गांधी, नेहरू व आंबेडकर ने जो संविधान बनाया वह आज खतरे में: कनक तिवारी
महात्मा गांधी सादगी में भी सौन्दर्य देखते थे। वे सत्य को ही ईश्वर मानते थे। उन्होंने दो राष्ट्र के सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया। उनके जीवन की धुरी हिन्दू-मुस्लिम एकता थी। वे छुआछूत का उन्मूलन चाहते थे। महात्मा गांधी की योजना भारत-पाकिस्तान के बंटवारे को विफल बनाने की थी।
नागरिकता संशोधन कानून लाकर आज सरकार द्विराष्ट्रवाद के सिद्धान्त को स्वीकार कर रही है। वर्तमान नागरिकता की परिभाषा गांधी के सपनों के खिलाफ है। वे विश्व नागरिकता में विश्वास करते थे। उक्त विचार आलोचक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आशुतोष कुमार ने शासकीय दानवीर तुलाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय उतई में कही। समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रख्यात गांधीवादी चिंतक और विचारक कनक तिवारी ने कहा कि मेरा गांधी योद्धा है, बिजली का एक नंगा तार जिसने अंग्रेजी साम्राज्यवाद को करारा झटका दिया। गांधी, नेहरू और अम्बेडकर ने मिलकर भारत का संविधान बनाया। वह संविधान आज खतरे में है।
मनुष्य तकनीक का गुलाम हो चुका है: डॉ. कोमल
प्राचार्य डॉ. कोमल सिंह सार्वा ने कहा कि आज यंत्रों ने मनुष्य को विस्थापित कर दिया है। मनुष्य तकनीक का गुलाम हो चुका है। आज इसी कारण देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और तकनीक पूंजीपतियों के पूंजी संचय का माध्यम बन गया है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि युवा आलोचक डॉ. जयप्रकाश थे। अध्यक्षता कथाकार लोकबाबू ने की। इस सत्र में भुवाल सिंह ठाकुर, परमेश्वर वैष्णव एवं थानसिंह वर्मा ने अपने विचार व्यक्त किये। सत्र का संचालन प्रो. अभिषेक पटेल ने किया।
इस कार्यक्रम में 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया
हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित ‘वर्तमान संदर्भ में महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बीज व्याख्यान देते हुए प्रो. आशुतोष कुमार ने आज देश के संविधान के साथ मजबूती से सभी को खड़े होने की जरूरत है। कार्यक्रम में 150 प्रतिभागी शामिल हुए।
महात्मा गांधी ने नहीं की मूर्तिपूजा : कवि ललित
वरिष्ठ कवि ललित सुरजन ने कहा-महात्मा गांधी का व्यक्तित्व अत्यन्त विराट था। ईश्वर में उनकी आस्था थी पर वे कर्मकाण्डी नहीं थे। मूर्तिपूजा उन्होंने नहीं की। वे मन के सच्चे व्यक्ति थे। सुभाष हों या अम्बेडकर दोनों ने उनका सम्मान किया। स्त्रियों की मुक्ति के लिए उन्होंने अद्भुत काम किया।
शासकीय उतई कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल अतिथि।