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लाल भाजी, पालक, पलाश से बना रहीं गुलाल, डिमांड भी आने लगी

एक वर्ष पहले
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कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चीन से आयात होने वाले रंग, गुलाल, मुखौटों का उपयोग न करने की अपील की है। इस बीच रासायनिक रंगों के विकल्प के तौर पर हर्बल गुलाल तैयार हो रहा है। यह गुलाल कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में महिलाएं बना रही हैं। हालांकि इस काम की शुरुआत केवीके ने 2 साल पहले की थी, लेकिन इस बार रासायनिक रंगों के प्रभाव व कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को देखते हुए यह अच्छा विकल्प माना जा रहा है। वैज्ञानिक भी इसे सेहत के लिए अच्छा बता रहे हैं। दंतेवाड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र में समूह की महिलाएं अब तक करीब 10 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कर चुकी हैं। इस बार हर्बल गुलाल की अच्छी डिमांड बताई जा रही है। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नारायण साहू ने बताया कि केंद्र द्वारा उत्पादित हर्बल गुलाल चीनी रंग गुलाल की तुलना में कोरोना वायरस फ्री है। यह पूर्णतः रसायन मुक्त भी है। हर्बल गुलाल मशीन रहित प्रक्रिया से बनता है, जिसमें किसी पशुओं के अंगों या रासायनिक तत्वों या संशोधित कृत्रिम पदार्थों का उपयोग नहीं किया जाता है। यह इको फ्रेंडली, ह्यूमन फ्रेंडली है। डॉ साहू ने कहा कि रासायनिक रंग में लेड आक्साइड जो गुर्दे में विकृति ला सकता है। इसके संयोजित कॉपर सल्फेट आंखों में एलर्जी व अंधापन ला सकता है। इसके अलावा भी कई सारे नुकसान हैं।

ऐसे बना रहे हर्बल गुलाल

हर्बल गुलाल मानव स्वास्थ्य के अनुकूल है। इसका निर्माण प्राकृतिक व वानस्पतिक पदार्थों , रंगों के संयोजन से होता है। इसे बनाने में ज्यादातर खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है, यही वजह है कि इसका मानव स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। लाल रंग बनाने के लिए सिंदूर पेड़, गुलाबी के लिए लाल भाजी, हल्का पीला पलाश फूल, हरा के लिए पालक व बिन्स, बैगनी के लिए बीट, अरारोट का इस्तेमाल किया जाता है। समूह की महिलाओं ने बताया कि 400 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से इसे मार्केट में बेचा जाता है।

कई जगह भेज चुके, प्रदर्शनी में भी रखा

वैज्ञानिकों ने बताया कि जब से केवीके में महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं कई जगहों से डिमांड भी आई है। कई जगह प्रदर्शनी में भी इसे रखा गया था, जहां काफी पसंद भी किया गया। इस हर्बल गुलाल को बनाकर समूह की महिलाएं पैसे भी कमा रही हैं।

दंतेवाड़ा. हर्बल गुलाल बनाती समूह की महिलाएं
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