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रेलपांत की क्वालिटी पर रेलवे व सेल में विवाद, निपटारा करने बनाई गई कमेटी

एक वर्ष पहले
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बीएसपी उत्पादित 25 टन एक्सल लोड रेलपांत की क्वालिटी को लेकर रेलवे द्वारा संदेह जताए जाने के बाद दोनों पक्षों में विवाद हो गया है। जिसके निपटारे के लिए केंद्र ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो रेलवे द्वारा जताए गए संदेह की जांच करेगा।

कमेटी वर्तमान वित्तीय तिमाही में अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगा। रेलवे अपने वैगनों में सामान ढोने की क्षमता बढ़ाना चाह रहा है। इसके लिए उसने सेल से 25 टन एक्सल लोड वाले रेलपांत की सप्लाई की मांग की। बीएसपी ने डिमांड के मुताबिक उत्पादन करने के बाद उस मानक वाले रेलपांत की सप्लाई भी शुरू कर दी है। अब उस रेलपांत की क्वालिटी को लेकर रेलवे ने संदेह जताया है। उसके संदेह इलिनोइस विश्वविद्यालय से परिवहन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीटीटी) टीम द्वारा एक हालिया अध्ययन रिपोर्ट पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर रेलवे ने रेल की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा ट्रैक की तन्य शक्ति 25 टन एक्सल आपरेशन के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसलिए गुणवत्ता पर यह सवाल उठाया जा रहा है।

ये भी: बीएसपी के 25 टन एक्सल लोड रेलपांत पर उठे सवाल
बीएसपी में रेलपांत का उत्पादन।

सेल का दावा, गुणवत्ता युक्त है हमारी रेलपांत
रेलवे द्वारा 25 टन एक्सल लोड रेलपांत की क्वालिटी पर संदेह जताने पर सेल प्रबंधन की ओर से प्रतिक्रिया नहीं दी गई, लेकिन यह दावा जरूर किया कि उसका उत्पाद गुणवत्तापूर्ण है। साथ ही भिलाई से दल्ली तक 90 किमी बिछाई गई ट्रैक का भी हवाला दिया गया। जिस पर 25 टन के एक्सल लोड के साथ वैगन चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रबंधन ने वंदे भारत एक्सप्रेस का भी हवाला दिया जो 150 किमी प्रति घंटे की अधिक गति में संचालित की जा रही है।

रेलवे को चिंता, मिशन 25 टन की, नई लाइनें बिछनी है
25 टन एक्सल लोड रेलपांत की क्वालिटी को लेकर कथित कमी के साथ, कथित रूप से रेलवे के लिए अपने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाने के लिए चिंता पैदा कर रहा था। जिसमें मिशन-25 टन के साथ ट्रैक नवीनीकरण और नई लाइनें शामिल था।

राइट्स की निगरानी में होता है यहां प्रॉडक्शन
सेल में रेलपांतों का उत्पादन राइट्स की कड़ी निगरानी में होता है। बीएसपी में उत्पादित प्रत्येक पटरी को विभिन्न मानक परीक्षण से राइट्स के अधिकारियों की उपस्थिति में गुजरना होता है। सेल ने दावा किया कि रेलपांत रेलवे के अनुसंधान मानक संगठन रेल डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा जारी रेल मैन्युअल के सारे गुणवत्ता मानकों को पूरा करती है। वंदेमातरम 150 किमी रफ्तार से दौड़ रही।

उत्पाद के लिए इस बार भी बीएसपी पर रहेगा दारोमदार
स्टील मार्केट मंदी की चपेट में है। उसमें हाट रोल्ड क्वायल के दाम में बीते सालभर में 9 हजार रुपए प्रति टन की गिरावट आ चुकी है। इस गिरावट के आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। ऐसे में बीएसपी का एक्सक्लूसिव उत्पाद रेलपांत ही कंपनी को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकता है। बीते कुछ दिनों में यूनिवर्सल रेल मिल ने उत्पादन में जरूर गति पकड़ी है लेकिन वह इतना भी काफी नहीं है।

उत्पादन क्षमताओं पर भी उठाए जा रहे हैं सवाल
रेलवे ने सेल को चालू वित्त वर्ष में 1.3 एमटी रेलपांत सप्लाई करने की मांग की है। यह डिमांड पिछली वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में सेल ने रेलवे को 9 लाख 85 हजार टन रेलपांत की सप्लाई की थी। जिससे कंपनी ने 5900 करोड़ का कारोबार किया था। इसके बाद भी रेलवे की डिमांड 8 प्रतिशत पीछे रह गया था। 37% अधिक डिमांड को बीएसपी के लिए पूरा करना चुनौती से कम नहीं है।

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