इस साल जिले में नहीं बढ़ेगा जमीन का बाजार मूल्य, पिछले साल घटाए थे 30 प्रतिशत दाम
इस साल भी जमीन का बाजार मूल्य नहीं बढ़ेगा। इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन खुलासा वित्तीय वर्ष समाप्ति के बाद ही किया जाएगा। पिछले वर्ष जरूर बाजार मूल्य में बदलाव किया गया, उसे भी बढ़ाने के बजाए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया गया था। वर्ष 2005-06 के बाद से अब तक में यह पहला मौका था, जब राज्य शासन की जारी गाइड लाइन में जमीन के बाजार मूल्य में कटौती की गई थी। वर्तमान में इस कटौती को यथावत रखे जाने की तैयारी की गई है। पिछले दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं अपने बजट भाषण में इस बात का उल्लेख कर चुके हैं।
रियल इस्टेट सेक्टर को ग्रूम करने की योजना से भी जमीन का बाजार मूल्य नहीं बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने भी अपने एजेंडे में प्रमुखता से इसका उल्लेख किया था। अब फिर से जमीन के सरकारी दाम नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। एक्जीक्यूशन शुरू कर दी गई है।
दुर्ग में लगातार तीसरा वर्ष बाजार मूल्य नहीं बढ़ेगा
जानकार अधिकारी बताते हैं कि, जिले में जमीन के बाजार मूल्य वर्ष 2005-06 से लगातार बढ़ाए गए हैं। यह इन 15 सालों में 1500 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। लगातार बढ़ोत्तरी के चलते लोगों ने खरीदी-बिक्री पर रुचि लेना ही बंद कर दिया। वर्ष 2018-19 वित्तीय वर्ष में जो गाइड लाइन तय थी। इस वजह से 30 प्रतिशत तक दर को कम किया गया। इससे 30 प्रतिशत तक खरीदी-बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई। इसे देखते हुए उक्त निर्णय को यथावत रखने की तैयारी है।
जमीन के दाम नहीं बढ़ने से फायदा आपको ही...
{बढ़ेगा शासन का राजस्व: जमीन के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं होने से खरीदी-बिक्री बढ़ेगी, इसे शासन के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी। इस साल 110 करोड़ रुपए का राजस्व रजिस्ट्री से मिला है।
परिसीमन होने से दर का चार्ट नए सिरे से बनेगा
दुर्ग के वार्डों की सीमा बदल चुकी है। इसी तरह भिलाई और रिसाली की सीमा बदलने वाली है। इसकी वजह से प्रशासन इन इलाकों में नए सिरे से बाजार मूल्य तय कर सकता है। बताया जा रहा है बाजार मूल्य बढ़ेगा नहीं लेकिन आंशिक रूप से कम जरूर हो सकता है। क्योंकि रियल इस्टेट कारोबार पहले सुस्त था, अब सालभर में यह काफी ग्रोथ किया है।
शासन के आदेशानुसार किया जाएगा तय...
गजेंद्र सिंह ठाकुर, एडीएम दुर्ग
रजिस्ट्री का रिकॉर्ड: इस साल 19222 रजिस्ट्री जिले में हुई, लोगों ने खूब खरीदे प्लॉट
सबसे महंगा नेहरूनगर से पॉवर हाउस का इलाका
जिले में वर्ष 2017 में जारी गाइड लाईन के मुताबिक सबसे महंगी जमीन का बाजार मूल्य नेहरूनगर चौक से पॉवर हाउस चौक के करीब रहा, जो करीब 8 हजार रुपए था। खास बात यह है कि जितना शुल्क पंजीयन के लिए लगता, उतना ही नहीं भिलाई निगम में जमा कराया जाना होता है। फिलहाल नामांतरण शुल्क जमा नहीं किया जाता है। इस संबंध में बिलासपुर हाईकोर्ट ने आदेश भी दिया है।
बजट सत्र में सीएम भूपेश ने भी किया है ऐलान
बाजार मूल्य को लेकर राज्य सरकार की मंशा भी साफ है। सरकार ने बजट में इसके संकेत दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री राजेंद्र साहू कहते हैं, जमीन का बाजार मूल्य काे यथावत रखने के संबंध में सीएम भूपेश बघेल ने बजट में ऐलान भी किया है। पिछले वर्ष 30 प्रतिशत तक इसमें कटौती की गई थी। यह कटौती अब भी लागू रहेगी। इससे लोगों को राहत मिलेगी।
{छोटे व मध्यम वर्गीय परिवार भी खरीद सकेंगे जमीन: राज्य शासन के इस फैसले से छोटे व मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। वे जमीन खरीद सकेंगे। बताया जा रहा है कि इस साल रजिस्ट्री की संख्या बढ़ी है। क्योंकि बाजार मूल्य घटा है।
{खुलेंगे निवेश के रास्ते: पिछले कुछ वर्षों में जमीन की खरीदी-बिक्री कम हुई है। बाजार मूल्य व रजिस्ट्री शुल्क में लगातार बढ़ोत्तरी के चलते लोग द्वारा जमीन पर निवेश कम कर दिया गया था। इस फैसले ने निवेश के रास्ते खुलेंगे।
5 डिसमिल से कम जमीन खरीदी-बिक्री कर सकते हैं।**
110 करोड़ रु. राजस्व रजिस्ट्री से मिला इस साल।**
19222 रजिस्ट्री वर्ष 2019-20 में हुई।**
एक नजर जिले में हुई रजिस्ट्री पर
25 रजिस्ट्री रोज होती दुर्ग जिले में।**