पांच साल बाद तरीघाट में पुरातात्विक खोज करने फिर से होगी टीले की खुदाई
पाटन के खारुन नदी किनारे बसे गांव तरीघाट में फिर से खुदाई शुरू कर दी गई है। पांच साल बाद राजा जगतपाल के दूसरे टीले की खुदाई शुरू हो रही है। इस टीले में पुरातत्व विभाग को ऐतिहासिक प्रमाण मिले हैं। तरीघाट में पुरातात्विक खोज में वैज्ञानिक फिर से जुट गए हैं।
यहां के भारतीय सभ्यता की सैकड़ों साल पुरानी और दुर्लभ चीजें निकलेगी। वर्ष 2013 में सबसे पहले यहां टीले की खुदाई की गई थी जो वर्ष 2015 तक चली। तरीघाट में खुदाई के दौरान अन्य देशों के साथ व्यवसायिक संबंध होने के प्रमाण मिले हैं। उत्खनन डॉयरेक्टर दीप्ति गोस्वामी ने बताया कि जब तक दूसरे टीले की खुदाई हो रही है तो और भी ज्यादा इस जगह के बारे में जानने का मौका मिलेगा। यहां सैकड़ों साल पुराने सिक्के पुरातत्व विभाग को मिले हैं। तरीघाट कमें अफगानिस्तान, ग्रीक सहित अन्य विदेशों से व्यापारिक संबंध के संकेत हैं।
छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री ने किया इसका शुभारंभ
छत्तीसगढ़ राज्य के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने पूजा अर्चना कर उत्खनन कार्य का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री भगत ने पुरातत्व विभाग के संग्रहालय का अवलोकन व निरीक्षण भी किया। इस संग्रहालय में पूर्व में उत्खनन द्वारा प्राप्त ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का अवलोकन कर विशेषज्ञों से उसके संबंध में जानकारी ली। साथ ही उन्होंने इन सामग्रियों के रखरखाव संबंधी कार्यों व प्रक्रियाओं का निरीक्षण भी किया। संग्रहालय में भ्रमण के दौरान संस्कृति मंत्री ने कहा कि इस प्रकार के उत्खनन से क्षेत्र विशेष के ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है। इस कार्यक्रम के दौरान संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के साथ संस्कृति विभाग के सचिव सोनमणि वोरा समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत तरीघाट पहुंचे व मौके का मुआयना किया।