आज रात चांद छूने निकलेगा भारत

Bhilaidurg News - भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से लाॅन्चिंग यह रॉकेट 17 मिनट में ही चंद्रयान को पृथ्वी की 170 किमी से 38000...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 06:25 AM IST
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भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से लाॅन्चिंग

यह रॉकेट 17 मिनट में ही चंद्रयान को पृथ्वी की 170 किमी से 38000 किमी वाली अंडाकार परिधि में पहुंचाएगा।

कुल वजन 3877 किग्रा

ऑर्बिटर 2379 किग्रा

लैंडर 1471 किग्रा

रोवर 27 किग्रा

चांद का दक्षिणी ध्रुव अहम क्यों? हमें चंद्रयान वहां भेजकर हासिल क्या होगा?

चांद का दक्षिणी ध्रुव, उत्तरी ध्रुव से न सिर्फ बहुत बड़ा है बल्कि वहां के बड़े-बड़े गड्‌ढों (जिन्हें क्रैटर कहा जाता है) में हमेशा अंधेरा रहता है। वहां पानी की संभावना है। लैैंडर और रोवर दक्षिणी ध्रुव पर दो बड़े क्रैटर (जिनके नाम मंजिनस सी और सिंपेलियस एन हैं) के बीच मैदान में लैंड करेगा। चंद्रयान-1 ने वहां बर्फ होने का पता लगाया था। लेकिन, चांद की उत्पत्ति के बारे में काफी कुछ जानना बाकी है।

ऑर्बिटर यह चांद के चक्कर लगाता रहेगा। लैंडर और रोवर पर नजर रखेगा। राेवर से मिली जानकारी को इसरो सेंटर भेजेगा। यह चांद से 100 किमी ऊपर मोबाइल कमांड सेंटर होगा।

लैंडर (विक्रम) यह चांद पर उतरेगा। इसके भीतर रोवर होगा। लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह 15 दिन तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। विक्रम 650 वाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाला है, जो ऑर्बिटर और रोवर के सीधे संपर्क में रहेगा।

दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा

रोवर उतरने के 15 मिनट बाद चांद की तस्वीरें भेजनी शुरू कर देगा।

राेवर (प्रज्ञान) रोवर के 6 पहिए अशोक चक्र की तर्ज पर बने हैं। यह एक सेमी/सेकंड की गति से चलेगा। 15 दिन में 500 मी. की दूरी तय करेगा। यह चांद की सतह, वातावरण और मिट्टी की जांच करेगा।

पहली बार चांद पर रोवर उतारेगा भारत

इसरो चैयरमैन के. सिवन ने बताया कैसा होगा सफर

ऑर्बिटर पहले 16 दिन पृथ्वी के 5 चक्कर लगाएगा। फिर 5 दिन चंद्रमा की ओर चलेगा। चंद्रमा के 4 चक्कर लगाएगा। 100 किमी की दूरी पर चंद्रमा की वृत्तीय कक्षा में पहुंचेगा और अगले 27 दिन वहीं चक्कर लगाएगा। इसके बाद लैंडर ऑर्बिटर से अलग होगा और अगले 4 दिन चंद्रमा का चक्कर काटते हुए दूरी कम करता जाएगा। 6-7 सितंबर को जब यह 30 किमी की दूरी पर पहुंचेगा तो 15 मिनट में चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा। यही सबसे क्रिटिकल समय है। क्योंकि, इससे पहले भारत ने कभी यह नहीं किया है।’ - के. सिवन, इसरो चेयरमैन

के. सिवन ने शनिवार को भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा की।

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