ख्याल बचेली के अपोलो हॉस्पिटल को देखकर आया। वहां डॉक्टरों की कमी से ऐसा सिस्टम लागू किया गया है। महारानी अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए सीटी स्कैन, खून की जांच करने की व्यवस्था ही नहीं है। हाल में यहां हैदराबाद से एक एमडी मेडिसिन को 1.5 लाख रुपये के वेतन पर नियुक्त किया गया है। यह डॉक्टर आईसीयू की कमान संभालने में दक्ष हैं। इसके अलावा यहां तीन एमडी मेडिसिन भी हैं। इसके बाद भी यह व्यवस्था पैसों की बर्बादी लग रही है।
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