घोर नक्सल प्रभावित मुलेर में बिना सुरक्षा के भेज दिया गया इंजीनियरों की टीम को

Bastar Jagdalpur News - दंतेवाड़ा जिले से पीएमजीएसवाई के दो इंजीनियरों और एक निजी कंपनी के सुपरवाइजर को नक्सलियों ने अगवा कर लिया गया।...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:30 AM IST
Bacheli News - chhattisgarh news team of engineers dispatched without security in fierce naxalite affected mueller
दंतेवाड़ा जिले से पीएमजीएसवाई के दो इंजीनियरों और एक निजी कंपनी के सुपरवाइजर को नक्सलियों ने अगवा कर लिया गया। इसके करीब 28 घंटे बाद तीनाें काे रिहा कर दिया गया।

बता दें कि इन तीनों को सड़क के सर्वे के लिए धुर नक्सल प्रभावित इलाके मुलेर में जाना था। मुलेर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि अभी अरनपुर से सीधे वहां तक पहुंचना ही संभव नहीं है और इस पूरे इलाके में नक्सलियों की हुकूमत चलती है। इलाके के हालात ऐसे हैं कि मुलेर के लोग गांव से बाहर आने के लिए सुकमा जिले के बड़ेचेट्‌टी वाली सड़क का प्रयोग करते हैं। स्थानीय लोग भी जिस बीहड़ से आना-जाना नहीं करते उस इलाके में पीएमजीएसवाई के इंजीनियर अरूण मरावी, कुआकोंडा जनपद में तैनात टेक्नीशियन (इंजीनियर) मोहन बघेल और मनरेगा में पेटी कांट्रेक्टर के लिए काम देखने वाले सुपरवाइजर मिन्टू बिना सुरक्षा के अंदर कैसे चले गये यह बड़ा सवाल बनकर उभरा है। तीन लोगों के अपहरण होने के बाद अब इलाके की पुलिस और खुद विभागीय अफसर भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर करते रहे। इस पूरे मामले में खास बात यह है कि पीएमजीएसवाई के ईई संतोष नाग को ही अपने कर्मचारियों के अगवा होने की खबर 24 घंटे बाद तक नहीं लग पाई थी। जब उनसे इस मामले में शनिवार दोपहर बाद जानकारी ली गई तो उन्होंने बड़े ही सहज अंदाज में कह दिया कि वे दंतेवाड़ा से बाहर हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

अरूण मरावी।

मोहन बघेल।

धुर नक्सल प्रभावित इलाके में बिना सुरक्षा के टीम कैसे गई इसका जवाब किसी के पास नहीं

दिनभर मोहन की बहन कहती रहीं- मेरे भाई ने गलती नहीं की, रिहा करें

इधर कर्मचारियों के अगवा होने की खबर के बाद उनके परिजन भी चिंतित थे। इंजीनियर मोहन बघेल की बहन कृति बघेल ने नक्सलियों से अपील की थी कि उनके भाई ने कोई गलती नहीं की और कोई गलत काम भी नहीं किया है। नक्सली उन्हें रिहा कर दें। कृति ने बताया कि शुक्रवार को जब भाई का फोन नहीं लगा तब भी परिवार के सदस्य चिंतित हो गये थे और शनिवार को उनके अगवा होने की खबर आ गई। भाई शुक्रवार को घर से कुआकोंडा जनपद कार्यालय जाने की बात कहकर निकले थे। इसी तरह बचेली निवासी इंजीनियर अरूण की प|ी नेहा ने भी नक्सलियों से अपील की थी कि उनके पति को जल्द से जल्द रिहा कर दें। अरूण के परिवार में उनकी प|ी और एक छोटी बच्ची है।

...फिर भैया का फोन आया, कहा- हमें रिहा कर दिया, हम आ रहे

देर शाम इंजीनियर मोहन बघेल की बहन कृति बघेल ने बताया कि शाम छह बजे के करीब भैया ने कॉल किया था। उन्होंने बताया कि सभी सुरक्षित हैं, रिहा कर दिया है और हम वापस लौट रहे हैं। इस फोन के आने के बाद परिजन बचेली से पालनार के लिए रवाना हो गए हैं।

देर रात नहीं लौटे तो सोनी सोरी भी जुटीं इंजीनियरों की तलाश में

दंतेवाड़ा जिले में अपहरण की घटना के बाद तीनों कर्मचारी जब शुक्रवार की देर रात तक घर नहीं लौटे तो फिर परिवार के सदस्यों ने इन्हें ढूंढना शुरू किया। शनिवार को इन्हें ढूंढने और इनकी रिहाई के लिए सोनी सोरी ने भी प्रयास किये।

शुक्रवार को 12.40 बजे अरनपुर कैंप में एंट्री की

मुलेर तक सड़क निर्माण के सर्वे के लिए पीएमजीएसवाई के इंजीनियर अरूण मरावी, कुआकोंडा जनपद में तैनात टेक्नीशियन (इंजीनियर) मोहन बघेल और मनरेगा में पेटी कांट्रेक्टर के लिए काम देखने वाले सुपरवाइजर मिन्टू एक साथ निकले थे। ये तीनों शुक्रवार की दोपहर 12.40 बजे अरनपुर के सीआरपीएफ चेक पोस्ट पर पहुंचे। यहां तीनों ने अपने नाम पते नोट करवाए और अंदर जाने का कारण भी बताया और कहा कि वे नहाड़ी तक जाएंगे। चूंकि इलाके में हर व्यक्ति को पता है कि नक्सली सड़क, पुल,पुलियों के निर्माण का विरोध करते हैं और जो लोग यह काम करते हैं उनके साथ मारपीट और कई बार उनकी हत्या भी कर दी जाती है। इससे पहले भी सुकमा जिले में पीएमजीएसवाई के अफसरों का अपहरण नक्सली कर चुके हैं।

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