• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Bhilaidurg
  • Durg News chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers

गांधी ने दो अांदोलनों में अानंद समाज लाइब्रेरी में सभाएं कीं, सम्मान में वहां अाज भी जूते-चप्पल उतारकर प्रवेश

Bhilaidurg News - आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी 1920 और 1933 यानी एक दशक के अंतर से रायपुर में दो बार आए। पहला मौका था 1920 में, जब...

Bhaskar News Network

Aug 15, 2019, 08:25 AM IST
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी 1920 और 1933 यानी एक दशक के अंतर से रायपुर में दो बार आए। पहला मौका था 1920 में, जब गांधीजी ने असहयोग अांदोलन छेड़ा था और रायपुर में उनका संबोधन अानंद समाज लाइब्रेरी (वाचनालय) परिसर में हुअा। इसके बाद 1933 में वे दूसरी बार सविनय अवज्ञा अांदोलन पर अाए और सभा को फिर यहीं संबोधित किया। वह अनुभूति और आनंद आज भी आनंद समाज वाचनालय में न केवल जीवंत है, बल्कि अाज तक उन दो अवसरों का सम्मान बरकरार है। 20 वीं सदी की शुरुआत यानी 1900 में बनी आनंद समाज लाइब्रेरी बेशक आज डिजिटल हो गई है, जहां कियोस्क पर किताबें सर्च की जा सकती हैं। लेकिन अाज भी उसी सम्मान के लिए लाइब्रेरी के भीतर जाने से पहले जूते-चप्पल उतारने की परंपरा कायम रखी गई है।

1899 में बनी संस्था बाद में परिवर्तित हुई आनंदसमाज में

1857 की पहली स्वतंत्रता क्रांति के बाद रायपुर में 13 जनवरी 1899 को शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने बारा भाई संस्था बनाई। जिसका मकसद था उस दौर में दुनिया में हो रहे बदलावों को रायपुर तक लाना। आधुनिक ज्ञान के जरिए सामाजिक चेतना जागरूकता इस संस्था का ध्येय था। बाद में बारा भाई संगठन ही आनंद समाज कहलाने लगा। 1900 में संस्था के सदस्यों ने चंदा करके किताबें मंगवाई, कुछ दानदाताओं ने भी किताबें पुस्तकालय में डोनेट की। 1908 में बैरमजी पेस्टन ने आर्थिक मदद देकर इसकी इमारत को विस्तार दिया।

गांधी के अस्पृश्यता अांदोलन

की 1933 में शुरुअात हुई थी

राजधानी के जैतूसाव मठ से

गांधीजी ने अस्पृश्य वर्ग की एक बालिका से पुरानी बस्ती के कुंए से पानी निकलवाया और सभी को पिलवाया भी। इसके बाद उन्होंने जैतूसाव मठ में बने मंदिर में भी अश्पृश्य लोगों को प्रवेश दिलाया।

आजादी आंदोलन और गांधीजी की स्मृतियां ही नहीं, निशानियां भी सहेजे हैं हम

गांधीजी ने वाचनालय के बाद सप्रे शाला में सभा ली।

दो बार हुआ गांधी का संबोधन

गांधीजी का शहर में आगमन दो अलग और बेहद अहम आंदोलन के दौर में हुआ था और दोनों ही बार एक चीज काॅमन थी, आनंद समाज वाचनालय परिसर में उनके भाषण। जिससे पूरे छत्तीसगढ़ की अवाम को आजादी के आंदोलन को प्रेरणा मिली। आंदोलन तेज से और तेज हुए। जन जन की भावना बन गई स्वतंत्रता। जिसकी परिणति अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बन गया।

पं. नेहरू की पुस्तक डिस्कवरी अाॅफ इंडिया का पहला संग्रह भी

आनंद समाज लाइब्रेरी में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की विरासत भी है। यहां उनकी लिखी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया का पहला संग्रह है। लाइब्रेरी में दुर्लभ किताबें, शोधग्रंथ और आलेख भी संजोकर रखे गए हैं। गांधीजी और नेहरु जी की किताबों का कलेक्शन है। गांधी वांग्मय में बापू के रायपुर में आने का जिक्र भी है। आनंद समाज वाचनालय में 1930 में प्रकाशित क्वीन विक्टोरिया के खतों की किताबों का अनूठा संग्रह है। आठ भागों में इस किताब में क्वीन विक्टोरिया के 1886 से 1890 के दौरान लिखे खतों का संग्रह है, जो उन्होंने उस दौर की नामी हस्तियों, खासकर उस समय के ज्यादातर राजपरिवारों के लोगों को लिखे थे।

1933

अब

‘करो या मरो’ का नारा निकला हमारे राष्ट्रीय स्कूल से

वहां अाश्रम में अब भी बच्चे सीख रहे हैं चरखा-तकली

जाॅन राजेश पाॅल | रायपुर

राजधानी में कचहरी चौक पर 1920 में शुरू की गई राष्ट्रीय स्कूल दरअसल अाजादी के अांदोलन का ही हिस्सा था क्योंकि बच्चों में राष्ट्रीयता की अलग जगाने के लिए ही राजधानी में सबसे पहले और फिर प्रदेश के कई हिस्से में राष्ट्रीय स्कूल खोले गए। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि महात्मा गांधी का 1942 में करो या मरो का का नारा राष्ट्रीय विद्यालय से ही शुरू हुअा। इसी प्रांगण से गांधीजी के ओजपूर्ण भाषण के साथ विशाल रैली निकली थी, जो तत्कालीन रायपुर के प्रमुख मार्गों से होकर गांधी मैदान पर सभा में बदल गई थी। उस दिन अंग्रेज हुकूमत ने 72 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें दानी जी, माधो राव परगनिया, कामरेड राम सहाय तिवारी आदि प्रमुख थे। राष्ट्रीय स्कूल सौ साल बाद भी सारी यादें सहेजे हुए है। यहां बाल अाश्रम भी चल रहा है और खास बात ये है कि गांधीजी के प्रतीक बेहद पुराने चरखा और कतली यहां अब भी चलते हैं। अाश्रम के बच्चे पूरी गर्मी यहां चरखा चलाना और धागे बनाकर कपड़े बुनना सीख रहे हैं।

अंग्रेजी स्कूलों व वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर 1921 में ऐसे स्कूल देशभर में स्थापित किए गए थे। 5 फरवरी को यहां 240 बच्चों ने एडमिशन लिया। यहां के बच्चे रोज प्रभात फेरी निकालते और अंग्रेज विरोधी नारे लगाते थे। आजाद हिंद फौज पर लालकिले में मुकदमा चलाया जा रहा था, तब राष्ट्रीय विद्यालय से ही नागरिकों ने विरोध में विशाल जुलूस निकाला था। रायल लेवी ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की, तब देश मेें जिस तरह उसके समर्थन में प्रदर्शन हुए उस प्रदर्शन की शुरूआत रायपुर के राष्ट्रीय विद्यालय से ही हुई। राष्ट्रीय विद्यालय की सह-संस्था के रूप में उसी प्रांगण में अनाथालय भी शुरू हुअा, जो बाद में बाल आश्रम में तब्दील हो गया और आज तक है।

राकेश पांडेय | रायपुर

आजादी के आंदोलन के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का गवाह छत्तीसगढ़ भी रहा है। असहयोग अांदोलन की नींव कंडेल नहर अांदोलन से पड़ी और महात्मा गांधी ने 1933 में राजधानी के ही जैतूसाव मठ में अस्पृश्य समुदाय के लोगों को प्रवेश दिलाकर इस सामाजिक अांदोलन की शुरुअात की।

इस तरह, छुअाछूत के खिलाफ देशभर में शुरू हुई पहली बड़ी लड़ाई का केंद्र हमारा मठ बना और बाद में यही मठ अाजादी के अांदोलनों का केंद्रबिंदु बना रहा। छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता अांदोलनों के केंद्र रहे पुरानी बस्ती के जैतूसाव मठ में आंदोलनकारी एकत्र होते थे आंदोलन की रणनीतियां भी यहीं बनतीं। दरअसल आजादी के आंदोलन की राह में छुअाछूत बड़ी बाधा थी। तब महात्मा गांधी ने सभी को एकजुट करने का बीड़ा उठाया। अस्पृश्यता को समाप्त करने के लिए 1933 में वे भारत यात्रा पर निकले। बहुत कम लोगों को पता है कि इस अभियान की शुरुआत भी छत्तीसगढ़ से ही हुई। गांधी जी 22 नवंबर को दुर्ग पहुंचे। यहां वे सबसे पहले निगम के पाठशाला में गए। वहां बिना भेदभाव के छात्रों को एक साथ टाटपट्‌टी पर बैठे देखकर बहुत खुश हुए। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम जैतूसाव मठ में हुआ, जब गांधीजी ने अस्पृश्य वर्ग की एक बालिका से पुरानी बस्ती के कुंए से पानी निकलवाया और सभी को पिलवाया भी। इसके बाद उन्होंने जैतूसाव मठ में बने मंदिर में भी अश्पृश्य लोगों को प्रवेश दिलाया।

एक हफ्ते के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान गांधीजी ने 24 नवंबर को लॉरी स्कूल में जनसभा को संबोधित किया। वे पं. सुंदरलाल शर्मा द्वारा चलाए जा रहे आश्रम भी गए। मौदहापारा में उन्होंने समाज के कमजोर तबके की एक सभा ली। अस्पृश्यता को समाप्त करने के लिए सुंदरलाल शर्मा द्वारा किए जा रहे कामों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने उनको अपना गुरु भी कहा था।

यहां परेड में आती थीं नामी हस्तियां

राष्ट्रीय विद्यालय को स्थापित करने में जोशी बंधुओं का योगदान रहा। इसके परिसर में सेवा दल की परेड हुआ करती थी। इसमें प. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, महंत लक्ष्मीनारायण दास, मौलाना रऊफ, मदन ठेठवार, राजमहंत नैनदास महिलांग, महंत वैष्णव दास, मनोहर लाल श्रीवास्तव, डॉ. खूबचंद बघेल आदि शामिल होते थे।

रायपुुर समेत 6 शहरों में खुले थे राष्ट्रीय स्कूल

रायपुर के अलावा राजनांदगांव, धमतरी, नगरी, दुर्ग, बिलासपुर में भी राष्ट्रीय विद्यालय खोले गए। 5 फरवरी 1921 को शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों की सभा में राष्ट्रीय विद्यालय का कांसेप्ट मंजूर कर लिया। वामनराव लाखे को संचालन समिति का मंत्री बनाया गया। समिति के अध्यक्ष अजय तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्कूल के संग्रहालय में स्वतंत्रता अांदोलन से जुड़ी तमाम चीजें मौजूद हैं। कुछ साल पहले तक यहां स्वरोजगार के लिए बच्चों को साबुन, फर्नीचर वगैरह बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता था। अब भी गर्मी में यहां बच्चे पुराने चरखे चलाना सीख रहे हैं। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए पर्चे यहां जिस साइक्लोस्टाइल मशीन से छापे जाते थे, वह अब भी है। इस स्कूल में अभी रमा वर्मा प्राचार्य हैं और 600 बच्चे पढ़ रहे हैं।

1939

अब

Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
X
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
Durg News - chhattisgarh news gandhi held meetings in the anand samaj library in two agitations in honor today also took off shoes and slippers
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना