शहर की सबसे बड़ी पेयजल योजना में देरी, फिल्टर प्लांट की टेस्टिंग नहीं, पाइप लाइन भी नहीं बिछा पए

Bhilai News - शहर की सबसे बड़ी पेयजल योजना में देरी हो रही है। 242 करोड़ रुपए की इस स्कीम में पहले गड़बड़ी सामने आई। अब पूरे प्रोजेक्ट...

Feb 15, 2020, 06:46 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news delay in city39s biggest drinking water scheme no testing of filter plant pipeline not even laid

शहर की सबसे बड़ी पेयजल योजना में देरी हो रही है। 242 करोड़ रुपए की इस स्कीम में पहले गड़बड़ी सामने आई। अब पूरे प्रोजेक्ट में ही देरी हो रही है। 26 फरवरी तक प्रोजेक्ट को पूरा कर हरेक घरों में पेयजल सप्लाई करने का दावा निगम ने किया था। लेकिन निर्माण एजेंसी और निगम प्रशासन की देरी ने प्रोजेक्ट काे अधूरा कर दिया है। अभी तक नेहरू नगर में बन रहे 66 एमएलडी फिल्टर प्लांट और 6 एमएलडी फिल्टर प्लांट की टेस्टिंग नहीं हुई है। नए इंटकवेल में बिजली कनेक्शन नहीं हुआ है। यही नहीं, कई वार्डों में पाइप लाइन तक नहीं बिछी है। जबकि पिछले दिनों मेयर व विधायक देवेंद्र यादव ने 66 एमएलडी फिल्टर प्लांट का विजिट कर अफसरों से साफ कहा था कि योजना में देरी नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि तत्कालीन आयुक्त एसके सुंदरानी ने निर्माण एजेंसी की एक गड़बड़ी तक पकड़ी थी। सुंदरानी का कहना था कि पाइप लाइन बिछाने वाली एजेंसी ने 131 किलोमीटर में डिस्ट्रीब्यूशन पाइप बिछाकर 159 किलोमीटर पाइप का भुगतान ले लिया है।

इस्टीमेट के हिसाब से वार्डों में पाइप लाइन बिछा रहे...


निगम के कारण देरी हुई...


242 करोड़ रुपए की इस स्कीम पर उठ चुके हैं कई सवाल, जांच कमेटी भी बनी थी

काम में देरी और एडवांस और भुगतान लेता रहा: कंपनी ने काम शुरू करने से पहले एडवांस लिया। जबकि एडवांस की रकम के लायक काम ही नहीं हुआ और अपने का काम बिल भुगतान करने पेश कर दिया। आयुक्त ने आदेश में जिक्र किया है कि मोबीलाइजेशन एडवांस रुपए 5 करोड़ 19 लाख 75 हजार 395 रुपए की वसूली 29 मई 2018 तक नियम शर्त के अनुसार होना था।

देरी से नुकसान: प्रोजेक्ट पूरा होता तो वार्डों में लाखों रु. खर्च कर पेयजल के लिए टैंकर नहीं भेजना पड़ता

2016 जुलाई में निगम ने इन कार्यों का टेंडर किया।**

खुदाई के बाद फीलअप नहीं: शहर में डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन बिछाई गई है मगर इसके लिए जिन इलाकों की सड़कों को खोदा गया। अब तक उसे फिलअप नहीं किया गया है। शहर में अमृत मिशन का यह प्रोजेक्ट सालभर डिले है। अगर सही तौर तरीके से काम होता या कराया जाता तो लोगों को टैंकर के भरोसे नहीं रहना पड़ता।

पानी टंकी निर्माण में भी देरी: शहर में 10 नई पानी टंकी का निर्माण होना था। 7 पानी टंकी ही बन पाई। दो और पानी टंकी के लिए स्वीकृति मिली। इसमें भी देरी हो रही है। पानी टंकी का निर्माण में देरी से प्रोजेक्ट और डिले होने जा रहा है।

अधिकांश वार्डों में पाइप नहीं: शहर के कई वार्डों में एक इंच तक पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। इसके लिए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के मैनेजमेंट की भी जांच होगी। आखिर वार्डों में प्रॉपर पानी सप्लाई क्यों नहीं। लेकिन प्रोजेक्ट में ही देरी हो गई। इसका खामियाजा शहर के लोगों को अब भी भुगतना पड़ रहा है। वार्डों में अब भी पाइप पड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि इंटरकनेक्शन भी होना है।

समय में पूरा होगा काम


कार्य से पहले ही भुगतान होने पर संदेह में कई...

अमृत मिशन के कार्यों में जो गड़बड़ी आई है वो 2018 तक के कार्यकाल के दौरान की है। एक अफसर की माने तो पूर्व में एकाउंट से लेकर तत्कालीन साइड इंजीनियर और नोडल अफसरों के खिलाफ भी जांच होगी। बिल प्रस्तुत करने से लेकर भुगतान करने वाले अफसरों से पूछा जाएगा कि क्रॉस चेकिंग क्यों नहीं की गई?

242 करोड़ रु. के कार्यों के लिए 2016 को टेंडर किया था।**

40.55 करोड़ रु. डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन पर खर्च किया जा रहा है।
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353 किमी डिस्ट्रीब्यूशन पाइप बिछाना था। 18 महीने में इसे पूरा करना था।**

10.95 करोड़ रुपए से 30 किमी की राइजिंग पाइप लाइन बिछाई जा रही है।**

पाइप लाइन के गुणा-भाग पर एक नजर...

शहर के अधिकांश वार्डों डिस्ट्रीब्यूशन लाइन तक नहीं बिछाई गई है।

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