माइनिंग के लिए एचएससीएल समेत सात फर्म की दावेदारी, एफ ब्लॉक तक पहुंचने बनेगी नई सड़क

Durg Bhilai News - रावघाट में कॉमर्शियल प्रॉडक्शन के लिए अभी भी चार साल लगेंगे, लिहाजा प्रबंधन अंतरिम माइनिंग की तैयारी कर रहा है। एक...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 02:16 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news for seven mining companies including hscl for mining f block reach new road
रावघाट में कॉमर्शियल प्रॉडक्शन के लिए अभी भी चार साल लगेंगे, लिहाजा प्रबंधन अंतरिम माइनिंग की तैयारी कर रहा है। एक मिलियन टन प्लांट के लिए एचएससीएल ने भी दावेदारी की है। इसके एसीबी व 6 अन्य दावेदार भी कतार में है। आवेदनों की स्क्रूटनी बाद दावेदारों में एक नाम फाइनल किया जाएगा। जिसके बाद वर्ष के अंतिम दो-तीन महीनों में अंतरिम माइनिंग शुरू होने की उम्मीद है।

बीएसपी में एक्सपांशन प्रोजेक्ट लगभग पूरा होने जा रहा है। जिसके चलते प्लांट की उत्पादन क्षमता 4 एमटी से बढ़कर 7 एमटी होने जा रही है। एक्सपांशन प्रोजेक्ट के तहत निर्मित मिलों में जैसे-जैसे उत्पादन की रफ्तार पकड़ने रही है, आयरन ओर की डिमांड भी बढ़ने लगी है। प्लांट स्थापित होने के बाद से अब तक दल्ली-राजहरा से आयरन ओर की सप्लाई हो रही थी। लेकिन धीरे-धीरे उसका भी स्टाक खत्म होते जा रहा है। जिसका असर सप्लाई पर पड़ रहा है। अभी यहां पेड़ों की कटाई काम शुरू नहीं हो पाया है। सेल ने एफ ब्लाक के ए ब्लाक में 38 हजार पेड़ काटने की अनुमति के लिए क्षेत्र के वन विभाग ने केंद्रीय पर्यावरण विभाग के पास आवेदन लगा रखा है। उसका जवाब अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुआ है। इसकी वजह से इसमें समय लग रहा है। वैसे शासन और सेल जल्द जल्द काम पूरा करके खुदाई करने की तैयारी में है। इससे बीएसपी में आयरन ओर की संकट दूर होगी।

रावघाट माइंस के बारे में : वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

रावघाट माइंस तक जाने के लिए रेल लाइन बिछाने का काम भी चल रहा है। इससे यहां से आयरन ओर निकालकर बीएसपी तक भेजने में सहुलियत होगी। शासन की ओर से इसकी तैयारियां की जा रही है।

एमआरडी पर बढ़ रही है बीएसपी की निर्भरता

डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं हो पाने की स्थिति में प्रबंधन को अपने रॉ मटेरियल डिवीजन (आरएमडी) पर निर्भर रहना पड़ता है। ट्रांसपोर्टिंग लागत प्रबंधन को महंगा पड़ रहा है। रावघाट में कामर्शियल प्रॉडक्शन शुरू होने में अभी भी काफी समय लगना है। यहां बीएसपी को एफ ब्लाक अलॉट हुआ है, वहां पेड़ की कटाई शुरू नहीं हुई है। इससे काम में थोड़ी देरी होगी।

बी ब्लाॅक के पेड़ों की भी गिनती जल्द होगी शुरू

झारखंड की कंपनी ने भी किया है आवेदन

त्रहूर और अंजरेली में माइनिंग करने के लिए एक मिलियन टन क्षमता का मिनी प्लांट स्थापित करने की योजना है। रावघाट में माइनिंग का ठेका हासिल कर चुकी एसीबी ने दावेदारी की है। एचएससीएल ने आवेदन किया है। इसके अलावा अंबिकापुर की पटेल कंपनी, झारखंड की कंपनी ने भी अंतरिम माइनिंग की इच्छा जताई है। जिसका एल वन होगा उसे काम दिया जाएगा।

इसके अलावा एफ ब्लाक के बी ब्लाक में भी पेड़ों की गिनती जल्द शुरू होने जा रही है। वन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जिसके बाद कटाई के लिए पर्यावरण को अनुमति मांगी जाएगी। अब तक ए ब्लाक के पेड़ों की ही गिनती हो पाई है। इसमें 38 हजार पेड़ काटे जाएंगे। वन विभाग के अफसरों का दावा है कि पर्यावरण से अनुमति मिलने के बाद एक महीने के भीतर सभी पेड़ काट दिए जाएंगे।

आवेदनों की स्कूटनी में लगेंगे अभी दो महीने

अंतरिम माइनिंग के लिए मिले आवेदनों की टेक्निकल आधार पर स्क्रूटनी की जा रही है। फिर रिवर्स आक्शन किया जाएगा। एल-1 को माइनिंग का काम देंगे। दो माह में इसकी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। जिसे काम मिलेगा उसे प्लांट बनाने कम से कम 4 माह लगेंगे। वर्ष के आखिरी दो-तीन माह में रावघाट से आयरन ओर की सप्लाई शुरू हो जाएगी। इससे बीएसपी को राहत होगी।

06 लौह अयस्क के ब्लॉक हैं उत्तर बस्तर के कांकेर और नारायणपुर जिले में स्थित रावघाट की पहाड़ियों में

712.48 मिलियन टन लौह अयस्क होने का अनुमान है।

14 एमटी का प्लांट स्थापित किया जाना है, बीएसपी में यहां से आयरन ओर की सप्लाई के लिए

एफ ब्लॉक तक जाने बनेगा एक नया रोड

एफ ब्लॉक तक पहुंचने के लिए एक और एप्रोच रोड बनाने की तैयारी चल रही है। यह एप्रोच रोड नारायणपुर के खोड़गांव की ओर से होगा। इसकी दूरी करीब सात किमी होगी, लेकिन दंडकवन की ओर से बने एप्रोच रोड के मुकाबले समतल होने के कारण वाहनों के लिए आसानी होगी। इसे बनाने के लिए पेड़ों की गिनती जल्द शुरू होगी। फिर आगे का काम किया जाएगा।

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