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12 साल की उम्र में नक्सली साथ ले गए थे, 10 साल बाद सरेंडर, साथियों से भी लौटने की अपील

एक वर्ष पहले
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पूर्वी बस्तर डिवीजन कमेटी में सक्रिय महिला नक्सली सुखमती उर्फ ज्योति (22 वर्ष) ने शुक्रवार को सरेंडर कर दिया है। ज्योति की पहचान बारसूर एरिया कमेटी में सक्रिय लीडर के तौर पर रही है। नक्सलियों ने इसे सिंगल शॉट गन भी दे रखी थी। ज्योति को महज 12 साल की उम्र में नक्सल कमांडर सोमजी ने नक्सलवाद से जोड़ दिया था।

ज्योति की परवरिश नक्सलियों के बीच ही हुई। नक्सलियों के साथ दस साल गुजारने के बाद ज्योति ने बस्तर आईजी सुंदरराज पी और एसपी दीपक झा के सामने सरेंडर कर दिया है। पुलिस काेआॅर्डिनेशन सेंटर में ज्योति ने समर्पण के बाद कहा कि हिंसा के रास्ते दबे कुचले लोगों को न्याय नहीं दिलवाया जा सकता है। 10 साल अंधेरे में रहने के बाद अहसास हुआ कि हिंसा से कोई क्रांति नहीं आती है। यदि उसे अपने लोगों की सेवा करनी है तो पहले उन्हें शिक्षित बनाना होगा और इसके बाद लोकतांत्रिक ढंग से उनकी आवाज सरकार तक पहुंचानी होगी। ज्योति इलाके की कई बड़ी वारदातों में शामिल रह चुकी है। ज्योति के खिलाफ इस इलाके के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं और उस पर 2 लाख से ज्यादा का इनाम घोषित है।

8 लाख के इनामी बादल समेत 3 हार्डकोर नक्सलियों ने किया सरेंडर

सुकमा| एक महिला समेत 15 लाख के तीन इनामी नक्सलियों ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। सरेंडर नक्सलियों में 8 लाख रुपए का इनामी प्लाटून नम्बर 26 का डिप्टी कमांडर करटामी वागा उर्फ बादल व उनकी प|ी पांच लाख रुपए की इनामी प्रशिक्षण टीम कमांडर मड़कम कमली, 2 लाख रुपए का इनामी प्लाटून नम्बर 24 का सदस्य मड़कम बीजू शामिल हैं।

नक्सल सेल कार्यालय में सरेंडर के दौरान एसपी शलभ सिन्हा, एएसपी सिद्धार्थ तिवारी, सीआरपीएफ की 226 बटालियन के टूआईसी विपिन कुमार, सीआरपीएफ की 227 बटालियन के टूआईसी मनोरंजन कुमार व सहायक कमांडेंट रामचरण राम एवं एसडीओपी प्रतीक चतुर्वेदी उपस्थित रहे। एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि हार्डकोर नक्सलियों के सरेंडर में सीआरपीएफ की बड़ी भूमिका रही है। सरेंडर करने वाले तीनों नक्सलियों को शासन की राहत व पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा।

बुरकापाल नक्सली हमले में शामिल था बादल: एसपी ने बताया कि मुंडूम निवासी करटामी वागा उर्फ बादल 2012 में नक्सली संगठन से जुड़ा। बादल दरभा डिवीजन में ही सक्रिय रहा। साल 2017 में बुरकापाल में पुल निर्माण की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ 74 बटालियन के जवानों की टुकड़ी पर हुए हमले में शामिल था।

नक्सली सोडी सुक्का ने किया आत्मसमर्पण


हमारे लोगों को हिंसा से न्याय नहीं मिलेगा: ज्योति

सरेंडर के बाद ज्योति ने बारसूर कमेटी के सभी नक्सलियों से अपील की है कि वे शांति के रास्ते में लौट आयें। ज्योति कहती है कि मैं विशेष तौर पर मिलिशिया कैडर राजेश, जयसिंग, फूल सिंग और मेरी साथी शांति से कहना चाहती हूं कि वो अपने लोगों को न्याय दिलाने के लिए जो हिंसा की लड़ाई लड़ रहे हैं वह गलत है।

जगदलपुर. पहली तस्वीर उस वक्त की है जब ज्योति नक्सलियों के बीच सक्रिय थी। दूसरी तस्वीर में सरेंडर के बाद आईजी-एसपी के साथ।

कोंटा| राज्य शासन की पुनर्वास योजना और भारत सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सली सोडी सुक्का ने शुक्रवार को सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन के कमाडेंट अनिल कुमार के सामने आत्मसमर्पण किया। कमाडेंट ने बताया कि सोडी सुक्का नक्सली संगठन में सक्रिय रूप से काम कर रहा था। पिछले कई दिनों से वह आत्मसमर्पण की योजना बना रहा था, जिसे वह आज पूरा कर पाया है। सुक्का पर माड़वी भीमा और माड़वी सुक्का को अगवा कर जान से मारने के आरोप में चिंतागुफा थाने में मामले दर्ज हैं। इस दौरान कंपनी के द्वितीय कमान अधिकारी रवि शंकर और बटालियन के अन्य अधिकारियों समेत कोंटा थाना प्रभारी गौरव पांडे, सरपंच लच्छिंदर एंव पोडियम सुक्का मौजूद थे।
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