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एक ही कैंपस में लगेंगी हिंदी व इंग्लिश मीडि. की कक्षाएं

एक वर्ष पहले
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जिले में खुल रहे नए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए वहां के हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने से विवाद गहराने लगा है। इस विवाद के बाद दोनों स्कूलों को एक ही परिसर में संचालित करने की तैयारी है। प्रमुख सचिव ने इसकी कार्ययोजना जिला शिक्षा विभाग से मंगवाई है।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दुर्ग जिले में सात नए अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जाने हैं। पहली से बारहवीं तक ये स्कूल संचालित करने की योजना है। इस योजना को नए शिक्षण सत्र में अमलीजामा पहनाना है। लेकिन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को हिन्दी माध्यम स्कूल में खोलने और वहां के विद्यार्थियों को दूसरे स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है। पालकों की शिकायत के बाद अब कार्ययोजना में बदलाव करने जा रही है।

सीबीएसई पैटर्न पर संबद्धता संशय में : स्कूल शिक्षा विभाग के इस नए प्रयोग को लेकर स्थिति जटिल होती जा रही है। दुर्ग सहित पूरे प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम वाले निजी स्कूल सीबीएसई भुनेश्वर बोर्ड से संबद्धता है और मान्य है। वहीं सरकारी नए अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल किस बोर्ड से संबद्धता और मान्य होंगे यह स्कूल शिक्षा विभाग तय नहीं कर पाया है। इसलिए भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की किताबें किसकी होगी इसे लेकर पालक संशय में हैं।

बच्चे नहीं होंगे शिफ्ट

वैशालीनगर उच्चतर माध्यमिक शाला सहित इन स्कूलों के विद्यार्थी शिफ्ट नहीं होंगे। बालाजीनगर खुर्सीपार के विद्यार्थी ,भिलाई तीन उच्चतर माध्यमिक शाला, पाटन बालक उच्चतर माध्यमिक शाला और सेक्टर 6 उच्चतर माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों को उन्हीं के स्कूल में रखा जाएगा।

अभी तय नहीं शिफ्ट करना

डॉ. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव

ये होंगे नए 8 इंग्लिश मीडियम स्कूल

शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला दीपकनगर,शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बालाजीनगर,शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सेक्टर 6, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला वैशालीनगर,शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बालक पाटन, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला भिलाई तीन, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला जंजगिरी।

पहली शिफ्ट में अंग्रेजी तो दूसरे में हिंदी के विद्यार्थी

स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक जिन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जाएंगे। वहां दो शिफ्टों में स्कूल संचालित करने की योजना है। पहले से चल रहे हिंदी माध्यम स्कूल के विद्यार्थियों को पास के स्कूल में शिफ्ट करने से दूरी ज्यादा हो जाएगी। खासकर छात्राओं को ज्यादा दिक्कतें आएगी। इसलिए अब पहले शिफ्ट में अंग्रेजी माध्यम तो दूसरे शिफ्ट में हिन्दी माध्यम वाले स्कूल लगाने के आदेश हैं।
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