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लड़कियों को जन्म से लेकर शादी के बाद भी रोज झेलनी पड़ती है मुसीबतें

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 02:11 AM IST

Durg Bhilai News - एक लड़की के पैदा होने से लेकर उसके बड़े होने तक लगातार असमाजिक गतिविधियों से आमना-सामना करना होता है। आस-पास के लोग...

Bhilai News - chhattisgarh news girls have to suffer daily after birth due to problems
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एक लड़की के पैदा होने से लेकर उसके बड़े होने तक लगातार असमाजिक गतिविधियों से आमना-सामना करना होता है। आस-पास के लोग ही किस तरह लड़की होने पर ताना और उनको लज्जित करने का काम करते है। इन सब से गुजरने के बाद जब वह लड़की से औरत बनती है तो भी उसे सभी परिवार का चिंतन करना होता है। पूरे जीवनकाल में महिलाओं को जो कुछ सहन करना पड़ता है।

बुधवार को नेहरू सांस्कृतिक भवन सेक्टर-1 में आयोजित हो रही बहुभाषी नाट्य स्पर्धा में औरत नाटक में इसका चित्रण किया गया। नाट्य संस्था एक मुट्ठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसका निर्देशन नेहा साहू ने किया। लेखक गुलाम हैदर मंसूरी रहे। वहीं कलाकार कल्पना ढीमर, दामिनी पटेल, भावना साहू और मुकेश उइके रहे। इनके अलावा साथी कलाकारों ने भी मंच पर प्ले किया। बुधवार को तीन नाटक का मंचन किया गया। जिसमें पहला नाटक सत्य नाट्य संस्था द्वारा महारथी नाटक का मंचन किया गया। जिसके निर्देशक श्रीकांत तिवारी रहे। वहीं दूसरा नाटक मुट्‌ठी का मै हूं और अंतिम नाटक प्रवास आंध्रा प्रज्ञा नाट्य मंडली द्वारा वेलागा पंडु नाटक का मंचन किया गया। वहीं अंतिम दिन दो नाटक का मंचन शाम 4 बजे से होगा।

नेहरू सांस्कृतिक भवन सेक्टर-1 में आयोजित हो रही बहुभाषी नाट्य स्पर्धा में कलाकारों ने दी प्रस्तुति।

मै हूं नाटक में बताया लेखक की कहानी

कहानी मै हूं में एक लेखक के जीवन को प्रदर्शित किया। तनवीर फैज जो कि एक लेखक है वह अपनी एक नई कहानी लिखने के लिए दूसरे जगह जाता है। लेखक जब औरत की कहानी लिखता है तो औरत की परिस्थितियों को जानता है। कि किस तरह एक महिला अपनी जिंदगी जीती है। उनके दर्द को समझ लेखक को अहसास होता है कि उसकी कल्पना को वो महसूस करता है। हर समय लेखक को लगता है कि उसके आस-पास और भी कोई है। इस कहानी में एक समस्या का समाधान करता दिखाई देता है।

आज दो नाटक के साथ होगा समापन

नेहरू सांस्कृतिक भवन सेक्टर-1 में आयोजित हो रही बहुभाषी नाट्य स्पर्धा का समापन 14 फरवरी को होगा। गुरुवार को नाट्य स्पर्धा में दृष्टिकोण संस्था द्वारा पहला नाटक शाम 4 बजे हस्ताक्षर का मंचन किया जाएगा। जिसके निर्देशक कौशल कुमार उपाध्याय है। वहीं दूसरा और अंतिम नाटक इप्टा द्वारा एक गधे की आत्मकथा का मंचन शाम 5.30 बजे होगा। निर्देशक चारू श्रीवास्तव है। नाटक के माध्यम से समाज में व्यापत कुरीतियों को प्रदर्शित किया जा रह है। वहीं कलाकार अपने हुनर को भी दिखा रहें है।

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