संत-मुनियों की तरह भिक्षा मांगकर लिया आहार

Bhilai News - चातुर्मास के अंतिम पड़ाव में आनंद पुष्कर दरबार में श्रमण संघ, वर्धमान सेवा मंच, स्वाध्याय मंडल के सदस्यों ने रविवार...

Nov 11, 2019, 06:56 AM IST
चातुर्मास के अंतिम पड़ाव में आनंद पुष्कर दरबार में श्रमण संघ, वर्धमान सेवा मंच, स्वाध्याय मंडल के सदस्यों ने रविवार का पूरा दिन साधु, संताें की तरह बिताया। उनकी आहारचर्या की पालन के साथ ही तप, आराधना की।

भिक्षु दया करते हुए सदस्यों ने जैन समाज के विभिन्न घरों में जाकर भिक्षा मांगकर भोजन लाया और जिन घरों से भिक्षा ली, वहां के सदस्यों को कई धार्मिक नियमों का संकल्प दिलाया। इसके बाद सभी ने एक साथ मिल बैठकर गोचरी (भोजन) ग्रहण किया। दोपहर में धार्मिक प्रश्नोत्तरी भी कराई गई।

जैन समाज के लोगों के घरों में भिक्षा के लिए पहुंचे श्रमण संघ के सदस्य

सुबह के सत्र में साधुअों के नियम और सिद्धांत बताए

सुबह 6.30 बजे से आयोजित इस भिक्षु दया तप महोत्सव में किस तरह के अपने आचरण को रखना है, किस तरह से भिक्षा मांगना है, उनके नियम व सिद्धांत साध्वी र| ज्योति व साध्वी विचक्षण श्री ने धर्मसभा में सदस्यों को बताया। साध्वी वंदिता ने लोगस्स सूत्र पर का ध्यान अनुष्ठान कराया। 24 तीर्थंकरों की स्तुति करते हुए इस अनुष्ठान को कराया गया। इस अवसर पर भक्त उपस्थित रहे।

संयमी साधु लोभ में नहीं पड़ते, भक्त भी साधु-संतों के नियमों को जानें: विजय

ऋषभ नगर स्थित नवकार भवन में चातुर्मासिक प्रवचन में आचार्य विजयराज मसा ने कहा कि जिनवाणी में मुनियों के लिए कुछ नियम निर्धारित हैं, जिनका पालन उन्हें करना होता है। कुछ विशेषताए बताई गई हैं, जो एक सिद्ध मुनि में होने चाहिए। उत्तराध्ययन सूत्र के तहत दसवीं गाथा में क्षमा धर्म के बाद दीक्षित मुनि के लिए निर्लोभता का गुण अनिवार्य होता है। आचार्य ने कहा कि सत्य व संयंमशील मुनि तभी पूज्य होता है, जब वह निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करे। वर्तमान भौतिकवादी युग में मुनियों व साधुओं में कहीं-कहीं आ रही शिथिलता को दुर्भाग्यजनक बताते हुए आचार्य ने यह जिम्मेदारी श्रावकों को दी कि वे स्वयं भी नियमों की जानकारी रखें और साधु-साध्वियों की गतिविधियों पर बराबर नजर रखें कि जिन पर धर्म प्रचार की जिम्मेदारी है, जो संसारी लोगों को धर्माचरण की बात सिखाते हैं जो संयंम का पाठ श्रावकोें को पढ़ाते हैं वे स्वयं इसका पालन कठोरता से कर रहे हैं या नहीं। ऐसे कुछ जागरुक श्रावक हैं।

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