मैत्रीबाग में 10 शावकों को जन्म देने वाली 15 साल की व्हाइट टाइगर गंगा ने तोड़ा दम
10 दिन से छोड़ दिया था भोजन, ड्रीप के भरोसे थी गंगा
चिंता की बात: सिमट रहा शेरों का कुनबा : मैत्रीबाग में शेरों का कुनबा सिमटता जा रहा है। एक समय ऐसा भी था जब मैत्रीबाग में 5 रायल बंगाल टाइगर थे। इनमें से तीन साल पूर्व दो टाइगर की मौत हो चुकी है। सतपुड़ा की मौत सितंबर में हुई। मैत्री बाग में 7 सफेद बाघ रह गए। 5 नर और 2 मादा टाइगर शामिल है।
7 माह पहले रॉयल बंगाल टाइगर की हुई थी मौत
वन अधिकारियों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार : गंगा की मौत के बाद घटना की जानकारी जू अथारिटी ऑफ इंडिया व दुर्ग वन विभाग के अफसरों को दी गई। उनके पहुंचने पर पीएम की कार्रवाई की गई। इसके बाद दोपहर करीब 12 बचे जू परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार किया गया। करीब 2 बजे तक अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरा हुआ।
सिर्फ दो चिकित्सकों के भरोसे 373 वन्य प्राणी
मैत्रीबाग में इस समय 373 से अधिक शाकाहारी और मांसाहारी वन्य प्राणी हैं। जिनकी देखरेख के लिए केवल दो चिकित्सक है। एक कंपाउंडर व एक सहायक भी यहां पर नियुक्त है जो नाकाफी है। मैत्रीबाग के 343 से अधिक वन्य प्राणियों में 8 वाइट टाइगर, 2 रायल बंगाल टाइगर, 2 एशियाटिक लॉयन, 1 लेफर्ड, 2 भालू, 6 पाइथन है।
अब तक 6 बाघों की हो चुकी मौत : मैत्री बाग में बीते पांच वर्षों में 6 बाघों की मौत हो चुकी है। बीते तीन साल में बाघ के मौत की यह दूसरी घटना है। पांच वर्षों में जिन बाघों की मौत हुई उनमें रायल बंगाल टाइगर, सफेद बाघिन कमला, सफेद बाघ सुंदर, सफेद बाघ सतपुड़ा, रायल बंगाल टाइगर सतपुड़ा और अब गंगा की मौत।
मैत्रीबाग में 2005 में तापसी ने दिया था गंगा को जन्म : व्हाइट टाइगर तापसी को नंदनकानन जू से मैत्रीबाग लाया गया। इसके बाद 2005 में उसने गंगा को जन्म दिया। गंगा ने अलग-अलग समय में 10 टाइगर को जन्म दिए। इनमें से 5 मैत्रीबाग में है। 12 सफेद बाघ देश के अन्य पांच जू में भेजे जा चुके हैं। इनमें 5 गंगा के वंशज हैं।
मैत्रीबाग में रक्षा के साथ-साथ गंगा ने आजाद को भी जन्म दिया था।
ये व्हाइट टाइगर गंगा की आखिरी तस्वीर है। जब रक्षा और आजाद को जन्म दिया था। दोनों के जन्म के कुछ महीने बाद बाड़े में रखा गया था। तब तीनों ने अपनी चहलकदमी ने सबको आकर्षित किया था।
नहीं सुनाई देगी दहाड़
अभी मैत्रीबाग में पांच व्हाइट टाइगर, सभी की मां हैं गंगा 10 शावकों में सबसे छोटे और नटखट हैं रक्षा और आजाद
मैत्रीबाग में दो साल पहले ही गंगा ने रक्षा को जन्म दिया था।
सिटी रिपोर्टर | भिलाई.मैत्रीबाग प्रबंधन को सात महीने के भीतर दूसरा झटका लगा है। होली के दिन व्हाइट टाइगर गंगा की मौत हो गई। तबियत बिगड़ने के बाद वह बीते 10 दिनों से ड्रिप के भरोसे जिंदा थी। इसके पूर्व सितंबर में रॉयल बंगाल टाइगर सतपुड़ा की मौत हो गई थी। गंगा की मौत के बाद अब मैत्रीबाग में व्हाइट टाइगर प्रजाति के 5 शेर रह गए हैं। इनमें रक्षा, राम, श्याम, सोनल व सुलतान शामिल हैं। सभी गंगा के ही बच्चे हैं। गंगा की देखरेख कर रहे जू डॉक्टर एनके जैन ने बताया कि उम्रदराज होने की वजह से वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। अंजोरा वेटरनरी कॉलेज में वाइल्ड लाइफ से जुड़े चिकित्सकों के साथ-साथ शासकीय चिकित्सक भी उसका इलाज कर रहे थे।