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जिला अस्पताल में कीमोथेरेपी की शुरुआत पर वार्ड-दवाओं की कमी
लंबे इंतजार के बाद दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में कीमोथेरेपी की शुरुआत हो गई है। मार्च में ही इस सुविधा को शुरू कराने अफसरों का दावा था, यह दावा अब पूरा हो गया। अब दंतेवाड़ा के कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए दूसरे जिलों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। जिला अस्पताल में ही इसकी सुविधा मिलने से मरीजों को इसका फायदा मिलना भी शुरू हो गया है, लेकिन बड़ी बात यह है कि यहां अब तक दवाइयां, वार्ड, ओपीडी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। दवाइयां मरीजों को खुद लानी पड़ रही है।
सीएमएचओ डॉ. एसपीएस शांडिल्य का कहना है कि एक अच्छी शरुआत हो गई है। दवाइयों को लेकर जो भी कमियां हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा। पहले दिन फरसपाल के राधेश्याम व सूरनार के पांडूराम की कीमोथेरेपी की गई। इस सुविधा के शुरू होने के पहले 26 फरवरी को यहां जिले के 12 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई थी। पहले दिन कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों ने बताया कि दंतेवाड़ा में सुविधा मिलने से अब परेशानी नहीं होगी। जब भी जरूरत होगी, अस्पताल आकर लाभ ले सकते हैं। जिला अस्पताल में कीमोथेरेपी के लिए डॉ. डीआर खूंटे, स्टाफ नर्स रश्मि व उषा इस काम का जिम्मा संभाल रही हैं।
अभी इनकी है जरूरत: जिला अस्पताल में फिलहाल जनरल वार्ड में दो मरीजों को रखकर कीमोथेरेपी दी जा रही है। इसके लिए अलग से 5 बिस्तर का वार्ड, ओपीडी, दवाओं की जरूरत है। इस व्यवस्था को संभालने वाले डॉक्टर खूंटे ने बताया कि सारी कमियों को दूर करने की मांग अधिकारियों से की गई है। हर दिन सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक यह सुविधा जिला अस्पताल
में मिलेगी।
कीमोथेरेपी कराने मरीजों को जाना पड़ता था रायपुर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. दीपक कश्यप डेढ़ सालों से बेसिक कैंसर ऑपरेशन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी की शुरुआत होने से फायदा होगा। यहां के कुछ मरीज ऐसे हैं, जो एक या दो बार ही कीमोथेरेपी करवा पाते हैं। प्रदेश में रायपुर मेकाहारा में यह सुविधा है। दूरी व खर्च अधिक होने से मरीजों का हर बार जाना संभव नहीं हो पाता। कैंसर के ऑपरेशन के बाद कीमोथेरेपी नहीं कराने से दोबारा कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
दंतेवाड़ा. जिला अस्पताल में पहले दिन दो मरीजों की कीमोथेरेपी की गई।