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हर चीज़ की कीमत देनी होगी

एक वर्ष पहले
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एक शहर में संगमरमर से बना खूबसूरत संग्रहालय था। संग्रहालय में संगमरमर से बनी विशाल मूर्ति थी, जिसे देखने दुनियाभर से लोग आते थे। एक रात संग्रहालय के फर्श पर लगी संगमरमर की टाइल्स ने मूर्ति से पूछा- दुनियाभर से यहां आने वाले लोग मुझ पर चल कर आते हैं और आपकी प्रशंसा करते हैं। क्या यह सही है? जबकि हम दोनों एक ही खदान से निकाले गए हैं। दुनिया हमारे साथ अलग-अलग ढंग से कैसे पेश आ सकती है? मूर्ति ने कहा, ‘हां तुम ठीक कहते हो। लेकिन क्या तुम्हें याद है कि जब मूर्तिकार औजारों का प्रयोग तुम्हें तराशने के लिए कर रहा था, तो तुम उसका कितना विरोध कर रहे थे। टाइल्स ने कहा : हां। औजारों से मुझे दर्द हो रहा था। मूर्ति ने कहा, जब आपने उसके औजारों को खुद पर प्रयोग नहीं करने दिया, तो उसने भी आपको छोड़कर मुझ पर काम शुरू कर दिया। मैं यह जानती थी कि इस मूर्तिकार के छैनी और हथौड़े के प्रयोग के बाद मैं कुछ अलग और खास बनूंगी। मैंने उन सभी दर्दनाक चोटों को सहन किया, जो मूर्तिकार ने मुझे दीं। जीवन में हमें हर चीज की कीमत देनी होती है। जीवन में आप जितने कठिन दौर से गुज़रते हैं, उतना ही अधिक निखरते हैं।
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