चार नाटकों के चार रंग: हास्य, व्यंग्य, वेदना और कटाक्ष

Bhilaidurg News - हम रंगकर्मियों के लिए यह एक उत्सव है। दिसंबर में होने वाली बहु भाषीय नाट्य स्पर्धा का इंतजार रहता है। ठंड की सर्द...

Dec 11, 2019, 07:40 AM IST
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हम रंगकर्मियों के लिए यह एक उत्सव है। दिसंबर में होने वाली बहु भाषीय नाट्य स्पर्धा का इंतजार रहता है। ठंड की सर्द होती रात में सेक्टर-1 स्थित सांस्कृतिक मंच में इसकी शुरुआत ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त नाटक पालना का पूत से हुई, जिसने इस स्पर्धा में रोमांच भर दिया। इस कश्मीरी नाटक ने भ्रष्टाचार की शुरुआत, उसकी विद्रूपताएं और समाज को होने वाले नुकसान को उजागर किया। इसके बाद अंग्रेजी नाटक का हिंदी रूपांतरण एन इंस्पेक्टर काल्स, फिर एक नाटक ऐसा भी और भोजपुरी नाटक का छत्तीसगढ़ी में अनुवादित नाटक आप किस चीज के डायरेक्टर हैं जी ने नाट्य उत्सव की छटा बिखेर दी।

इन चारों नाटकों ने सामाजिक विसंगतियों को सामने रखा। विचार करने को मजबूर भी किया कि आज हम चांद और मंगल तक पहुंच होने की बातें करते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है? एक नाटक ऐसा भी और आप किस चीज के डायरेक्टर हैं जी नाटक ने हंसते-हंसाते और लोटपोट करते हुए कुरीतियों पर चोट किया। व्यंग्य करते हुए जाति प्रथा, आर्थिक विषमताएं, ग्रामीण परिवेश के साथ शहरी रहन सहन और हमारे जनप्रतिनिधियों का पोल खोलकर सामने रख दिया। बुधवार को चार और गुरुवार को दो नाटकों का मंचन होगा। इसमें भी कई तरह के रंग देखने को मिलेंगे। रंगकर्मियों को इसका इंतजार है। पहले दिन कई बड़े व रोचक मुद्दों पर कलाकारों ने अपनी अदाकारी की छटा बिखेरी, जो काफी शानदार रही।

राजेश श्रीवास्तव राष्ट्रीय सचिव, इप्टा की कलम से

एन इंस्पेक्टर कॉल्स नाटक में आखिरी तक बना रहा सस्पेंस, कलाकारों ने अंग्रेजी नाटक का हिंदी रूपांतरण पेश किया।

संदेश: नाटकों से समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर किया गया प्रहार

पालना का पूत: भ्रष्टाचार का कारण बताया और सुधारा

नाट्य संस्था मस्त ने कश्मीरी नाटक पालने का पूत का हिंदी रूपांतरण प्रस्तुत किया। निर्देशक राकेश बोंबार्डे ने मुख्य पात्रा निभाने के साथ अन्य पात्रों को भी अपने अभिनय कला को उभारने का पूरा-पूरा मौका दिया। इस नाटक में एक व्यक्ति 20 साल तक अंधेरी कोठरी में पालने में रहता है। वह राजा से नौकरी मांगता है। राजा उसे चूहे मारने की नौकरी देता है। वह दो कर्मचारियों के साथ लोगों के घरों में जाकर बिल्लियां छोड़ देते हैं और उनसे वसूली करते हैं। जनता परेशान होकर राजा के पास जाती है। राजा आश्वस्त करता है कि दो सरकारी मुलाजिम साथ में है। इसी बीच पालने का पूत चुनाव लड़कर जीत जाता है। भ्रष्टाचार में सरकारी मुलाजिमों को फंसा देता है और महामंत्री बन जाता है। इससे त्रस्त जनता जब शिकायत करती है तो राजा को माफी मांगनी पड़ती है और व्यवस्था को सुधारने की प्रक्रिया शुरू होती है।

एन इंस्पेक्टर कॉल्स: महिला के शोषण को किया गया उजागर

नाट्य संस्था लिटिल एफर्ट ने अंग्रेजी की चर्चित नाटक एन इंस्पेक्टर काल्स में संभ्रांत परिवार की महिला के शोषण को उजागर किया। ध्वनि और प्रकाश के अलग-अलग रंगों से अलग तरह से सीन क्रिएट किया। इसने दर्शकों को पहले ही बता दिया कि क्या होने वाला है। साथ ही जिज्ञासा भी बनाए रखा कि आगे क्या होगा। यही इस नाटक की सबसे बड़ी सफलता रही। एक लड़की आत्महत्या करती है। वह बड़ी परिवार की महिला होती है। एक इंस्पेक्टर जांच करने आता है। उसके सभी रिश्तेदारों से मिलता है, सभी अलग-अलग तरह से जवाब देते हैं। इससे वह हत्या के कारण को उजागर करता है। इस तरह से वह हत्या के मामले को उजागर करता है। इस नाटक ने उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।

एक नाटक ऐसा भी: हंसाते हुए किया समाज पर प्रहार

नाट्य संस्था कोरस के नाटक एक नाटक ऐसा भी ने हंसी मजाक में शानदार संदेश दिया। शुरू में लगा कि हंसी मजाक ही होते रहेगा, लेकिन जैसे कहानी में मोड़ आते गए, यह हास्य व्यंग्य के साथ एक बड़ा संदेश देने में कामयाब रहा। इसमें एक निर्देशक का डर सामने आया। उसे किसी नाटक को लिखने, पात्रों को गढ़ने और अनगढ़ कलाकारों से काम लेने का तरीका बताया। आज रंगकर्म ना रहकर सिर्फ एक नाटक बनकर रह गया है। यह रंगकर्मियों के लिए चिंता का विषय है।

आप किस चीज...: कलाकार की मजबूरी और वेदना बताई

इप्टा भिलाई की प्रस्तुति आप कौन चीज के डायरेक्टर हैं ने सामाजिक विसंगति को सामने रखा। किसी भी नाटक नौटंकी को सफल करना डायरेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस नाटक में कलाकार की मजबूरी बताते हुए समाज की विसंगति बताई। इसमें कभी मंच की तरफ देखा तक नहीं, उन कलाकारों को लेकर बनाई नौटंकी। दुर्योधन की मार से भीम हुआ अचेत तो दर्शकों ने किया हंगामा। तब डायरेक्टर ने अपनी व्यथा बताई।

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