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बस्तर में लगेंगे प्री-फैब्रिकेटेड गोबर गैस प्लांट
गोबर गैस के उपयोग बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। जहां इसकी खाद की मात्रा बड़े पैमाने पर पढ़ रही है वहीं आने वाले दिनो में गोबर गैस प्लांट का फायदा देने के लिए किसानों और अन्य लोगों को आने वाले दिनों में प्री फेब्रिकेटेड गोबर गैस प्लांट लगाकर दी जाएगी । गोबर गैस की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए यह प्लांट बस्तर जिले के 300 घरों में लगाया जाएगा इसको लेकर क्रेडा विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है। इस प्लांट को केवल उन्हीं लोगों के घरों में लगाया जाएगा जो हर दिन कम से कम 15-25 किलो गोबर का उपयोग इस प्लांट को चालू करने के लिए इकट्ठा कर सकें। इस सिस्टम को लगाने के बाद किसानों को दोहरा फायदा होगा। एक ओर जहां किसान आसानी से इस सिस्टम का उपयोग अपने घरेलू कार्यों के लिए करेगा तो वहीं इससे निकलने वाली खाद का उपयोग सब्जी के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। क्रेडा विभाग के सहायक अभियंता गोपी कश्यप ने बताया कि योजना को लेकर अप्रैल से काम शुरू किया जाएगा।
बकावंड के लोगों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा: गोबर गैस का उपयोग सालों से जिले में बकावंड ब्लाक के लोगों के द्वारा किया जाता है । इस नई योजना का लाभ भी इस ब्लाक के लोगों को सबसे ज्यादा मिलने की बात कही जा रही है । क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर जिले के दरभा, लोहांडीगुड़ा और बास्तानार का इलाका पथरीला है वहां पर इस ब्लाक की तुलना में मवेशी भी कम संख्या में हैं । इनकी तुलना में बकावंड ब्लाक की जमीन खेती के लिए अनुकूल होने के साथ ही यहां पर अन्य ब्लाकों की तु़लना में मवेशियों की संख्या ज्यादा।
15 से 21 हजार रुपए
की मिलेगी छूट
प्री फेब्रिकेटेड गोबर गैस प्लांट लगाने का काम क्रेडा विभाग के द्वारा किया जाएगा । एक प्लांट की लागत 45 हजार रुपए है । कम खर्च कर लोग इसका उपयोग करें इसके लिए इसमें लोगों को छूट दी जा रही है। जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम को लगाने जहां एसटी व और एससी वर्ग के लोगों को 21हजार रुपए की छूट दी जाएगी तो वहीं दूसरी ओर सामान्य वर्ग को 15 हजार रुपए की छूट मिलेगी।
क्या है यह सिस्टम
सहायक अभियंता ने बताया कि इस सिस्टम को लगाने के लिए हमें किसी तरह का स्ट्रक्चर का निर्माण नहीं करना होगा । सिंटेक्स की एक पानी की टंकी की तरह इसके लिए एक प्लास्टिक की टंकी का उपयोग किया जाएगा। इस टंकी के साथ मशीन को जोड़ दिया जाएगा। गोबर से गैस बनने की प्रक्रिया 21 दिन के बाद शुरू होगी। इसके बाद हर दिन निर्धारित मात्रा में गोबर डालकर कोई भी किसान या व्यक्ति इस सिस्टम का उपयोग कर सकता है।