सुबह होते ही राह चलते लोगों पर फेंकने लगते थे गुब्बारे **
सान्या मल्होत्रा
\\\"बचपन में होली के दिन सुबह जल्दी उठ जाती थी। होली का हुड़दंग मचाने का जुनून तो मुझ पर सवार रहता ही था। सुबह उठते ही गुब्बारे तैयार करती और लगभग साढ़े सात बजते ही अपनो सारे दोस्तों को फोन करके घर पर बुला लेती थी, फिर शुरू होता था हमारा धमाल। घर की बालकनी में खड़े होकर हम वहां से गुजरते लोगों के ऊपर रंग से भरे हुए गुब्बारे फेंकते थे और ये भी नहीं सोचते थे कि इससे किसी को चोट भी लग सकती है। अब मुझे इसका अहसास हाेता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। रीडर्स से भी कहूंगी कि ऐसा आप मत करिएगा। थोड़ा सुरक्षित तरीके से होली खेलिएगा। हां मेरा यह भी मानना है कि अब होली बड़ी बोरिंग सी हो चुकी है। इस त्योहार पर भांग वगैरह तो नहीं पीती हूं, पर आनंद पूरा लेती हूं।\\\'