मानव जीवन मिला है, इसे क्षमा विनय से सफल बनाएं: विमर्श

Bhilaidurg News - त्रिवेणी जैन तीर्थ, सेक्टर -6 भिलाई की धर्मसभा में रविवार को श्रमणाचार्य विमर्श सागर महामुनिराज ने उमास्वामी...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:40 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news human life is found make it successful with forgiveness discussion
त्रिवेणी जैन तीर्थ, सेक्टर -6 भिलाई की धर्मसभा में रविवार को श्रमणाचार्य विमर्श सागर महामुनिराज ने उमास्वामी विरचित तत्वार सूत्र में कहे 5 भागों में से औपश्रमिक भाव पर प्रकाश डाला। कर्मों के उपशम से जो आत्मोभाव प्रगट होता है, वह औपसमिक भाव कहलाता है।

आचार्य ने कहा कि छोटा सा जीवन मिला है, इस छोटे से जीवन में भी हम बड़े काम कर सकते हैं। आत्म स्वभाव को बलवान बनाप सकते हैं। कर्मों को पछाड़ सकते हैं और अपनी आत्मा को क्षमा, विनय, सरलता आदि गुणों के जल से संचित कर आनादि की उपग्रह भगवत् दशा को प्राप्त करा सकते हैं। आत्मा को परमात्मा बना सकते हैं। आचार्य ने कहा कि सुर्योदय में जो कर्मजनित भावों से प्रभावित न होकर आत्मस्वमान को प्राप्त होता है, वह कवायों का उपसम करता है, कर्म उपसमित होने पर आत्मनिर्भता प्रगट होती है। गुरूदेव ने कहा दो व्यक्तियों के बीच चल रहे झगडे़ को हम दबाने की कोशिश करते हैं, शांत कराते हैं। ऐसे ही कर्मजनित भाव को भी हमें दबाना चाहिए, ताकि आत्मा की सहज शांति भंग न हो। गुरुदेव न कहा वर्तमान में अपने अंदर उगते हुए परिणामों को शांत करने की कला सीखनी होगी। सांसार में कभी कोई ऐसी परिस्थिति सामने खड़ी हो जाए, जहां कसायों की त्वरता का दूध उबल रहा हो तो ज्ञनोपयोग के छींटे डालकर शांत कर देना चाहिए।

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