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फरवरी में दो छात्राओं की मौत, हॉस्टल की अधीक्षिका ने किसी को सूचना तक नहीं दी
शहर सीमा से सटे मोरठपाल बालिका छात्रावास में बीमारी के चलते दो छात्राओं की मौत हो गई है। जिन दो छात्राओं की मौत हुई है उनमें से एक टाइफाइड से पीड़ित थी तो दूसरी छात्रा की मौत का कारण ही स्पष्ट नहीं हो पाया है। मरने वाली छात्राएं 11वीं और 12वीं में पढ़ाई कर रही थीं। छात्राओं की मौत का मामला हॉस्टल अधीक्षिका ने दबा रखा था लेकिन छात्राओं की मौत के बाद जब परिजन ने हॉस्टल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाया, तब मामले का खुलासा हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार मोरठपाल बालिका आश्रम में 2 फरवरी को सबसे पहले 11 वीं की छात्रा सोनिया कड़ती की मौत हुई। सोनिया टाइफाइड से पीड़ित थीं। इसकी मौत के 4 दिनों बाद इसके शव का पीएम करवाया गया। सोनिया राजूर गांव की रहने वाली थी। इसके बाद 27 फरवरी को 12वीं में पढ़ने वाली पार्वती कश्यप की मौत हो गई। पार्वती बीजापुर जिले के भैरमगढ ब्लॉक के तालनार की रहने वाली थी। पार्वती की मौत के बाद उसके शव का पीएम 3 मार्च को हो पाया है। पार्वती की मौत किस बीमारी से हुई यह नहीं पता चल पाया इसके बाद जब परिजन ने मौत पर सवाल खड़े किए तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। दरअसल हॉस्टल अधीक्षिका ने दोनों छात्राओं के मौत के मामले को दबा दिया था। इस मामले में शिकायत बढ़ी ताे तोकापाल बीएमओ और तहसीलदार गुरुवार को जांच के लिए हॉस्टल पहुंचे।
आश्रमों की व्यवस्था नहीं हो रही दुरूस्त
इधर सरकारी हॉस्टल, आश्रम और छात्रावासों की व्यवस्था पूरे संभाग में लचर बनी हुई है। कुछ दिनों पहले दंतेवाड़ा के बालिका छात्रावास में एक छात्रा ने बच्चे को जन्म दे दिया था। इस मामले में भी अधीक्षिका की लापरवाही सामने आई थी। सरकारी आश्रम-छात्रावासों में लगातार अधीक्षकों की लापरवाही सामने आ रही है लेकिन ठोस कार्रवाई के आभाव में व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।
तहसीलदार बोले- आश्रम अधीक्षिका ने किसी को जानकारी नहीं दी थी, स्टाफ के बयान दर्ज किए
मामले की जांच के लिए पहुंचे तोकापाल तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि आश्रम अधीक्षिका ने इस मामले की जानकारी छात्राओं की मौत के कई दिनों बाद दी है। उन्होंने कहा कि जांच की शुरुआत हो पाती उससे पहले ही अधीक्षिका छुट्टी पर चली गई है। ऐसे में यहां के अन्य स्टाफ का बयान दर्ज कर मामले की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जा रही है। इसके अलावा इलाके के बीएमओ ने भी दावा किया कि छात्राओं की बीमारी से संबंधित कोई जानकारी हॉस्टल से उन्हें नहीं मिली है।
25 दिन में एक के बाद एक छात्राओं जान गई, अधीक्षिका ने दबा रखा था मामला
जगदलपुर. हॉस्टल में जांच के लिए पहुंचे अफसर।