पितृ पक्ष आज से, गायत्री प्रज्ञापीठ में महिलाएं भी कर पाएंगी श्राद्ध

Bhilaidurg News - आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा यानी शनिवार से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ हाे रहा है। इस वर्ष 14 सितंबर को पितृ पक्ष शुरू हो...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:46 AM IST
Bhilai News - chhattisgarh news pitra paksha from today women will also be able to perform shraddha in gayatri prajnapith
आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा यानी शनिवार से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ हाे रहा है। इस वर्ष 14 सितंबर को पितृ पक्ष शुरू हो जाएगा, जो अमावस्या यानी 28 सितंबर तक चलेगा।

यह पक्ष पितरों को याद करने का समय माना जाता है। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों के नाम से पिंडदान, श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं। पं. मोनू महाराज ने बताया कि इस वर्ष अश्विन कृष्ण पक्ष द्वितीय तिथि दो दिन यानी 15 और 16 सितंबर को है। ऐसे में उलझन है यह है कि द्वितीय तिथि का श्रद्ध किस दिन किया जाए।

नियम
मान्यता: आप पितरों को जल जरूर अर्पित करें

पुराणों के अनुसार पितर अपने परिजनों के पास पितृपक्ष श्राद्ध के समय आते हैं और अन्न, जल, आदर की अपेक्षा करते हैं। जिन परिवार के लोग इस दौरान पितरों के नाम से अन्न, जल दान नहीं करते, श्राद्ध कर्म नहीं करते उनके पितर भूखे प्यासे धरती से लौट जाते हैं। इससे परिवार को पितृ दोष लगता है। इसलिए लोग चाहें बाकी कर्म न करें पर अपने पितरों को जल जरूर अर्पित करें।

आप भी जानिए....ये तीन तिथियां है महत्वपूर्ण

प्रथम 14 सितंबर को पितृ आह्वान, पूजन, प्रतिपदा श्राद्ध तर्पण और पिंडदान किया जाएगा। यह तारीख महत्वपूर्ण है।

शहीद सैनिकों के लिए भी होगा श्राद्ध

गायत्री प्रज्ञापीठ में पितृ आह्वान पूजन के बाद देव तर्पण, ऋषि तर्पण, दिव्य मनुष्य तर्पण, दिव्य पितृ तर्पण, यम तर्पण, मनुष्य -पितृ तर्पण और भीष्म तर्पण किए जाते हैं। युद्ध में मारे गए सैनिकों और जिनका अब संसार में कोई नहीं है ऐसे लोगों के लिए इस निमित्त जो कर्मकांड किए जाते हैं उसका लाभ जीवात्मा को श्रद्धा से ही होता है।

दूसरा 23 सितंबर मातृ नवमी पर सभी दिवंगत महिला पितरों के लिए तर्पण पिंडदान किया जाएगा।

तीसरा 28 को पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन वैदिक रीति से पितरों का तर्पण, पिंडदान, विदाई का कार्यक्रम, यज्ञ होगा।

गायत्री परिवार में निशुल्क हाेगा आयोजन, तैयारी पूरी

गायत्री परिवार के रमेश टहनगुरिया ने बताया कि गायत्री प्रज्ञापीठ, हुडको प्रदेश का एकमात्र प्रज्ञापीठ है, जहां लगातार 17 वर्षों से निशुल्क श्राद्ध-तर्पण संस्कार सामूहिक रूप से कराया जा रहा है। तर्पण करने वालों से भारतीय वेशभूषा में आने की प्रार्थना की जाती है। बीते वर्ष लगभग 150 महिलाओं और 600 पुरुषों ने पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण किया था। इस साल भी तैयारी पूरी है।

निशुल्क श्राद्ध-तर्पण संस्कार का 18वां वर्ष

यहां लगातार 17 वर्षों से निशुल्क श्राद्ध-तर्पण संस्कार सामूहिक रूप से कराए जा रहे हैं। तर्पण करने वालों से भारतीय वेशभूषा में आने की प्रार्थना की जाती है। श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन या किसी भी दिन सुबह 7 से 10 बजे तक 3 घंटे का समयदान दे सकते हैं। निशुल्क 15 दिवसीय श्राद्ध तर्पण संस्कार कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रज्ञापीठ के कृष्ण कुमार बेलचंदन, ओंकार प्रसाद सोनी, प्रनील बेलचंदन, दिनेश हियानिया, एचएस सोनकले आदि जूटे हुए हैं।

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