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माता व पिता ईश्वर के रूप, कभी अपमान न करें: आचार्य मुरलीधर

एक वर्ष पहले
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शांतिनगर स्थित दुर्गा मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथावाचक आचार्य मुरलीधर महाराज ने वराह अवतार और ध्रुव चरित्र प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कभी भी अपने माता-पिता का अपमान नहीं करना चाहिए। धरती पर सजीव रूप से ईश्वर हमारे साथ नहीं रह सकते, इसलिए उन्होंने माता-पिता के रूप में ईश्वर को हमारे साथ रहने भेजा। अपने माता-पिता का अपमान करना ईश्वर का अपमान होता है इसलिए ये हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर व्यक्ति अपने माता-पिता का अपमान करता है तो ईश्वर उस पर कभी प्रसन्न
नहीं हो सकते।

वराह अवतार प्रसंग सुनाते कहा कि जब पृथ्वी को हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को रसातल पर बंदी बना लिया था तो भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी को मुक्त कराया। वहीं उन्होंने ध्रुव चरित्र सुनाते बताया कि भक्त ध्रुव जब नन्हीं सी उम्र में ईश्वर की खोज में जंगल चले गए तो उन्हें डराने कई जानवर और भूत-प्रेत आए, लेकिन भगवान नारायण का नाम लेकर वे डटे रहे। भगवान के नाम के साथ वे निर्भय होकर अपनी तपस्या में लीन रहे। आखिर में भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। बाद में उन्हें सबसे ज्यादा चमकने वाले तारे के रूप में पहचान दी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे, जो भगवान के जयकारे लगाते रहे।

कथावाचक आचार्य मुरलीधर।
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