मुनगा और गोमूत्र से बनाई दवा, कुपोषण भगाने और जच्चा-बच्चा के लिए लाभकारी

Bhilai News - माल न्यूट्रीशन को दूर करने, जच्चा और बच्चा के लिए स्वास्थ्य वर्धक तथा मल्टी ड्रग रजिस्टेंस की संभावना को जड़ से...

Nov 11, 2019, 06:40 AM IST
माल न्यूट्रीशन को दूर करने, जच्चा और बच्चा के लिए स्वास्थ्य वर्धक तथा मल्टी ड्रग रजिस्टेंस की संभावना को जड़ से खत्म करने के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय ने एक ग्रोथ प्रमोटर बनाया है।

इसमें मुनगे की पत्तियों का रस और गोमूत्र को एक अलग विधि से मिलाया गया है। इससे दोनों की गुणवत्ता दो गुनी हो गई। इसमें न तो कोई साइड इफेक्ट है और न ही इससे शरीर में किसी दवा के प्रति एंटी बायोटिक बनने की संभावना है। इस प्रयोग को अभी लैब में पूरा कर लिया गया है। बैक्टिरियल इंफेक्शन को पूरी तरह से दूर करने में सफलता मिली है। मुर्गियों में इसका प्रयोग किया जा रहा है। दवा को विवि के औषधि और विष विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. श्यामंतकमणि त्रिपाठी ने बनाया है। इसके लिए पिछले दिनों एक कार्यशाला में कैलिफोर्निया और मिशिगन विवि ने सम्मान किया है। इसमें श्रीशंकराचार्य कॉलेज के इंजी. विवेक सोनी ने सहायता की।

प्रयोगशाला में दवा का डिस्टीलेशन किया गया।

इसलिए किया गया मूनगे की पत्ती का उपयोग

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि महिलाओं में कुपोषण को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश के सागर में बंद डिब्बे में मुनगे की पत्तियों का पाउडर बनाकर दिया गया। इससे काफी सफलता मिली। इसे देखते हुए और मुनगे में पाए जाने वाले तत्वों को देखते हुए इसकी पत्तियों के रस का उपयोग किया गया।

चार गुनी बढ़ी एक्सट्रैक्ट की गुणवत्ता

मात्रा मुनगा गोमूत्र मिलाने पर

मा. ग्राम मिमी में मिमी में मिमी में

125 नाट सीन नाट सीन 04

250 04 04 06

500 06 04 09

1000 08 05 10

2000 14 08 16

सूर्य के प्रकाश में किया गया गो मूत्र को एक्सट्रैक्ट

दवा बनाते समय देखा गया कि सीधे आग से गर्म करने पर गोमूत्र में पाए जाने वाले तत्व वाष्पीकृत हो जाते हैं। इससे उसमें पाए जाने वाले तत्वों की कमी हो जाती है। इसे देखते हुए उसे सूर्य के प्रकाश में उसका डिस्टलाइजेशन (आसवन) किया गया। इससे एक्सट्रैक्ट हुए पदार्थ में गो मूत्र में पाए जाने वाले सारे तत्व मिले। इसके बाद दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी आंकलन किया गया।

दोनों चीजों को मिलने से बढ़ गया सिनर्जेटिक इफेक्ट

उन्होंने बताया कि मुनगे की पत्तियों और गो मूत्र दोनों के एक्सट्रैक्ट को अलग-अलग प्रयोग करके देखा गया। इसमें दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम रही और दवा की भी गुणवत्ता अच्छी नहीं रही। इसके बाद दोनों मुनगे की पत्तियों और गोमूत्र के एक्सट्रैक्ट को एक साथ मिलाया गया। इससे इसकी प्रभावशीलता में दो गुना वृद्धि हुई। इसी को सिनर्जेटिक इफेक्ट कहा जाता है।

इस दवा से चिकन और अंडे में नहीं होगा साइड इफेक्ट

एंटीबॉयोटिक के कारण दवाई काम नहीं कर रही है। ऐसे में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस दवाइयां देनी पड़ती है। लेकिन यह ग्रोथ प्रमोटर पूरी तरह डाइजस्टेबल है। दवा का अंश चिकन या अंडे नहीं रहता। इससे चिकन का वजन बढ़ता है और मांस तथा अंडे की गुणवत्ता भी बढ़ती है। इसके उपयोग से एमडीआर डेवलप होने की संभावना नहीं है। इससे पोल्ट्री फार्म संचालक को भी फायदा होगा।

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