भद्रा की रुकावट नहीं, रात 11.17 बजे तक कर सकते हैं होलिका दहन
रंगोत्सव की शुरुआत आज होलिका दहन के साथ होगी। 2 मार्च को दोपहर 12.52 से शुरू होलाष्टक 9 मार्च को होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाएगा।
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन सोमवार को किया जाएगा। अगले दिन 10 मार्च मंगलवार को होली खेली जाएगी। कई वर्ष बाद होलिका दहन के समय भद्राकाल की रुकावट नहीं पड़ेगी। बल्कि इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण ध्वज योग बन रहा है, जो यश प्रदान करने वाला माना जाता है। आचार्य मोनू महाराज के अनुसार इस बार होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से आरंभ होकर दोपहर 1.10 बजे खत्म हो जाएगा। होलिका पूजन का समय भद्रा के बाद दिनभर किया जा सकता है। इसके बाद होलिका दहन का शुभ मुहूर्त गोधूलि बेला से शुरू होकर पूर्णिमा तिथि की समाप्ति रात 11.17 बजे तक रहेगा। इसी बीच किसी भी समय होलिका दहन विधि विधान से पूजन करके किया जा सकता है। 10 मार्च को होली खेली जाएगी।
बाबाधाम में एक दिन पहले शोभायात्रा, आज जलेगी कपड़ों की होली
उतई|बाबा धाम धनोरा में सोमवार को नारियल, नींबू और कपड़ाें से होली जलेगी। एक दिन पहले यात्रा शोभायात्रा निकाली गई। परंपरा के अनुसार होली का पर्व शुरू होने के पहले नाला के पास स्थापित शेर की मूर्ति पर पूजा पाठ करके चुन्नी चढ़ाकर शोभायात्रा निकाली जाती है। यह शोभायात्रा ग्राम भ्रमण कर सांई मंदिर पहुंची, जहां चादर चढ़ाया गया। आखिर में बाबा दरबार पहुंचने पर खिचड़ी प्रसादी बांटी गई। 9 मार्च को शाम 4 बजे दरबार के सामने लक्ष्मण बाबा, गज्जू बाबा के द्वारा पूजा, पाठ कराया जाएगा। इसके बाद होलिका दहन होगा। दरबार के नंद पंडित ने बताया कि इस तरह की होली केवल धनोरा मे मनती है।
होलिका दहन का वैज्ञानिक महत्व, बैक्टीरिया होते हैं न
बेशक होली रंगों और मस्ती का त्योहार है, लेकिन इसका उतना ही जुड़ाव सेहत से भी है। होली परंपराओं पर विज्ञान कहता है कि यह त्योहार शरीर को स्वस्थ रखने के साथ वातावरण से मच्छर, बैक्टीरिया और कीटों को खत्म करने का काम करता है। होलिका दहन के दौरान परिक्रमा करने पर शरीर में मौजूद बैक्टीरिया का दम घुटने लगता है और अधिक तापमान के संपर्क में आने से ये खत्म होने लगती हैं। साथ ही प्राकृतिक रंगों से होली खेलने का भी अलग ही महत्व है। टेसू के फूलों से बने रंगों का इस्तेमाल करें।