131 किमी पाइप बिछाई, निगम ने 159 किमी का किया भुगतान

Bhilaidurg News - शहर के हरेक घर तक पानी पहुंचाने वाली अमृत मिशन योजना में बड़ी धांधली सामने आई है। 242 करोड़ रुपए की इस योजना में यह पहली...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 06:50 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news 131 km pipe laid out corporation paid 159 km
शहर के हरेक घर तक पानी पहुंचाने वाली अमृत मिशन योजना में बड़ी धांधली सामने आई है। 242 करोड़ रुपए की इस योजना में यह पहली धांधली होगी। पाइप लाइन बिछाने वाली एजेंसी ने 131 किलोमीटर में डिस्ट्रीब्यूशन पाइप बिछाकर 159 किलोमीटर पाइप का भुगतान ले लिया है। करीब 60 से 70 करोड़ रुपए का भुगतान एजेंसी को निगम ने किया है। यही नहीं, पाइप की हाइट से लेकर अन्य 8 बड़े कामों में धांधली की बात सामने आई है।

शहर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में हुई धांधली को निगम आयुक्त एसके सुंदरानी ने पकड़ा है। इस पूरे मामले की जांच के लिए आयुक्त सुंदरानी ने 9 इंजीनियरों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी को सुप्रींटेंडेंट इंजीनियर आरके साहू लीड करेंगे। उनके साथ एक ईई और 3 असिस्टेंट इंजीनियर और 4 सब इंजीनियर है। इस कमेटी में शामिल सभी इंजीनियरों को आदेश जारी कर कहा है कि 159 किमी की पाइप लाइन बिछाई गई है या नहीं? यह ग्राउंड में जाकर देखें और बिना देरी किए रिपोर्ट सबमिट करें।

खुल रही गड़बड़ी की परतें
पाइप लाइन के गुणा-भाग पर एक नजर...

10.95 करोड़ रुपए से 30 किमी की राइजिंग पाइप लाइन बिछाई जा रही है।

40.55 करोड़ रु. डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन पर खर्च किया जा रहा है।

353 किमी डिस्ट्रीब्यूशन पाइप बिछाना था। 18 महीने में इसे पूरा करना था।

242 करोड़ रुपए के कार्यों के लिए निगम ने 2016 को टेंडर किया था।

2016 जुलाई में निगम ने इन कार्यों का टेंडर किया।


1. एडवांस और भुगतान लेता रहा: कंपनी ने काम शुरू करने से पहले एडवांस लिया। जबकि एडवांस की रकम के लायक काम ही नहीं हुआ और अपने का काम बिल भुगतान करने पेश कर दिया। आयुक्त ने आदेश में जिक्र किया है कि मोबीलाइजेशन एडवांस रुपए 5 करोड़ 19 लाख 75 हजार 395 रुपए की वसूली 29 मई 2018 तक नियम शर्त के अनुसार होना था। लेकिन 2 करोड़ 95 लाख 11 हजार 169 रुपए की वसूली शेष है। इसे समायोजन करना था। यानि निगम के अफसर एडवांस देने के बावजूद भुगतान करते रहे।

2. कम काम पर ज्यादा भुगतान: पाइप लाइन बिछाने का ठेका निगम ने इंडियन ह्यूम पाइप महाराष्ट्र को दिया है। इस एजेंसी ने महज 131 किमी की पाइप बिछाई है। जब भुगतान की बारी आई तो बिल में 159 किमी दिखाई दिया। यहीं से गड़बड़ी पकड़ी गई।

3. थर्ड पार्टी जांच में सबकुछ अलग-अलग: निगम ने इस पूरे काम की मॉनीटरिंग के लिए थर्ड पार्टी भी रखी है। जब काम की जांच कराई तो हर दूसरे काम में भिन्नता पाई। ठेकेदार और इंजीनियर कुछ कह रहे और उसकी जमीनी हकीकत कुछ और है।


तस्वीर रिसाली की है। जहां अभी तक पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। पर भुगतान हो गया है।

4. पाइप लाइन की डेप्थ: 100 एमएम मोबीलाइजेशन पाइप 131.91 किमी दिया गया है। जबकि 159.37 किमी बिलिंग की गई है। 300 एमएम और 600 एमएम मोबीलाइजेशन पाइप तक में अधिक बिलिंग दर्शाया गया है। इससे आयुक्त काे और संदेह हुआ।

5. सामानों की जांच: इस काम के लिए थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और टैक्स इनवाइस की सारतालिका में एसजीएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन में किया गया है। इसका भी परीक्षण करने कहा है।

6. पाइप का उल्लेख नहीं: आयुक्त ने लिखा है नस्ती क्रमांक-35 के संलग्न रिपोर्ट मुताबिक 374 एम 350 मो. की पाइप का उल्लेख नहीं। इसी प्रकार 149 एम. 600 एमएम मो. की पाइप का भी उल्लेख नहीं किया गया है।

7. खुदाई के बाद फीलअप नहीं: शहर में डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन बिछाई गई है मगर इसके लिए जिन इलाकों की सड़कों को खोदा गया। अब तक उसे फिलअप नहीं किया गया है। इसकी भी जांच होगी। शहर में अमृत मिशन का यह प्रोजेक्ट सालभर डिले है। अगर सही तौर तरीके से काम होता या कराया जाता तो इस गर्मी में लोगों को टैंकर के भरोसे नहीं रहना पड़ता। उन्हें पर्याप्त पानी मिलता।

8. अधिकांश वार्डों में पाइप नहीं: शहर के कई वार्डों में एक इंच तक पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। इसके लिए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के मैनेजमेंट की भी जांच होगी। आखिर वार्डों में प्रॉपर पानी सप्लाई क्यों नहीं। लेकिन प्रोजेक्ट में ही देरी हो गई। इसका खामियाजा शहर के लोगों को अब भी भुगतना पड़ रहा है।


वर्ष 2018 तक हुए काम में ज्यादा धांधली, निपट सकते हैं कई अफसर

अमृत मिशन के कार्यों में जो गड़बड़ी आई है वो 2018 तक के कार्यकाल के दौरान की है। एक अफसर की माने तो पूर्व में एकाउंट से लेकर तत्कालीन साइड इंजीनियर और नोडल अफसरों के खिलाफ भी जांच होगी। बिल प्रस्तुत करने से लेकर भुगतान करने वाले अफसरों से पूछा जाएगा कि इसकी क्रॉस चेकिंग क्यों नहीं की गई? इतनी दिलेरी से एजेंसी को भुगतान क्यों किया गया?

जांच कमेटी में इन्हें किया शामिल: आयुक्त सुंदरानी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक जांच कमेटी में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर आरके साहू, ईई प्रशांत शुक्ला, एई वेशराम सिन्हा, एई केके गुप्ता, एई प्रमोद साहू, सब इंजीनियर अर्पित बंजारे, सब इंजीनियर श्वेता महिश्वर, सब इंजीनियर निकहत शबरीन, सब इंजीनियर जयंत शर्मा है। कमेटी के सभी मेंबर ग्राउंड पर जाकर इसकी जांच करेंगे।

जांच के बाद होगी सख्ती से कार्रवाई..


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