प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हुई खरीदी, भर्ती निर्माण की जांच के लिए बनेगी बड़ी एजेंसी

Durg Bhilai News - उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के विश्वविद्यालयों में बीते 5 से 15 वर्षों में हुई भर्तियों, खरीदी और निर्माण की जांच की...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 02:11 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news a large agency will be set up to investigate the purchase of recruitment in the universities of the state
उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के विश्वविद्यालयों में बीते 5 से 15 वर्षों में हुई भर्तियों, खरीदी और निर्माण की जांच की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय जांच एजेंसी बनाई जा रही है। इसकी घोषणा विभागीय मंत्री अनुदान मांगों की चर्चा के दौरान कर सकते हैं।

प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा संचालित 7 विश्वविद्यालय हैं। इनमें से अधिकांश बीते 15 सालों में बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही स्थापित किए गए। इन विवि के कामकाज में तेजी लाने तत्कालीन कुलपति और कुलसचिवों ने न केवल अनाप-शनाप खरीदी की बल्कि स्टॉफ की भर्ती के साथ बिना जरूरत के निर्माण भी कराए गए। यह सिलसिला अब तक जारी है। इस पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल चुनावों से पहले ही नाराजगी जताते हुए कुलपतियों से जवाब-तलब कर चुकी हैं। इन्हीं प्रकरणों के प्रकाश में उच्च शिक्षा विभाग का काम काज सम्हालने के बाद मंत्री उमेश पटेल ने भी गंभीरता से लिया है। दरअसल कुलाधिपति कार्यालय के जरिए विभाग को कुलपतियों और कुलसचिवों की कार्यप्रणाली की लिखित शिकायतें मिलती रही हैं। इनके अध्ययन के बाद मंत्री पटेल सभी विवि की एक साथ किसी बड़ी एजेंसी से एक टाइम लिमिट में जांच कराने पर विचार कर रहे हैं। इसकी घोषणा जल्द ही विस में करेंगे। इस जांच के बाद इन सभी विश्वविद्यालयों में बड़े फेरबदल किए जाएंगे।

ऐसी भी शिकायतें मिली हैं

एक विवि के कुलपति के बारे में शिकायत है कि वह निर्माण कार्यों पर ठेकेदारों से 10 फीसदी कमीशन मांगते हैं। वहीं एक विवि के कुलपति ने अपने यहां बिलासपुर से लगे एमपी के एक शहर के लोगों की नियुक्तियां की। एक अन्य कुलपति ने परीक्षा जैसे गोपनीय कार्यों से संबंधित सभी प्रकाशन अपने परिजनों के जरिए कराए और राशि का भुगतान ले लिया। ओपन विवि का 236 फर्जी पीएचडी का घोटाला भी एक ही कुलपति के कार्यकाल में अंजाम दिया गया ।

होगा बड़ा बदलाव

पूर्ववर्ती सरकार ने न केवल कुलपति-कुलसचिव बल्कि कार्यपरिषद में भी उसी विचारधारा के लोगों की नियुक्तियां की। इसके चलते इन विवि में उच्च शिक्षा के मापदंडों से परे एक विशेष विचारधारा को लेकर काम हो रहे थे। सरकार बदलने के बाद भी हाल के दिनों में ही सरगुजा और बस्तर विवि में आरएसएस के नेताओं के कार्यक्रम कराए गए। वैसे सरकार ने विवि में बदलाव शुरु कर दिया है। इसी महीने से कार्य परिषदों का नए सिरे से गठन कर दिया जाएगा। नए विधायकों की नियुक्तियां की जाएंगी।

रविवि के गिरीश कांत पांडेय नए कुलसचिव

गिरीश कांत पाण्डेय अब पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के नए कुलसचिव होंगे। वर्तमान कुलसचिव संदीप वानसूत्रे को राजनांदगांव के दिग्विजय कॉलेज में पदस्थ किया गया है। पाण्डेय वर्तमान में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रायपुर में प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष सैन्य विज्ञान विभाग हैं। पांडे कांग्रेस के वरिष्ठतम विधायक के करीबियों में गिने जाते है। साइंस कॉलेज के सहायक प्राध्यापक संदीप वानसूत्रे ने पिछले साल अक्टूबर 2017 में रविवि का कार्यभार संभाला था। वे धर्मेश कुमार साहू, आईएएस की जगह कुलसचिव बनाए गए थे। इससे पहले वानसूत्रे ठाकरे विवि में भी कुलसचिव रह चुके हैं।

दुर्ग विवि में भी प्रशासन का विरोध शुरू

दुर्ग के हेमचंद यादव स्मृति विवि में बीते 15 दिनों से रोजाना छात्र आंदोलन पर है। वे नतीजों को लेकर विरोध दर्ज कर रहे हैं। छात्र परीक्षा का काम निजी एजेंसी से कराने का विरोध कर रहे है। इसके चलते बीसीए के नतीजों में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। छात्रों की समस्या का हल विवि भी नहीं निकाल पा रहा है। विवि के हालात पर उच्च शिक्षा विभाग की पैनी नजर है। जल्द ही यहां भी बदलाव के संकेत हैं।

प्रदेश के विवि : बस्तर विवि जगदलपुर,हेमचंद यादव विवि दुर्ग, तकनीकी विवि भिलाई,रविशंकर विवि रायपुर, ठाकरे विवि रायपुर,बिलासपुर विवि,शर्मा ओपन विवि बिलासपुर, सरगुजा विवि अंबिकापुर। इनमें से बस्तर, दुर्ग, तकनीकी , बिलासपुर और ओपन विवि तथा सरगुजा विवि बीते 15 वर्षों में स्थापित किए गए हैं।

ऐसी भी शिकायतें मिली हैं

एक विवि के कुलपति के बारे में शिकायत है कि वह निर्माण कार्यों पर ठेकेदारों से 10 फीसदी कमीशन मांगते हैं। वहीं एक विवि के कुलपति ने अपने यहां बिलासपुर से लगे एमपी के एक शहर के लोगों की नियुक्तियां की। एक अन्य कुलपति ने परीक्षा जैसे गोपनीय कार्यों से संबंधित सभी प्रकाशन अपने परिजनों के जरिए कराए और राशि का भुगतान ले लिया। ओपन विवि का 236 फर्जी पीएचडी का घोटाला भी एक ही कुलपति के कार्यकाल में अंजाम दिया गया ।

होगा बड़ा बदलाव

पूर्ववर्ती सरकार ने न केवल कुलपति-कुलसचिव बल्कि कार्यपरिषद में भी उसी विचारधारा के लोगों की नियुक्तियां की। इसके चलते इन विवि में उच्च शिक्षा के मापदंडों से परे एक विशेष विचारधारा को लेकर काम हो रहे थे। सरकार बदलने के बाद भी हाल के दिनों में ही सरगुजा और बस्तर विवि में आरएसएस के नेताओं के कार्यक्रम कराए गए। वैसे सरकार ने विवि में बदलाव शुरु कर दिया है। इसी महीने से कार्य परिषदों का नए सिरे से गठन कर दिया जाएगा। नए विधायकों की नियुक्तियां की जाएंगी।

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