छत्तीसगढ़ / चंद्रयान-2 मिशन में बालोद के मिथलेश टीम का हिस्सा, इसरो में दो साल से संभाल रहे हैं कंप्यूटर डिपार्टमेंट

मिशन चंद्रयान-2 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते वैज्ञानिक मिथलेश साहू मिशन चंद्रयान-2 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते वैज्ञानिक मिथलेश साहू
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मिशन चंद्रयान-2 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते वैज्ञानिक मिथलेश साहूमिशन चंद्रयान-2 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते वैज्ञानिक मिथलेश साहू

  • मिशन के बाद बोले मिथलेश साहू: वैज्ञानिक बनते ही बहुत कुछ यहां सीखने को मिल रहा है 
  • भानपुरी गांव के रहने वाले हैं मिथलेश, 2007 में  कंप्यूटर साइंस में भिलाई से की थी इंजीनियरिंग 

दैनिक भास्कर

Sep 09, 2019, 11:37 AM IST

भिलाई/बालोद. मिशन चंद्रयान-2 अभी देश भर में चर्चा में है। पीएम मोदी इसरो के चेयरमैन सिवन का हौसला बढ़ा रहे हैं। पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। यह जानकर आपको भी गर्व होगा कि भिलाई के शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज से 2007 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले मिथलेश साहू भी इस मिशन का हिस्सा थे। 30 वर्षीय मिथलेश बालोद के गुरुर ब्लॉक के भानपुरी गांव के रहने वाले हैं। वे इसरो में वैज्ञानिक हैं। जो इस चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। जिले के इस वैज्ञानिक पर भी आज नाज किया जा रहा है। 

मिथलेश के पिता भानपुरी गांव की ही पाठशाला में प्रधानपाठक

मिथलेश 2017 से इसरो में काम कर रहा है। अपने पिता शिक्षक ललित कुमार साहू को प्रेरणास्रोत मानते हैं। जो गांव भानपुरी के ही प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक हैं। कंप्यूटर साइंस में इंजीनियर होने के कारण इसरो ने उन्हें कंप्यूटर डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी दी है। इस मिशन में भी वे कंप्यूटर वर्क के जरिए चंद्रयान का काम कर रहे हैं। 2016 नवंबर में शादी हुई, इसके बाद ही इसरो में इंटरव्यू के लिए कॉल आया। इसके बाद 2017 में इसरो ज्वाइन की। वहां कंप्यूटर डिपार्टमेंट देखते हैं। 

2007 में शंकराचार्य कॉलेज से की इंजीनियरिंग 
2007 में शंकराचार्य कॉलेज भिलाई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। फिर हैदराबाद के इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड कंपनी में 4 साल तक काम करता रहा। इस दौरान इसरो का सपना देखता रहा। 

ज्वाइनिंग के समय शुरू हुआ था प्रोजेक्ट पर काम 
वैज्ञानिक मिथलेश साहू ने भास्कर से फोन पर चर्चा करते हुए कहा कि जून 2017 में उनकी इसरो में ज्वाइनिंग हुई। तब से यह प्रोजेक्ट शुरू हो चुका था। मुझे भी इस प्रोजेक्ट में लगा दिया गया। मेरे लिए यह एक चुनौती थी। 

करहीभदर में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र चलाने वाले मिथलेश के बड़े भाई लीलाधर ने बताया कि शुरू से छोटे भाई में आगे बढ़ने की ललक थी। पहली से 12वीं तक उसने रमतरा, भानपुरी और कन्नेवाड़ा के सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई की। 

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