दुर्ग में पहली लोक अदालत जहां एक भी प्रकरण की सुनवाई नहीं

Bhilaidurg News - न्यायाधीश बनाम न्यायिक कर्मचारी संघ के विवाद का सीधा असर नेशनल लोक अदालत में दिखाई दिया। 6 हजार से ज्यादा प्रकरणों...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 06:55 AM IST
Durg News - chhattisgarh news first lok adal in durga where no single case is heard
न्यायाधीश बनाम न्यायिक कर्मचारी संघ के विवाद का सीधा असर नेशनल लोक अदालत में दिखाई दिया। 6 हजार से ज्यादा प्रकरणों के निराकरण का टारगेट लेकर शनिवार सुबह 10.30 शुरू हुई लोक अदालत में न्यायिक कर्मचारियों और वकील के शामिल नहीं होने से प्रकरणों में सुनवाई नहीं हो सकी। पेंडिंग प्रकरणों के राजीनामा के लिए पहुंचे पक्षकार, बैंक और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों को शनिवार को खाली हाथ लौटना पड़ा। लोक अदालत की कार्रवाई शुरू होने के ढ़ाई से तीन घंटे बाद दुर्ग न्यायालय परिसर में सन्नाटा पसर गया।

शुक्रवार को न्यायालय लघु वेतन कर्मचारी संघ ने एक न्यायाधीश पर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया था कि भृत्य सदानंद यादव के बंगला ड्यूटी करने से इंकार करने उसे कोर्ट के बाहर खड़े होने की सजा दे दी थी। उस दौरान गया नगर निवासी भृत्य तबीयत बिगड़ गई और बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। घटना से आक्रोशित न्यायालय कर्मचारी कई घंटों तक हंगामा करते थे। इसके चलते उन्होंने नेशनल लोक अदालत की कार्रवाई में शामिल नहीं होने की घोषणा पहले की कर दी थी। इसके चलते फैमिली कोर्ट के 5 मामलों को छोड़कर दुर्ग न्यायालय में किसी भी मामले की सुनवाई नहीं हुई। वहीं, अधिवक्ताओं ने सोमवार से जज के कोर्ट का भी बहिष्कार करने का फैसला लिया है। इधर कोर्ट में विद्युत, बैंकिंग एवं अन्य के 4867 प्री-लिटिगेशन (पूर्व वाद) प्रकरण लोक अदालत में सुनवाई होने थे।

विरोध: दोपहर बाद पसरा सन्नाटा

लोक अदालत में वकील व न्यायिक कर्मी शामिल हुए पर काम नहीं किए।

कोर्ट का ताला खोलने भी नहीं पहुंचे भृत्य

शुक्रवार को न्यायालयीन कर्मचारियों के हंगामे के बाद डीजे गोविंद मिश्रा ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उससे भी कर्मचारियों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। शनिवार को अदालत के खुलने के समय सभी कर्मचारी न्यायालय परिसर में पहुंचे। लेकिन किसी भी कर्मचारी ने न्यायाधीशों की कोर्ट का ताला नहीं खोला। इसके चलते मजबूर होकर बाबुओं को काम करना पड़ा।

इन मामलों की होने वाली थी सुनवाई

नेशनल लोक अदालत में 2020 न्यायालयीन प्रकरण तथा 4867 प्री-लिटिगेशन प्रकरण चिह्नांकित किये गये थे। 1175 दांडिक प्रकरण, 50 विद्युत के प्रकरण, क्लेम के 165 प्रकरण, 89 पारिवारिक मामले, 470 चेक अनादरण मामले, 50 अन्य सिविल मामले एवं श्रम न्यायालय दुर्ग के 21 प्रकरण लोक अदालत के लिए चिह्नांकित किए गए हैं। लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

किसी भी प्रकरण पर नहीं हुआ फैसला

जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव के सचिव रवि शर्मा ने बताया, लोक अदालत में कुल 41 खण्डपीठ का गठन किया गया था। परिवार न्यायालय दुर्ग के लिए 2 खण्डपीठ, जिला न्यायालय के लिए 35, तहसील न्यायालय पाटन और भिलाई-3 के लिए एक-एक खण्डपीठ, श्रम के लिए 1 खण्डपीठ एवं किशोर बोर्ड के लिए 1 खण्डपीठ का गठन किया गया।

वकीलों ने लोगों से भी मांगा है समर्थन

चतुर्थ श्रेणी न्यायालय कर्मचारियों का शनिवार को भी अधिवक्ताओं ने समर्थन किया। सुबह 10.30 बजे लोक अदालत की कार्रवाई शुरू होने के बाद कोई भी अपने चैंबर से बाहर नहीं निकला। 12 बजे के बाद वकीलों कोर्ट परिसर में लगी खंडपीठों में जाकर पक्षकारों को शुक्रवार को हुए घटनाक्रम का हवाला देकर सुनवाई में शामिल नहीं होने को लेकर मनाने लगे।

नहीं हुआ है समाधान


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