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निगम 40 साल पुराना विश्व बैंक का 3 करोड़ का कर्ज भूल गया यह बढ़कर हो गया 88 करोड़, फिर अाई किश्त चुकाने की चिट्ठी

Bhilaidurg News - चालीस साल पहले रायपुर नगर निगम ने शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से 3 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन पैसों...

Jan 16, 2020, 07:05 AM IST
Hudco News - chhattisgarh news corporation forgot 40 year old world bank loan of 3 crores it has increased to 88 crores then the letter to pay the installment
चालीस साल पहले रायपुर नगर निगम ने शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से 3 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन पैसों से निगम ने काशीराम नगर में बीएसयूपी जैसे ही मकान बनवाए और झुग्गियों से परिवारों को यहां शिफ्ट कर दिया। इस कालोनी को सफाई, सड़कें और पानी सप्लाई जैसी बुनियादी जरूरतों के सिस्टम भी बनाए गए। 300 मकानों के प्रोजेक्ट में 3 करोड़ की लागत अाई। जिन लोगों को मकान दिए गए, निगम ने उनसे कुछ राशि भी ली, लेकिन बैंक की किश्त अदा नहीं की गई। यह कर्ज तक से लगातार बढ़ रहा है और 88 करोड़ रुपए हो गया है। विश्व बैंक की तरफ से हाल में एक बार फिर इस कर्ज को चुकाने के लिए चिट्ठी अाई है, लेकिन निगम अफसरों का मानना है कि इसके लिए अब बजट में प्रावधान करना होगा, तभी भुगतान संभव हो पाएगा।

इस राशि से ही विश्व बैंक का कर्ज अदा किया जाना था। लेकिन निगम ने उस वक्त इस राशि का उपयोग किसी अन्य विकास कार्य में कर लिया उसके बाद से अब तक काशीरामनगर के मकानों का कर्ज नगर निगम ने विश्व बैंक को नहीं दिया है। यही वजह है कि 3 करोड़ का लोन अब बढ़कर 88 करोड़ रुपए का हो गया है। विश्व बैंक के अधिकारी अब नगरनिगम से लगातार तकादा कर रहे हैं। लेकिन काशीराम नगर के मकानों की मद में निगम के पास किसी भी तरह की कोई राशि नहीं बची है। इस वजह से वर्ल्ड बैंक का ये लोन नगर निगम के लिए गले की फांस बन गया है।

चार दशक से हर नई शहर को विरासत में मिल रहा ये लोन

बीते चार दशक से शहर में काबिज होने वाली हर नई शहरी सरकार को विरासत में ये कर्ज मिल रहा है। साल दर साल कर्ज बढ़ता भी जा रहा है। दरअसल, अविभाज्य मध्यप्रदेश के दौर में 1980 के आसपास प्रदेश के करीब एक दर्जन नगरीय निकायों को विश्व बैंक से झुग्गी बस्तियों को संवारने के लिए तीन-तीन करोड़ रुपए कर्ज मिला था। विश्व बैंक के इस कर्ज के लिए उस वक्त हुडको गारंटर बना था। छत्तीसगढ़ जब नया राज्य बना तो सरकारी दस्तावेजों के आदन-प्रदान के बाद इस कर्ज से जुड़ी फाइलें और कागजात छत्तीसगढ़ को सौंप दिए गए थे।

कर्ज के दस्तावेज संभालने में

भी दिक्कत, अालमारी ही बची

चालीस साल पुराने इस कर्ज के दस्तावेजों को संभालना निगम के लेखा शाखा के कर्मचारियों के लिए अब मुश्किल बनता जा रहा है। ज्यादातर कागजात जीर्णशीर्ण हो गए हैं। फाइलों में ट्रांसपरेंट टेप लगाकर जैसे तैसे कागजों को संभाला जा रहा है। कर्ज पर ब्याज की दर करीब ग्यारह फीसदी सालाना बताई जाती है लेकिन ये भी अनुमानित ही है क्योंकि ब्याज की रकम बताने वाले दस्तावेज धुंधले पड़ गए हैं। निगम मुख्यालय में विश्व बैंक की झुग्गी योजना के नाम से एक लकड़ी की अलमारी भी है, जिसमें बाजार विभाग के दस्तावेज रखे जाते हैं।

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