जीवन में खुशी व मन की शांति भीतर ही है, आध्यात्म से उसे पहचानें: सुरेखा बहन

Durg Bhilai News - यदि जीवन में स्थायी खुशी और शंाति चाहते हैं तो भक्ति को आध्यात्मिक बनाना होगा। पदार्थों में सुख है आनंद नहीं। आनंद...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 02:31 AM IST
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यदि जीवन में स्थायी खुशी और शंाति चाहते हैं तो भक्ति को आध्यात्मिक बनाना होगा। पदार्थों में सुख है आनंद नहीं। आनंद भीतर की चीज है, इसे भीतर खोजें। यह आनंद आध्यात्म से ही आ सकता है, बाहर से नहीं।

जो आध्यात्मिक होते है उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। उनका मन शांत और शक्तिशाली होता है और जो आध्यात्मिक होता है उसे हर चीज अपने अनुकूल लगती है। यह बातें कादंबरी नगर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि, आनंद सरोवर बघेरा द्वारा आयोजित अलविदा तनाव शिविर में ब्रह्माकुमारी सुरेखा बहन ने कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने अभी हर चीजों को बहुत विस्तार कर लिया है। चाहे वो धन संपत्ति हो, कारोबार, पदार्थों, मित्र संबंधियों का या अपनी इच्छाओें का। इससे स्वयं तो उसमें उलझ ही गया है, लेकिन अपने परिवार वालों को भी उसमेें उलझा दिया है। कब्र में पैर है फिर भी धन का लोभ नहीं जाता। जबकि उसे मालूम है कि यह सब हमारे साथ नहीं जाता है। तो देखिए कितनी विडंबना है जो साथ नहीं जाएगा, उसके लिए तो हम पूरा जीवन लगा देते हैं और जो चीज साथ जानी है उसके लिए कहते हैं कि हमारे पास वक्त नहीं है। यदि आप सचमुच बुद्धिमान हैं, तो चिंतन कीजिए आखिर हमारा समय कहां जा रहा है? अपनी लाइफ का कुछ समय आध्यात्मिकता को भी दें, क्योंकि इसी से जीवन को सही दिशा व दशा मिलती है।

सीख: इच्छाओं का अंत नहीं, उलझना छोड़ें

शिविर में मौजूद श्रोता। इनसेट: प्रवचन में सुरेखा बहन

क्षमा करना सीखिए, कभी अकेले नहीं रहना पड़ेगा

सुरेखा बहन ने क्षमा भाव का महत्व बताते हुए कहा कि दूसरों द्वारा की गई गलती की गांठ हम वर्षों तक हम अपने मन में बांधे रहते है, जिसके कारण कई सुनहरे अवसरों पर अकेला पाते हैं। जबकि घटना बदल जाती है, व्यक्ति बदल जाते हैं। बदला लेना इस संसार मेें हर कोई जानता है दूसरों को शिक्षा देना भी हर कोई जानता है, लेकिन महान वह है जो दूसरों की गलतियों को क्षमा कर दे। क्षमा करना ही सच्ची शिक्षा देना है। उन्होंने सभी साधकों को क्षमा कीजिए और दूसरों को अपना बना लीजिए का मंत्र दिया। एक बार क्षमा करके तो देखें सारा संसार अपना नजर आएगा।

शिविर में लोगों ने कहा- जीवन जीने राह मिल गई

हम कहां-कहां नहीं भटके, लेकिन सभी जगह निराशा ही हाथ लगी। जीवन से थक चुके थे। अवसाद भरी जिंदगी से उब चुके थे। तभी आशा की किरण बनकर आया तनाव मुक्ति शिविर- ये अनुभव है अलविदा तनाव शिविर का लाभ ले रहे साधकों के। साधकों ने कहा हमें नहीं मालूम था कि हमारी उदासी दूर हो जाएगी। निरूददेशीय जीवन को लक्ष्य मिल जाएंगे। मन शांत व शीतल हो जायेगा।

कल्पवृक्ष दिव्य गुणों वाले मनुष्य ही दिखाई देते हैं

ब्रह्माकुमारी सुरेखा बहन ने कल्प वृक्ष की भी जाानकारी दी। जिसमें सतयुग, त्रेतायुग को कल्प वृक्ष में तना के रूप में दिखाया है, जहां सभी दिव्य गुणों से सम्पन्न मनुष्य रहते हैं। उन्होंने कहा कि द्वापर, कलयुग से अनेक धर्मात्माएं आते हैं और पूजा पाठ अर्थात् भक्ति शुरू होती है। जहां पर माया रूपी रावण यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह और अंहकार की प्रवेशता होती है। इसी का त्याग करना जरूरी है।

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