छत्तीसगढ़  / अब टोकन से 25 फीसदी ज्यादा धान नहीं बेच पाएंगे किसान, शासन ने आदेश जारी किए

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  • तीन जिलों के 182 समितियों में 4 लाख 54 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी 
  • 110 मिलों में से 60 का वेरीफिकेशन हुआ, किसानों की ऋण पुस्तिका की होगी जांच

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 12:58 PM IST

दुर्ग. धान खरीदी के बीच सरकार ने मंगलवार को एक नया आदेश जारी कर दिया है। इससे किसानों की मुसीबत थोड़ी बढ़ सकती है। सरकार ने किसानों से 25 फीसदी ज्यादा धान खरीदी की व्यवस्था समाप्त कर दी। इस आदेश के हिसाब से ही अब बुधवार से किसानों की धान खरीदी की जाएगी। आज तक तीन जिलों के 182 समितियों में 4 लाख 54 हजार 893 क्विंटल की धान खरीदी की जा चुकी है। प्रदेश सरकार ने एक दिसंबर से धान खरीदी शुरू की है। 

नए आदेश से आज से ही शुरू हो गई है धान खरीदी

  1. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के खरीदी केंद्रों में यह आदेश बुधवार से लागू किया जाना है। पिछले साल तक कई सालों से धान खरीदी 25 फीसदी ज्यादा लिमिट सिस्टम से की जा रही थी। इसी टोकन में वे शेष 25 प्रतिशत धान की मिंजाई होने के बाद बेच रहे थे। इसको देखते हुए इस बार खाद्य विभाग के अफसरों ने मिलों का मौके पर जाकर सत्यापन शुरू किया है। जिले के 110 मिलों में से 60 मिलों का वेरीफिकेशन कर लिया गया है।

    धान खरीदी की स्थिति जिलेवार 

    जिला किसान संख्या खरीदी क्विं. में 
    दुर्ग 2738 120819.20
    बालोद 5289 198085 
    बेमेतरा 2660 2743.64 

  2. जिले के 3 लाख 30 हजार किसानों के लिए नई समस्या आ गई 

    जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत तीन जिले के 330247 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन करवाया है। इनमें से 80 % किसान इस नए आदेश से प्रभावित हो सकते हैं। सूत्र बताते है कि दुर्ग, बालोद, बेमेतरा के इन किसान कई साल से टोकन लिमिट से 25 % दा की व्यवस्था में ही धान बेचते आ रहे हैं। टोकन लेने के बाद अचानक इस नए आदेश से नई समस्या आ गई। किसानों का कहना है कि सभी किसान अपने पूरे धान की मिंजाई नहीं कर सके हैं इसलिए जितनी हुई है उसी हिसाब से टोकन कटवाएं हैं। 

  3. खरीदी केंद्रों से बिना वेरीफिकेशन नहीं होगा धान का परिवहन 

    प्रशासन खरीदी केंद्रों से धान का परिवहन तभी करवाएगी जब मिलों का वेरीफिकेशन होगा। पिछली बार धान परिवहन के लिए एसोसिएशन के माध्यम से पंजीयन किया गया था। इसलिए मिलों का सत्यापन नहीं किया गया। नतीजा कि बंद मिलें और बिना बिजली कनेक्शन वाले मिलरों को भी धान की मिलिंग करने के लिए दे दिया गया था। इसकी वजह से पिछले साल का चावल ऐसे मिलर्स ने नवंबर तक जमा नहीं कर पाए। इसलिए कि धान की मिलिंग उन्होंने अपने मिल की बजाय दूसरे मिलों से करवाई और समय लगा दिए। 

  4. इस तरह सरकार ने कर दी लिमिट व्यवस्था खत्म 

    सालों से यह व्यवस्था थी कि एक किसान के पास दो एकड़ खेत है तो वह 29 क्विंटल 60 किलो धान बेच सकता है। यानी 74 बोरा धान बेचेगा। किसान इसी हिसाब से पंजीयन के दौरान अपना रकबा सॉफ्टवेयर में दर्ज करवाया। जब टोकन वितरण हुआ तो उसकी फसल की मिंजाई चल रही इसलिए उसने टोकन 50 बोरा धान बेचने का लिया। बाकी धान अपने खाने के लिए रखा। इस टोकन लेने के बाद किसान को 62 बोरा धान बेच सकता था। 

  5. सॉफ्टवेयर में पुराने सिस्टम को शाम से कर दिया बंद 

    सरकार ने किसानों से धान बेचने का पंजीयन के दौरान सॉफ्टवेयर में उनका रकबा दर्ज किया है। यानी एक किसान का रकबा 3 एकड़ है और उसने धान तय लिमिट के हिसाब से कम बेचा। उसके बाद भी किसानों का धान ज्यादा नहीं खरीदना है। नया आदेश के बाद सॉफ्टवेयर में पुराने सिस्टम को शाम से बंद कर दिया । 

  6. 25 फीसदी ज्यादा खरीदी लिमिट हो गई समाप्त 

    सरकार के नए आदेश के हिसाब से टोकन की 25 फीसदी ज्यादा खरीदी लिमिट समाप्त हो गई है। अब इसी हिसाब से किसानों की धान खरीदी जा सकेगी।
    एस के निवसरकर, सीईओ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक 

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