इंद्रावती पार एरपुंड व हर्राकोड़ेर के मतदाताओं में दिखा उत्साह

Bastar Jagdalpur News - दंतेवाड़ा. मतदाता लंबी दूरी के रास्ते तय कर मतदान के लिए पहंुचे। भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा सरकारी उपेक्षा के...

Bhaskar News Network

Oct 22, 2019, 06:30 AM IST
Bastar News - chhattisgarh news enthusiasm was visible in voters of erpund and harrakodar across indravati
दंतेवाड़ा. मतदाता लंबी दूरी के रास्ते तय कर मतदान के लिए पहंुचे।

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा

सरकारी उपेक्षा के बावजूद चित्रकोट सीट पर विधानसभा उप चुनाव के लिए इंद्रावती नदी पार एरपुंड व हर्राकोड़ेर में बने 3 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का उत्साह देखने लायक था। दोपहर 3 बजे तक तीनों बूथ में 60 फीसदी से ज्यादा मतदान हो चुका था। महिलाएं दुधमुंहे बच्चों के साथ 10 से 12 किमी पैदल चलकर पहुंची थीं। बुजुर्ग भी इनमें पीछे नहीं थे। अपने 6 माह के बच्चे को गोद में लिए हितामेटा गांव का जमलू भी 10 किमी पैदल चलकर वोट डालने पहुंचा था। उसकी प|ी भी साथ आई थी। पावेल निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग मोतीराम ने भी 9 किमी दूर पावेल से आकर वोट डाला। उसकी तरह दूसरे बुजुर्ग भी मतदान करने आए थे। सरकारी उपेक्षा से आहत होने के बावजूद इस इलाके के मतदाता हर बार वोट डालने जरूर पहुंचते हैं।

कुछ गांवों से ग्रामीण आए ही नहीं: एरपुंड में शिफ्ट किए गए मतदान केंद्र बोदली में कचनार, बोदली, घोटिया, सालेपाल, कड़ियामेटा, टेटम, हितामेटा, पावेल गांव के कुल 927 मतदाताओं को वोट डालना था। इनमें से 65.75 फीसदी यानि 357 मतदाता दोपहर 3 बजे तक वोट डाल चुके थे, लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि ज्यादातर मतदाता पावेल व हितामेटा से थे। बोदली , कचनार, घोटिया सालेपाल, कड़ियामेटा, टेटम से मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचे। सुरक्षा कारणों से बोदली के बूथ को 8 किमी दूर एरपुंड में शिफ्ट किया गया था। इंद्रावती नदी पार इन बूथों की सुरक्षा के लिए दंतेवाड़ा जिले की फोर्स की मदद ली गई। जिला पुलिस बल व सीआरपीएफ 195 वीं बटालियन के जवान तैनात किए गए थे।

 

इतनी दूरी मतदान केंद्र से

कड़ियामेटा 12 किमी

बोदली 8 किमी

घोटिया 7 किमी

सालेपाल 12 किमी

टेटम 12 किमी

हितामेटा 10 किमी

कचनार 10 किमी

दंतेवाड़ा जिले में शामिल होने की मांग लंबित

इंद्रावती नदी पार के ये गांव बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में शामिल हैं, जिन्हें ब्लॉक व तहसील मुख्यालय जाने के लिए 65 से 75 किमी तक की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें दंतेवाड़ा जिले के बारसूर इलाके से होकर गुजरना पड़ता है। नए ब्लॉक पुनर्गठन आयोग ने दंतेवाड़ा जिले के बारसूर को नया ब्लॉक बनाकर इन गांवों को बारसूर में शामिल होने की सिफारिश की है, लेकिन 2 साल बाद भी ब्लॉक नहीं बन सका है।

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