तुमने विवाह की वेदी में ही सारे सपनों को स्वाहा किया, ऐसी सोच को बदलें
तुमने विवाह की वेदी में अपने सारे सपनों को स्वाहा कर दिया। सप्तपदी के सात फेरों के साथ आगे बढ़ने का हर कदम अवरुद्ध कर दिया। तुमने विदाई के चावलों के साथ अब तक सिखी हर एक विद्या मां के आंचल में वापस उछाल दी। तुमने गंगा नहा ली और अब तुम सिर्फ मुखोटे रहती हो। घर वाले अलग, बाहर वाले अलग, ननदो के घर के अलग और मायके के बिल्कुल अलग। रात का मंजर जो भी रहा हो रोज सुबह फिर नया मुखौटा रंग लेती हो। स्त्रियों ऐसी मानसिकता से बाहर निकलो”
स्वयं को पहचानो, निखारो और संवारो, ज्ञानार्जन करो, और सब के समकक्ष और बल्कि उनसे ऊंचे पदों पर साथ में खड़ी होकर दिखाओ। यह संवाद नाटक मुखौटा के थे। जो स्वयंसिद्धा टीम के द्वारा राजनांदगांव पुलिस मुख्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया। डॉ.सोनाली चक्रवर्ती द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक में महिलाओं ने घरेलू हिंसा के अलग अलग अलग प्रकार दिखाएं। नाटक में महिलाओं को समाज में बराबरी के साथ खड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का हुआ सम्मान
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पद्म विभूषण डॉ. तीजनबाई शामिल हुई। उन्होंने महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए उदाहरण देकर प्रेरित किया। मंच पर डॉ. तीजनबाई और उनकी पूरी टीम का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन एएसपी सुरेशा चौबे ने किया। कार्यक्रम में राजनांदगांव जिला पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के साथ भारी संख्या में महिलाएं मौजूद थी।
विवाहित महिलाओं ने किया नाटक
इस प्रभावशाली नाटक की खास बात यह थी कि इसमें अभिनय करने वाली महिलाएं स्वयं विवाहित स्त्रियां है जिन्होंने स्वयंसिद्धा में थिएटर ट्रेनिंग लेकर नाटक का मंचन किया। देबजानी मजूमदार, सुशीला साहू, सुदीप्ता चक्रवर्ती, एल.अनु, बिपाशा हालदार, सोमाली शर्मा, रुमा बर्धन, सोमा बोस, अर्चना सेनगुप्ता, रीना साहा एवं युवा कलाकार कथा सान्याल व सागर गोरघाटे ने अभिनय किया।
हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने किया आह्वान
इस नाटक के माध्यम से महिलाओं को हर तरह की हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। बताया गया कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती बल्कि मानसिक, आर्थिक,भावनात्मक और बौद्धिक भी होती है। महिलाएं साल दर साल समाज की दुहाई देती हुई तन और मन के घावों पर पर्दा डाले रखती है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति भी आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया
स्वंयसिद्धा ग्रुप के सदस्यों ने महिलाओं को हिंसा के खिलाफ और अपने अधिकारों के लिए लड़ने प्रेरित किया।